नई दिल्ली। देश में शेयर बाजार (share market) में सूचीबद्ध कंपनियां (listed companies) अपने शेयर गिरवी (Stock mortgage) रखकर बैंक और वित्तीय कंपनियों (Bank and financial companies) से कर्ज (loan) के रूप में पैसा जुटाती हैं। लेकिन अगर यह कर्ज (loan) जरूरत से ज्यादा हो जाए तो कारोबार दिक्कत में आ जाता है। ऐसा ही जी समूह (Zee Group) और अनिल अंबानी की ग्रुप की कंपनियों (Anil Ambani group companies) के साथ हो रहा है। इन दोनों ग्रुप की कंपनियों ने शेयर गिरवी (Stock mortgage) रख कर सबसे ज्यादा कर्ज जुटाया है। आंकड़ों के अनुसार मार्च 2019 तक अनिल अंबानी ग्रुप की 2 कंपनियों ने अपने 95 फीसदी तक शेयर गिरवी रख कर कर्ज जुटाया। यह जानकारी ब्रोकरेज फर्म कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटी (Kotak Institutional Equity) की तरफ से जारी ताजा रिपोर्ट में सामने आई है।

ये है अनिल अंबानी (Anil Ambani) की कंपनियों की हाल
कंपनियों के मालिक पारंपरिक रूप से अपने दूसरे कारोबार के लिए धन जुटाने के वास्ते अपनी सूचीबद्ध कंपनियों की हिस्सेदारी जमानत के रूप में गिरवी रखते हैं। अनिल अंबानी का कारोबारी समूह (Anil Ambani group companies) और एस्सेल समूह (Essel Group) इन दिनों मुश्किल भरे दौर से गुजर रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर (Reliance Infrastructure) में अपनी 98.3 फीसदी और रिलायंस कैपिटल (Reliance capital) की 96.9 फीसदी हिस्सेदारी मार्च 2019 तक गिरवी पड़ी थी।
क्या है एस्सल समूह (Essel Group) का हाल
रिपोर्ट के अनुसार सुभाष चंद्रा के नेतृत्व वाले एस्सल समूह (Essel Group) की दो कंपनियों जी एंटरटेनमेंट (Zee entertainment) और डिश टीवी (Dish tv) के मालिकों की क्रमश: 66.2 फीसदी और 94.6 फीसदी हिस्सेदारी गिरवी है। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटी (Kotak Institutional Equity) की ओर से तैयार यह रिपोर्ट आईएलएंडएफएस के कर्ज संकट के बीच आई है। आईएलएंडएफएस के कर्ज अदायगी में चूक करने से गैर-वित्तीय बैंकिंग कंपनियों (NBFC) के सामने मुश्किलें हो गई हैं।
टॉप 500 कंपनियों का हाल
बंबई शेयर बाजार (BSE) में सूचीबद्ध शीर्ष 500 कंपनियों के विश्लेषण पर आधारित रिपोर्ट में कहा गया है कि मूल्य के आधार पर प्रवर्तकों की गिरवी रखी गई हिस्सेदारी दिसंबर तिमाही की तुलना में मार्च 2019 तिमाही में घटी है। मार्च तिमाही के अंत में प्रवर्तकों की गिरवी रखी हिस्सेदारी घटकर 2.83 प्रतिशत रह गई। दिसंबर 2018 तिमाही में यह 2.98 प्रतिशत थी। प्रवर्तकों के शेयर गिरवी रखने के एवज में बकाया मार्च 2019 तक 1.95 लाख करोड़ रुपये था। यह बीएसई-500 सूचकांक के बाजार पूंजीकरण की तुलना का करीब 1.38 फीसदी है। टॉप 500 कंपनियों में से 116 कंपनियों ने अपने शेयर गिरवी रखे थे। अंबानी समूह की कंपनियां रिलायंस इंफ्रा और रिलायंस कैपिटल उन कंपनियों में से हैं, जहां प्रवर्तकों ने अपनी 95 फीसदी से ज्यादा शेयर गिरवी रखे थे। वहीं स्ट्राइड्स फार्मा, कॉफी डे एंटरप्राइजेज और बजाज कंज्यूमर केयर की गिरवी पड़ी हिस्सेदारी में भी कमी दर्ज की गई है।
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