नई दिल्ली। बीएसएनएल (bsnl) पहली बार अपने कर्मचारियों को सैलरी नहीं दे पाई है। ऐसा फरवरी माह में हुआ है। कंपनी के पास करीब 1.76 लाख कर्मचारी हैं। इसका मुख्य कारण कंपनी के पास फंड की कमी होना है। कंपनी अब इतनी भी कमाई नहीं कर पा रही है कि वह अपने कर्मचारियों को वेतन बांट सके। अब कर्मचारी संगठनों ने संचार मंत्री को पत्र लिखकर मदद मांगी है।

बीएसएनएल (bsnl) का जहां एक तरफ वेतन का बिल 8 फीसदी सालााना की गति से बढ़ता जा रहा है, वहीं उसकी कमाई स्थिर नहीं है। अब हालात ये हैं कि कंपनी का अपनी कुल कमाई का करीब 55 फीसदी सिर्फ वेतन बांटने में खर्च हो रहा है। वही सरकार ने फिलहाल कोई भी वित्तीय सहायता देने का संकेत नही दिया है। ऐसे में उम्मीद है कि कंपनी जैसे जैसे आय होती जाएगी, कर्मचारियों की वेतन का भुगतान का तरीका अपना सकती है। बीएसएनएल (bsnl) के एक अधिकारी के अनुसार कंपनी ने केरल, जम्मू और कश्मीर सहित ओडिशा में वेतन बांटने का काम शुरू कर दिया है।
उल्लेखनीय है, कि करीब छह साल से संकट के दौर से गुजर रही बीएसएनएल (bsnl) व एमटीएनएल (mtnl) की स्थिति लगातार दयनीय होती जा रही है। निजी क्षेत्र की कंपनियों से मिल रही कड़ी प्रतिस्पर्धा और तकनीकी रूप से इन दोनों कंपनियों को आधुनिक उपकरण व अन्य सुविधाएं नहीं मिलने से इनके ग्राहकों की संख्या में लगातार गिरावट आ रही है। वर्तमान में जहां सभी प्राइवेट टेलीकॉम कंपनियां 4जी के साथ अन्य अत्याधुनिक सुविधाएं अपने ग्राहकों को दे रही हैं, वहीं बीएसएनएल (bsnl) इनकी प्रतिस्पर्धा में टिक नहीं पा रही है।
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रिलायंस जियो (reliance jio) की लांचिंग के बाद से देश की लगभग सभी मोबाइल कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर निगेटिव असर पड़ा है। इसका मुख्य कारण पहले रिलायंस जियाे (reliance jio) की तरफ काफी समय तक फ्री सर्विस देना और उसके बाद काफी कम रेट पर डेटा उपलब्ध कराना है। इसके चलते बाकी कंपनियों को भी अपने रेट घटाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। इसके चलते देश की मोबाइल कंपनियों ने अपना कारोबार तक समेट लिया है और अपनी मोबाइल कंपनियां बड़े आपरेटरों को बेच दी हैं।
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