टेलीकॉम ऑपरेटर्स ने मानी TRAI की बात, जियो को देंगी इंटरकनेक्ट प्वाइंट

जब से रिलायंस जियो की स्कीम लॉन्च हुई है तब से उसके साथ विवाद भी शुरू हो गए हैं। पहले टेलीकॉम कंपनियों ने जियो की फ्री सर्विस देने की स्कीम की आलोचना की फिर बाद में 4जी स्पीड को लेकर बहस शुरु हो गई। इस बीच जियो के फ्री वॉयसकॉल सर्विस को अन्य टेलीकॉम कंपनियों ने मुसीबत खड़ी कर दी।

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ट्राई ने किया हस्तक्षेप

एयरटेल, वोडाफोन और आइडिया समेत तमाम टेलीकॉम कंपनियों ने स्पष्ट कर दिया था कि वह जियो को इंटरकनेक्ट प्वाइंट नहीं दे पाएंगे। बात पीएमओ तक पहुंच गई। फिर ट्राई ने सबको साथ बैठाकर बात की और मामला शांत कराया।

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बातचीत से मामला सुलझाने की कोशिश

दूरसंचार क्षेत्र के नियामक ट्राई ने शुक्रवार को दूरसंचार क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों 'रिलायंस जियो, भारती एयरटेल, वोडाफोन और आइडिया' से मुलाकात कर इंटरकनेक्ट प्वाइंट को लेकर कंपनियों के बीच जारी विवाद पर बातचीत की, लेकिन इस बैठक से दूरसंचार उद्योग के संगठन सीओएआई के अधिकारियों को बाहर रखा।

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थम गया विवाद

सूत्रों को मुताबिक ट्राई के हस्तक्षेप के बाद अन्य टेलीकॉम कंपनियों और जियो के बीच चल रहा विवाद लगभग थम गया है, फिर भी टेलीकॉम कंपनियों ने इस बात पर चिंता जाहिर की है कि वह जियो की तरफ से आने वाली फ्री कॉल को कितना संभाल पाएंगी। बताया जा रहा है कि इस मुद्दे पर शुल्क देने की बात जियो की तरफ से कही गई है।

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ये न्याय की लड़ाई: नहाटा

रिलायंस जियो इन्फोकॉम के निदेशक मंडल के सदस्य महेंद्र नहाटा ने घंटे भर चली बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा, 'यह न्याय की लड़ाई है, यह ग्राहकों की लड़ाई है। यह न सिर्फ रिलायंस जियो या एयरटेल या वोडाफोन के ग्राहकों के लिए बल्कि सभी भारतीय ग्राहकों के लिए है।' जियो ने मौजूदा दूरसंचार परिचालकों पर आरोप लगाया है कि वे रिलायंस जियो के मोबाइल नेटवर्क को उनके नेटवर्क से जुड़ने के लिए पर्याप्त संख्या में उपकरण प्रदान नहीं कर रहे हैं।

'बस इंटरकनेक्ट प्वाइंट ही तो मांगा है'

नहाटा ने कहा, 'हमने सही संख्या में संपर्क, सही मात्रा में इंटरकनेक्ट प्वाइंट की मांग की है। हमने ट्राई के सामने अपना विचार रखा, ट्राई की जिम्मेदारी है कि वह इस पर विचार करे। ट्राई ने इस संबंध में कोई समय सीमा निर्धारित नहीं की है।' बता दें कि मोबाइल उपभोक्ताओं के लिए किसी दूरसंचार कंपनी के ग्राहक या नंबर पर फोन करने के लिए इंटरकनेक्ट प्वाइंट आवश्यक है।

बैठक के बाद सामने आया दूसरा विवाद

दूरसंचार क्षेत्र में कार्यरत मौजूदा कंपनियों की ओर से रिलायंस जियो से संघर्षरत उद्योग संगठन सेल्यूलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) ने आरोप लगाया है कि रिलायंस जियो के दबाव में उसे बैठक से बाहर रखा गया।

जियो पर लगा आरोप

उद्योग मंडल के महानिदेशक राजन एस. मैथ्यूज ने कहा, 'सीओएआई को रिलायंस जियो के कहने पर ट्राई की बैठक से बाहर रखा गया और ट्राई ने अप्रत्याशित तौर पर उनकी मांग को चुप-चाप मान लिया।' नहाटा ने इस आरोप को यह कहते हुए खारिज किया कि उन्होंने ऐसा कोई आग्रह नहीं किया। उन्होंने कहा कि जिस किसी को भी आमंत्रित किया गया वे बैठक में भाग लें।

JIO की 31 दिसंबर तक मुफ्त सेवा

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकार (ट्राई) ने इंटरकनेक्ट प्वाइंट क्षेत्रों के संबंध में रिलायंस जियो और एयरटेल, वोडाफोन तथा आइडिया जैसे मौजूदा दूरसंचार परिचालकों के साथ चल रहे विवाद को सुलझाने के लिए बैठक बुलाई थी। रिलायंस जियो ने कहा है कि उसकी सेवा 31 दिसंबर तक मुफ्त हैं, जिसके बाद उपभोक्ताओं से मुफ्त वॉयस काल समेत टैरिफ प्लान के आधार पर शुल्क लिया जाएगा।

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