नयी दिल्ली। लोन के मामले में केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। छोटे-मंझोले कारोबारियों यानी एमएसएमई की सुविधा के लिए सरकार ने बड़ी तैयारी की है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि अगर बैंक बिना कारण बताये लोन देने से इनकार करते हैं तो एमएसएमई उनकी शिकायत कर सकेंगे। संसद में पेश किये गये केंद्रीय बजट 2020-21 के प्रस्तावों को व्यापारियों और उद्योग के सामने पेश करते हुए सीतारमण ने कहा कि यदि बैंक बिना कारण के लोन देने से इनकार कर रहे हैं, तो एमएसएमई इसकी शिकायत भेज सकते हैं। एमएसएमई की ऐसी शिकायत के लिए केंद्र सरकार जल्द ही विशेष केंद्र शुरू करेगी। उन्होंने यह भी बताया कि शिकायत की एक कॉपी संबंधित बैंक प्रबंधक को भी भेजी जानी चाहिए।
ईमेल के जरिये होगी शिकायत
चेन्नई में व्यापारी और उद्योग प्रतिनिधियों के साथ बातचीत में के दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि अगर कोई बैंक बिना कोई कारण बताये एमएसएमई को लोन देने से मना करे है तो वे इसकी शिकायत ई-मेल के जरिए जल्द ही शुरू किये जाने वाले विशेष केंद्र में कर सकते हैं। इसके अलावा सीतारमण ने कहा कि विदेशी मुद्रा भंडार इस समय रिकॉर्ड उच्च स्तर पर है। इसका कारण उन्होंने बताया कि फंडामेंटल अच्छे हैं। अपने लंबे बजट भाषण में सीतारमण ने कहा कि अधिकारियों ने समाज के सभी वर्गों के लिए प्रस्ताव बनाने के लिए कड़ी मेहनत की है।
मैक्रो इकोनॉमिक फंडामेंटल अच्छे
वित्त मंत्री ने इस मौके पर यह भी कहा कि मैक्रो इकोनॉमिक फंडामेंटल्स बहुत अच्छे हैं। सीतारमण ने कहा कि हमारा ध्यान एसेट्स बनाने और बुनियादी ढाँचे में निवेश करने पर है। उन्होंने कहा कि पहले बैंकों में "फोन बैंकिंग" चलती थी, जिसके जरिये अपने करीबियों को लोन दिलवाया जाता था। सीतारमण के मुताबिक इसी कारण बैंको में एनपीए बहुत अधिक बढ़ गये। उनका निशाना यूपीए सरकार की तरफ था। उन्होंने कहा कि हमें बैंकों की एनपीए सुधारने में 4 सालों का समय लग गया।
भारत की अर्थव्यवस्था में एमएसएमई का योगदान
भारत की अर्थव्यवस्था में एमसएमई सेक्टर का बहुत बड़ा योगदान है। इस सेक्टर का देश की जीडीपी में योगदान 28 फीसदी और निर्यात में योगदान 40 फीसदी है। इसके अलावा इस सेक्टर ने करीब 11 करोड़ लोगों को रोजगार भी दिया है। इस बार के बजट में इस सेक्टर के लिए कई तरह की घोषणा की गईं। लोन फेसिलिटी और डेट रिस्ट्रक्चरिंग विंडो के विस्तार का ऐलान किया गया, जिसके बाद रिजर्व बैंक ने डेट रिस्ट्रक्चरिंग स्कीम की तारीख को 31 मार्च से बढ़ाकर 31 दिसंबर 2020 कर दिया है।
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