नई दिल्ली। मोदी सरकार के पिछले कार्यकॉल और इस कार्यकाल में ब्लैक मनी पर हमला सबसे टॉप प्रॉयरटी में है। इसलिए सरकार ने संसद में एक रिपोर्ट पेश की है। इस रिपोर्ट में यह बताया गया है कि ब्लैक मनी कैसे विदेश जा रही है और देश में वो कौन से कारोबारी सेक्टर हैं, जहां सबसे ज्यादा ब्लैक मनी जेनरेट होती है। देश 3 प्रतिष्ठित संस्थानों एनआईपीएफपी, एनसीएईआर और एनआईएफएम ने अलग-अलग की गईं शोध किया, जिसके आधार पर एक रिपोर्ट संसद में पेश की गई है।

क्या कह रही है रिपोर्ट
संसद में पेश इस रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 1998 से 2010 के बीच भारतीयों ने देश के बाहर 15 लाख करोड़ रुपये से लेकर 34 लाख करोड़ रुपये (216.48 अरब डॉलर से 490 अरब डॉलर तक) के बीच अघोषित संपत्ति (ब्लैक मनी) जमा की। इस रिपोर्ट के अनुसार सबसे ज्यादा अघोषित संपत्ति जमा जिन सेक्टर्स में जेनरेट हुई है वे हैं रियल एस्टेट, माइनिंग, फार्मास्युटिकल्स, पान मसाला, गुटखा, तम्बाकू, बुलियन, कमोडिटी, फिल्म और एजुकेशन शामिल हैं। मार्च, 2011 में वित्त मंत्रालय ने एनआईपीएफपी, एनसीएईआर और एनआईएफएम से देश के भीतर और बाहर अघोषित आय व संपत्ति का आकलन करने के लिए कहा था।
अनुमान पर आधारित है यह रिपोर्ट
इन 3 संस्थानों की अलग-अलग रिपोर्ट में ब्लैक मनी पर अनुमान बताया गया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, ब्लैकमनी पैदा होने या जमा होने पर न तो कोई विश्वसनीय अनुमान है, न ही इस तरह के अनुमान के लिए कोई सर्व स्वीकार्य तरीका है।
रिपोर्ट के निष्कर्ष
-रिपोर्ट के मुताबिक, नेशनल काउंसिल ऑफ अप्लायड इकोनॉमिक रिसर्च (एनसीएईआर) ने कहा है कि 1980-2010 के दौरान भारत के बाहर 384 अरब डॉलर से 490 अरब डॉलर के बीच अघोषित संपत्ति जमा होने का अनुमान है।
-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फाइनेंशियल मैनेजमेंट (एनआईएफएम) ने कहा कि रिफॉर्म पीरियड (1990-2008) के दौरान भारत से लगभग 216.48 अरब डॉलर की अवैध संपत्ति विदेश भेजी गई।
-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक पॉलिसी एंड फाइनेंस (एनआईपीएफपी) ने कहा कि 1997 से 2009 के दौरान अवैध फंड का आउटफ्लो जीडीपी का तुलना में 0.2 फीसदी से 7.4 फीसदी के बीच रहने का अनुमान है।
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