नई दिल्ली। पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के गृहराज्य गुजरात (Gujarat) में किसानों (farmer) के आलू उगाने पर दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक पेप्सिको (PepsiCo) ने मुकदमा दर्ज कराया है। जहां पेप्सिको (PepsiCo) का कहना है कि आलू की इस खास प्रजाति पर देश में उसका विशेष अधिकार मिला हुआ है, वहीं किसानों ने केंद्र में मोदी सरकार को पत्र लिख कर इस मामले हस्तक्षेप की मांग की है। किसानों (farmer) की मांग है कि उनके खिलाफ दर्ज मामला वापस लिया जाए। वही इस मामले में अहमदाबाद कोर्ट आज यानी 26 अप्रैल को सुनवाई हुई। सूत्रों के अनुसार पेप्सिको ने इस दौरान मौखिक रूप से कहा है कि अगर किसान आलू की विशेष प्रजाति को न उगाने का वादा करें तो वह केस वापस ले सकती है।

जानिए क्या है मामला
पेप्सिको (PepsiCo) का दावा है कि आलू के किस्म एफसी-5 की खेती और उसकी बिक्री पर देश में कंपनी को '2016 में ही विशेष अधिकार हासिल किया था'। वहीं गुजरात के 4 किसानों पर आलू (Potato farmer) की इस किस्म को उगाने का आरोप है। किसानों के इस खास प्रजाति के आलू उगाने पर पेप्सिको (PepsiCo) ने अब किसानों (farmer) के खिलाफ मामला दर्ज कराया है और डेढ़-डेढ़ करोड़ रुपये का मुआवज मांगा है। पेप्सिको (PepsiCo) का कहना है कि किसानों (farmer) ने कंपनी के प्रोडक्ट लेज चिप्स (lays chips) में इस्तेमाल होने वाले आलुओं की प्रजाती उगाई, जो कंपनी के अधिकारों का उल्लंघन करता है।
किसानों ने लिखा मोदी सरकार को पत्र
गुजरात में इन 4 किसानों (farmer) पर पेप्सिको (PepsiCo) के मुकदमा लिखवाने के बाद किसान लामबंद हो रहे हैं। इन किसानों के समर्थन में प्रदेश के 194 किसान कार्यकर्ताओं के हस्ताक्षर से एक पत्र केन्द्रीय कृषि मंत्रालय (Central Ministry of Agriculture) को भेजा गया है। इस पत्र में किसानों (farmer) के अधिकारों के संरक्षण और उन्हें वित्तीय मदद की मांग की गई है। पत्र में गुजरात के आलू उपजाने वाले किसानों के खिलाफ पेप्सिको (PepsiCo) ने दर्ज कराए मुकदमे में हस्तक्षेप की मांग की गई है। हालांकि मीडिया में आई खबरों के मुताबिक किसान संगठनों का कहना है कि पंजीकृत किस्मों के ब्रांडेड बीजों को छोड़कर, कानून उन्हें सभी प्रजाति की फसल और बीज उगाने का अधिकार देता है।
पेप्सिको (PepsiCo) का बयान देने से इनकार
वहीं पेप्सिको (PepsiCo) ने इस मामले में फिलहाल कुछ भी कहने से किनारा कर लिया है। कंपनी का कहना है कि कोर्ट में चल रहे इस मामले में कुछ भी कहना सही नहीं होगा।
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