नई दिल्ली। इनफोसिस को निवेशकों की सबसे हितैषी कंपनी के अलावा अच्छी नियोक्ता कंपनी भी कहा जाता है। इसका सबसे बड़ा कारण कर्मचारियों को उनकी मेहनत का उचित पारिश्रमिक देना है। यही कारण है कि इंफोसिस में एक करोड़ या इससे ज्यादा की सैलरी पाने वाले कर्मचारियों की संख्या करीब 2000 है। यह आंकड़ा वित्तीय वर्ष 2017 तक का है। उम्मीद है कि इस संख्या में अब तक और बढ़ोत्तरी हुई होगी। जानकारी के अनुसार इन करोड़पति कर्मचारियों की संख्या में विदेशी कर्मचारियों की संख्या अधिक है। कंपनी की इसके चलते इंप्लाई कॉस्ट भी बढ़ रही है।

अधिग्रहणों ने बढ़ाए करोड़ों की सैलरी वाले कर्मचारी
इंफोसिस ने पिछले कुछ समय में विदेशों में कई अधिग्रहण किए हैं। विदेश में अधिक सैलरी वालों में कंपनी के पुराने कर्मचारियों के साथ ही अधिग्रहण के जरिए आए लोग भी शामिल हो गए हैं। इस सूची में पाल हाइन्स शामिल हैं, जो पहले नोआ कंसल्टिंग के डायरेक्टर थे। अब ये इनफोसिस कंसल्टिंग के एसोसिएट पार्टनर हैं। इन्हें वित्तीय साल 2019 में 6.9 करोड़ रुपये का वेतन मिला है। इनफोसिस कंसल्टिंग के वाइस प्रेसीडेंट और पार्टनर जॉन ब्रिजि की सैलरी 5.7 करोड़ रुपये थी।
2017 तक थे 1700 करोड़पति कर्मचारी
इनफोसिस के पास वित्तयी वर्ष 2017 तक करीब 1700 करोड़पति कर्मचारी थे। वहीं जानकारी के अनुसार 2019 के डेटा में 1,700 से अधिक ऐसे कर्मचारी शामिल नहीं हैं, जिन्हें कंपनी की यूरोपियन शाखाओं ने सीधे नियुक्त किया है। यूरोपियन यूनियन के जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन के कारण यह डेटा साझा नहीं किया जाता है।
महंगे कर्मचारियों से बढ़ रही कंपनी की कॉस्ट
इनफोसिस ने 2017 के बाद से अभी तक अमेरिका में 9,100 से अधिक लोगों को नियुक्त किया है। हालांकि ऐसा करने से कंपनी की कॉस्ट बढ़ रही है। कंपनी ने पहले वित्तीय वर्ष 2020 के लिए अपने मार्जिन का अनुमान 22 से 24 फीसदी का जताया था। लेकिन अब कंपनी ने अपने अनुमान में संशोधन कर दिया है और इसे घटा कर 21 से 23 फीसदी तय किया है।
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