नई दिल्ली। मोदी सरकार (Modi government) इलेक्ट्रिक वाहनों (Electric vehicles) की एक बड़ी नीति पर काम कर रही है। नीति आयोग ने इस बारे में एक रिपोर्ट तैयार की है। इस रिपोर्ट के अनुसार देश में 31 मार्च 2023 से इलेक्ट्रिक तिपहिया और दुपहिया वाहनों (Electric tricycles and two-wheelers) पर जोर देने को कहा गया है। अगर सरकार इस दिशा में आगे बढ़ती है तो पेट्रोल और डीजल से चलने वाले दूपहिया और तिपहिया वाहनों के निर्माण पर रोक लग जाएगी और केवल इलेक्ट्रिक वाहन ही तैयार किए जाएंगे।

नीति आयोग के पैनल की रिपोर्ट
नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत की अध्यक्षता वाले पैनल यह सिफारिश की है। ईटी में छपी जानकारी के अनुसार एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया है कि ट्रांसफॉर्मेटिव मोबिलिटी (Transformable Mobility) पर स्टीयरिंग कमेटी (Steering committee) ने भारत को इलेक्ट्रिक व्हीकल का मैन्युफैक्चरिंग हब (Manufacturing hub of electric vehicle) बनाने के लिए 31 मार्च, 2023 से इंटरनल कंबशन इंजन (ICE) वाले तमाम थ्री-व्हीलर्स और 31 मार्च, 2025 से 150 CC से कम क्षमता वाले सभी टू-व्हीलर्स पर रोक लगाने की सिफारिश की है।
अब सरकार करेगी फैसला
जानकारी के अनुसार अब सरकार के हाथ में है कि वह इस योजना को कब से लागू करना चाहती है। क्योंकि अगर इस इलेक्ट्रिक वाहनों की इस पॉलिसी पर आगे बढ़ना होगा तो इससे पहले कई और फैसले लेने होंगे। इनमें पुराने वाहनों की स्क्रैपिंग पॉलिसी (Old vehicles scraping policy) को लाना होगा। आंकड़ों के अनुसार अभी देश में जितने भी वाहन बिकते हैं उनमें से 78 फीसदी टू-व्हीलर्स और थ्री-व्हीलर्स ही होते हैं।
सब्सिडी दोगुना करने का प्रस्ताव
इलेक्ट्रिक वाहनों की इस नीति पर तेजी से आगे बढ़ने के लिए इस पैनल ने इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर्स के लिए सब्सिडी को 20 हजार रुपये प्रति किलोवॉट प्रति ऑवर करने का सुझाव दिया है। इस समय यह सब्सिडी 10 हजर रुपये की है। यह सब्सिडी (फास्टर एडॉप्शन ऑफ मैन्युफैक्चरिंग ऑफ इलेक्ट्रिक व्हीकल्स) (Faster Adoption of Manufacturing of Electric Vehicles) यानी फेम (Fame) योजना के तहत दी जाती है, जिसे बढ़ाने का प्रस्ताव है।
पर्यावरण बिगाड़ने वाली वाहनों से वसूला जाए शुल्क
इस पैनल ने सुझाव दिया है कि इंटरनल कंबशन इंजन (ICE) वाले वाहनों से एक निश्चिच शुल्क वसूला जाए। बाद में जमा होने वाले इस शुल्क से इलेक्ट्रिक वाहनों, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर (Charging Infrastructure) और कम से कम एक गीगावाट क्षमता वाले बैट्री संयंत्र की स्थापना पर छूट देने में किया जाएगा।
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