Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साय सरकार ने सरकारी खर्च घटाने लिए नई पॉलिसी के तहत काम करना शुरु कर दिया है। राज्य शासन की ओर से इस संबंध में दो आदेश भी जारी किए गए जा चुके हैं। इन आदेश के मुताबिक अब बड़े प्रोजेक्ट्स के फंड पर फिर से अनुमति लेनी होगी। इसके साथ ही डिस्ट्रिक्ट माइनिंग फंड यानि डीएमएफ पर सरकार ने रोक लगा दी है। माना जा रहा है कि साय सरकार के इस फैसले से भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी।

छत्तीसगढ़ सरकार के नए आदेश में कहा गया है कि डीएमएफ के पैसों से होने वाले कार्य जो अब तक शुरू नहीं हुए हैं, उनकी फिर से मंजूरी लेनी होगी। स्वीकृति लेने के लिए डिस्ट्रिक्ट माइनिंग फंड परिषद नए सिरे से बनाई जाएगी। नई डिस्ट्रिक्ट माइनिंग फंड पॉलिसी के अनुसार, शासी परिषद की बिना प्रशासकीय अनुमति के कोई नया कार्य शुरू नहीं होगा। यह आदेश तमाम विभागों के प्रमुख, संभाग आयुक्त और कलेक्टर को भेज दिए गए है।
साय सरकार ने अपने आदेश में कहा है कि ऐसे निर्माण कार्य जो शुरु नहीं हुए हैं ,उनके लिए फिर से वित्त विभाग की अनुमति लेनी होगी। विभागीय गतिविधियों के संचालन के लिए केवल जरूरी चीजों की ही खरीदारी होगी। यह आदेश केंद्र सरकार की तरफ से जारी किए गए प्रोजेक्ट या केंद्र सरकार के फंड वाले कार्यों पर लागू नहीं होगा।
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राज्य के खनिज साधन विभाग ने छत्तीसगढ़ जिला खनिज संस्थान न्यास नियम के क्रियान्वयन के बारे में निर्देश जारी करके गया है कि जिला खनिज संस्थान न्यास से स्वीकृत कार्य, जो प्रारंभ नहीं हुए हैं, उन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए। जो कार्य शुरू नहीं हुए उनकी पुनः समीक्षा होगी। डीएमएफ परिषद के अनुमोदन के अनुसार ही आगे की कार्रवाई होगी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी कहा कि डीएमएफ की राशि का उपयोग खनन प्रभावितों के लिए होना चाहिए। प्रभावितों के शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल जैसी मूलभूत जरूरतों को पूरा करने में यह राशि प्राथमिकता के साथ खर्च होनी चाहिए।
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क्या है डीएमएफ फंड ?
जहां तक डिस्ट्रिक्ट माइनिंग फंड नीति की बात है, तो जिला खनिज फाउंडेशन, या डीएमएफ, एक गैर-लाभकारी ट्रस्ट है.जो खनन से संबंधित कार्यों से प्रभावित जनों और क्षेत्रों के हितों और लाभ में काम करने के लिए खान और खनिज (विकास और विनियमन) (एमएमडीआर) संशोधन अधिनियम, 2015 के तहत गठित किया था। डीएमएफ के लिए धन जिला स्तर पर एकत्र किया जाता है। सभी प्रदेशों के डीएमएफ नियमों में, कुछ उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान की जाती है, जो डीएमएफ फंड का कम से कम 60 % पाने के हकदार हैं।
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