E-Wallet में ठगी होने पर क्या हैं आपके अधिकार और कंपनी की जिम्मेदारी, जानिये सब कुछ

नयी दिल्ली। भारत में पिछले कुछ सालों में डिजिटल पेमेंट का चलन काफी बढ़ा है। पेटीएम जैसे कई ई-वॉलेट हैं, जिनके उपयोगकर्ताओं की संख्या करोड़ों में है। ई-वॉलेट का इस्तेमाल करने वालों और इस प्लेटफॉर्म के जरिये होने वाली लेन-देन की संख्या में लगातार बढ़ोतरी भी हो रही है। मगर इसी बीच ई-वॉलेट पर होने वाले फ्रॉड की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। धोखेबाज तरह-तरह से फ्रॉड कर रहे हैं। ई-वॉलेट पर फ्रॉड होने पर आपके अधिकार क्या हैं और सर्विस प्रोवाइडर कंपनी की क्या जिम्मेदारी है इस बारे में बता रहे हैं डेटा गोपनीयता और साइबर कानून विशेषज्ञ विशाल कुमार।

ये हैं ग्राहकों के अधिकार और कंपनी की जिम्मेदारी

ये हैं ग्राहकों के अधिकार और कंपनी की जिम्मेदारी

ई-वॉलेट के माध्यम से ठगी या फ्रॉड हो जाने पर धोखे की घटना की जानकारी और ई-वॉलेट कंपनी ने आपके गोपनीय डेटा की सुरक्षा के लिए क्या जरूरी कदम उठाये हैं ये आप जान सकते हैं। कंपनी आपको ये भी बतायेगी कि व्यक्तिगत डेटा के बारे में क्या प्रोसेस किया जा रहा है । जैसे कि आप उन प्रोसेसर की सूची मांग सकते है जिनके साथ उसका व्यक्तिगत डेटा साझा किया गया है। वहीं ऐसी स्थिति के लिए ई-वॉलेट की जिम्मेदारी है कि अलर्ट करने के लिए ग्राहकों का फोन और ईमेल जरूर रजिस्टर हो। साथ ही पहले से कंपनियां पहले से सुनिश्चित करें कि टोल-फ्री हेल्पलाइन, 24X7 कॉल सेंटर और वेबसाइट फर्जी लेन-देन या प्रीपेड इंस्ट्रूमेंट के नुकसान की सूचना ग्राहकों को मिले। अब उन्हें शिकायत दर्ज करने के लिए ऐप या वेबसाइटों पर सीधा लिंक देना जरूरी है। साथ ही कंपनी को उन्हें शिकायत पर रेस्पोंस भी देना होगा।

डिजिटल लेनदेन में डेटा गोपनीयता कानून कितना कारगर

डिजिटल लेनदेन में डेटा गोपनीयता कानून कितना कारगर

डेटा गोपनीयता कानून डिजिटल लेन-देन में ग्राहकों के अधिकार की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इससे डिजिटल भुगतान इंडस्ट्री एक स्टैंडर्ड तैयार करेगी और अपने ग्राहकों के डेटा को थर्ड पार्टी के साथ साझा करते हुए अलर्ट रहेगी। वहीं डेटा गोपनीयता कानून ग्राहकों के बीच जागरूकता का भी काम करेगा। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, आईटी अधिनियम 2000 और व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक का मसौदा ई-वॉलेट और डिजिटल लेन-देन की निगरानी के लिए सहायक होगा।
इसके अलावा हाल ही में पास किया गया उपभोक्ता संरक्षण कानून उपभोक्ता अधिकारों के लिए बेहतर विकल्प और शिकायतों में मदद करने में सहायक है। मगर एक समस्या यह है कि उपभोक्ता संरक्षण कानून डिजिटल लेनदेन और साइबर लेन-देन को नियंत्रित नहीं कर सकता। इसके लिए लैटेस्ट टेक्नोलॉजी के मुताबिक आईटी अधिनियम, 2000 में संशोधन और अपग्रेड करने की जरूरत है।

उपभोक्ता फॉरम में जाने का विकल्प

उपभोक्ता फॉरम में जाने का विकल्प

ग्राहकों के पास ई-वॉलेट के खिलाफ उपभोक्ता फोरम में जाने के भी विकल्प हैं। आरबीआई ने 19 शहरों में 21 जगहों पर ई-वॉलेट अन्य भुगतान सेवा प्रदाताओं के खिलाफ शिकायत दर्ज करने का विकल्प दे रखा है। अगर ई-वॉलेट कंपनी आपकी समस्या का सही से निवारण न करे तो आपके पास उपभोक्ता फॉरम जाने का विकल्प है। आप अपनी शिकायत शिकायत भी दर्ज कर सकते हैं। यहां शिकायत दर्ज करें : (https://cms.rbi.org.in/cms/IndexPage.aspx?aspxerrorpath=/cms/cms/indexpage.aspx)

डिजिटल लेन-देन के लिए कैसे हो वॉलेट अधिक सुरक्षित

डिजिटल लेन-देन के लिए कैसे हो वॉलेट अधिक सुरक्षित

ई-वॉलेट लेन-देन में नेक्स्ट-जेन तकनीक (बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण) साइबर क्राइम को कम करने में कारगर हो सकता है। इससे ई-वॉलेट और डिजिटल लेनदेन की धोखाधड़ी काफी हद तक रुक सकती है। इससे लेनदेन प्रक्रिया संबंधित अथॉरिटी को डिजिटल मनी को ट्रैक या उसका रिकॉर्ड रखने में आसानी होगी।

ऐसे काम करेगी नयी तकनीक

ऐसे काम करेगी नयी तकनीक

- सबसे पहले एक वॉलेट उपयोगकर्ता दूसरे को फंड ट्रांसफर करेगा।
- फंड ट्रांसफर करने वाले उपयोगकर्ता के लिए पहली प्रमाणीकरण प्रक्रिया पिन है और दूसरी उसका बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण।
- फंड हासिल करने वाले को वेरिफाई करने के लिए 2 प्रमाणीकरण प्रक्रिया होंगी, जिनमें पिन और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण शामिल होगा।
- इसके बाद ही फंड रिसीव करने वाले को भेजने वाले से ट्रांसफर किया पैसा हासिल होगा। मगर अब उसे अपने खाते से जुड़े आधार के जरिये बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की प्रक्रिया करनी होगी।
नयी तकनीक या नियमों के लिए भारत अमेरिका, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया और कुछ अन्य यूरोपीय देशों से डिजिटल और साइबरस्पेस के गुण हासिल कर सकता है। क्योंकि उनके पास गोपनीय डेटा और जानकारी को संभालने के मामले में साइबरस्पेस में बहुत व्यापक और उनके कानून सख्त हैं।

यह भी पढ़ें - दिल्ली पुलिस ने बताया केवाईसी फ्रॉड से बचने का तरीका, आप भी जान लें

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