गर्मी का मौसम आते ही बाजार में संतरे दिखने लगते है मानों जैसे संतरे का सीजन चल रहा है। ऐसे में बाजार में विभिन्न किस्मों के संतरा देखने को मिल रहे हैं।
नई दिल्ली: गर्मी का मौसम आते ही बाजार में संतरे दिखने लगते है मानों जैसे संतरे का सीजन चल रहा है। ऐसे में बाजार में विभिन्न किस्मों के संतरा देखने को मिल रहे हैं। संतरे की अच्छी पैदावार और मुनाफे को लेकर इन दिनों मध्य प्रदेश के सतना जिले के (बिरसिंहपुर तहसील) पगारकला ग्राम के किसान विष्णु तिवारी का नाम चर्चा में हैं। जी हां विष्णु तिवारी महज एक एकड़ में संतरे लगाकर लाखों रुपए कमाते हैं। अच्छी बात तो यह है कि उनको देख आस-पड़ोस के किसान भी संतरे की लाभकारी खेती करने लगे हैं। जो कि वाकई अच्छी बात है। आसान है ये बिजनेस करना, होती है लाखों की कमाई ये भी पढ़ें
बाजार में भी संतरों की खूब मांग
जानकारी दें कि मध्य प्रदेश के सतना जिले का यह किसान 46 वर्षीय विष्णु तिवारी पगारकला गांव में मुख्य रूप से गेंहू चना की खेती करते थे। लेकिन उनका संतरे का बगीचा भी उन्हें बड़ा मुनाफ़ा देता है। इससे होने वाली आमदनी ने उनकी मानों किस्मत ही बदल दी है। उनका कहना है कि एक एकड़ में लगाये संतरे के पौधों से हर साल 4 से 5 लाख की आमदनी हो जाती है। इन दिनों स्थानीय बाजार में भी यहां के संतरों की खूब मांग है।
जीरो बजट की जैविक खेती
महत्वपूर्ण बात तो यह है कि विष्णु जीरो बजट की जैविक खेती कर रहे हैं। उनका कहना हैं कि, हम रासायनिक खादों, कीटनाशक या महंगे संसाधनों का उपयोग नहीं करते हैं। बल्कि, पारंपरिक तरीके से ही पैदावार कर रहे हैं। वे नई कलमें रोपते रहे हैं और संतरा-अमरूद की बागवानी को आय का मुख्य साधन बना चुके हैं। इतना ही नहीं विष्णु का कहना है देश के कई कृषि विशेषज्ञों का यही मानना है कि संतरे की फसल के लिए भारत के अधिकतर क्षेत्रों की जलवायु अनुकूल है, तो महंगी दवाओं की जरूरत नहीं पड़ती। हां, मिट्टी उपजाउू होनी चाहिए।' अब मेरे संतरे के बाग और आमदनी देखकर अन्य कई किसानो नें भी संतरे के बाग लगाये हैं। उन्हें भी मुनाफा हो रहा है। अब ज्यादातर राज्यों में संतरे की खेती होती है।
गर्भवती महिलाओं के लिए काफी अच्छा फल
गर्भवती औरतों के लिए काफी लाभप्रद है यह फल। संतरा खाने के अलावा विशेषकर जूस के रूप में पिया जाता है। हेल्थ एक्सपर्ट की मानें तो यह शरीर को ठंडा एवं मन को प्रसन्न रखने में भी इस फल का कोई सानी नहीं है। इस फल का भारत के अधिकांश व्रत-त्योहार एवं उपवास जैसे धार्मिक कार्यों में भी सेवन किया जाता है तो वहीं चिकित्सा विज्ञान की दृष्टि से भी इसे लाभकारी ही माना जाता है।


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