Kya Hota Hai Upper Circuit Aur Lower Circuit: आपने कई बार ये सुना होगा कि शेयर मार्केट में Upper Circuit या Lower Circuit लग गया है, लेकिन आखिर ये अपर और लोवर सर्किट क्या होता है और इससे अलग-अलग कंपनियों का क्या लेना-देना है। चलिए इसके बारे में आपको सिर्फ 5प्वाइंट में समझाते हैं।

आखिर क्या होता है अपर और लोवर सर्किट? (What Is Upper Circuit And Lower Circuit)
किसी भी शेयर या फिर इंडेक्स में दो तरह के सर्किट लगते हैं। पहला होता है अपर सर्किट। इसका मतलब है कि जब कोई शेयर या इंडेक्स सर्किट जितनी तय सीमा तक चढ़ जाता है तो उसमें अपर सर्किट लग जाता है। वहीं अगर तय सर्किट लिमिट तक गिरावट आ जाती है तो उसमें लोअर सर्किट लग जाता है। अपर सर्किट लगे या लोअर सर्किट लगे, दोनों ही केस में उस शेयर या इंडेक्स में कारोबार रोक दिया जाता है। कुछ केस में ये कारोबार दोबारा शुरू हो जाता है, वहीं कई बार ऐसा होता है कि ये कारोबार पूरे दिन बंद रहता है।
इस बात को आप इस तरह भी समझ सकते हैं कि किसी शेयर की कीमतों में अचानक से आने वाले उतार-चढ़ाव से निवेशकों को बचाने के लिए एक्सचेंज पिछले दिन की शेयर की कीमतों के आधार पर एक शेयर की कीमत पर एक बैंड लगाते हैं। यह बैंड पिछले दिन की प्राइस का 5% या 2% हो सकता है। इससे शेयर की कीमत उस बैंड के बीच में ही रहती है। फिर चाहे मार्केट कितना भी ऊपर या नीचे क्यों न चला जाए। इस बैंड को ही सर्किट कहते हैं। अपर सर्किट (Upper Circuit) और लोवर सर्किट (Lower Circuit) दो अलग तरह के बैंड होते हैं।
उदाहरण से समझें अपर और लोवर सर्किट
मान लीजिए किसी कंपनी के शेयर कल 300 रुपये की कीमत पर बंद हुए और उन पर 25 रुपये की सर्किट लगी है। तो वो शेयर अगले दिन 325 रुपये से ज्यादा और 275 रुपये से कम नहीं हो सकते। ऐसे में 225 रुपये अपर सर्किट हुआ व 175 रुपये लोवर सर्किट होता है।
शेयर मार्केट में अपर और लोवर सर्किट लगने का नियम
1 बजे से पहले बाजार में 10 प्रतिशत की बढ़त या गिरावट दर्ज की जाती है तो उस पर सर्किट लग जाता है। सर्किट लगते ही बाजार 45 मिनट के लिए बंद हो जाता है और फिर 15 मिनट का प्री-ओपनिंग सेशन होता है जिसके बाद दोबारा ट्रेडिंग शुरु होती है। वहीं, अगर 10 प्रतिशत का ये सर्किट 1 बजे के बाद और 2:30 बजे तक के बीच में लगता है तो शेयर बाजार 15 मिनट के बंद रहता है और फिर 15 मिनट का प्री-ओपनिंग सेशन होता है और इसके बाद कारोबार दोबारा शुरु होता है। इसके अलावा अगर 10 प्रतिशत का सर्किट 2:30 बजे के बाद लगता है तो शेयर मार्केट चलता रहता है।
सर्किट के लगने से क्या आपको होता है फायदा?
सर्किट की सुविधा निवेशकों के लिए एक्सचेंज द्वारा प्रदान की जाती है। इससे निवेशक एक दिन में अचानक से आने वाली तेजी व गिरावट से बच सकते हैं। जब भी कोई शेयर सर्किट हिट करता है तो उस दिन के लिए उसकी ट्रेडिंग रोक दी जाती है। फिर कोई भी उस शेयर को न तो खरीद सकता है और न ही बेच सकता है।
सेबी ने बनाया था अपर और लोवर सर्किट का ये नियम
भारत में अपर और लोअर सर्किट का नियम मार्केट रेगुलेटर सेबी ने 28 जून 2001 में बनाया था। नई व्यवस्था लागू होने के बाद पहली बार उस नियम का इस्तेमाल 17 मई 2004 को किया गया था।
More From GoodReturns

RBI G-sec ऑक्शन रिजल्ट्स: आज के नतीजों का क्या मतलब? कट-ऑफ और यील्ड को आसान भाषा में समझें

Tempsens Instruments IPO: आज से खुला निवेश का मौका, जानें प्राइस बैंड और लॉट साइज की पूरी डिटेल

Stock Market Rally: 7 दिनों की गिरावट के बाद बाज़ार में जोरदार वापसी, अब कहां करें Buying?

Milky Mist Dairy Share Price: IPO के बाद लगातार दूसरे दिन शेयर में तूफानी तेजी, लगा अपर सर्किट

17 अगस्त 2026: बाजार की सुस्त शुरुआत के बीच इन स्टॉक्स में मचेगी हलचल, चेक करें F&O बैन लिस्ट

Shiprocket Listing Today: शेयर बाजार में धमाकेदार एंट्री! क्या ₹120 के पार खुलेगा भाव?

Kotak Diversified Equity All Cap NFO: आज बंद हो रहा है निवेश का मौका, क्या आपको दांव लगाना चाहिए?

RBI T-bill Auction: FD से बेहतर रिटर्न या सिर्फ सुरक्षा? जानें निवेश का सही तरीका

FINNIFTY एक्सपायरी: आज बाजार में बड़ा बदलाव! CAS टाइमिंग और इन स्टॉक्स पर रखें नजर

Stocks to Buy Today: 17 अगस्त को बाजार में हलचल, इन शेयरों पर रखें नजर - क्या आज बनेगा मुनाफा?

30 साल का सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड: क्या बैंक FD से बेहतर है यह सरकारी निवेश? जानें सही विकल्प



Click it and Unblock the Notifications