नई दिल्ली। देश और दुनिया में रोज-रोज बदलती अर्थव्यवस्था की स्थिति को देखते हुए विदेशी मुद्रा की सुरक्षा बहुत जरूरी हो गई है। इसका सबसे बड़ा कारण दुनिया में लगातार बड़ी घटनाएं हो रही है। कभी अमेरिका और चीन का ट्रेड वॉर घटता बढ़ता है, तो कभी अमेरिका और ईरान जंग की स्थिति में आ जाते हैं। इसके चलते दुनिया में कारोबार और विदेशी मुद्रा को संभालना कठिन होता जा रहा है। इसी दौरान भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई ने 15 टन सोना (15000 किलो गोल्ड) की खरीदारी ओपन मार्केट से कर ली है। आइये जानते हैं इसका मलतब क्या है, और आगे क्या हो सकता है।
आरबीआई ने खरीदा अचानक गोल्ड
आरबीआई ने अक्टूबर-नवंबर 2019 में करीब 15 टन सोना (15000 किलो गोल्ड) खरीदा है। यह उसके फॉरेक्स रिजर्व का हिस्सा है। आरबीआई ने ऐसा अपनी करेंसी यानी रुपये के उतार-चढ़ाव पर अचानक आने वाले असर से बचने के लिए ऐसा किया है। आरबीआई की यह पिछले कुछ समय में यह सबसे बड़ी गोल्ड की खरीदारी है। रिजर्व बैंक ने दिसंबर 2017 में पहली बार खुले बाजार इतनी ज्यादा सोने की खरीदारी पहली बार की है। आंकड़ों के अनुसार आरबीआई ने नवंबर 2017 से नवंबर 2019 के बीच कुल मिलाकर 24.5 लाख औंस यानी लगभग 76 टन गोल्ड की खरीदारी की है। इससे पहले भारत ने गोल्ड की सबसे बड़ी खरीदारी 2009 में की थी। उस वक्त भारत ने इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (आईएमएफ) से एक साथ 200 टन गोल्ड खरीदा था।
जानिए आरबीआई की चिंता
आरबीआई ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार की सुरक्षा को लेकर गोल्ड की खरीद का फैसला किया है। दुनिया में यह एक सुरक्षित मुद्रा के रूप में भी माना जाता है। रिजर्व बैंक के फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व प्रबंधन की दिसंबर 2019 की रिपोर्ट के अनुसार सेफ्टी और लिक्विडिटी इंडिया में रिजर्व मैनेजमेंट के दो कारण हैं। हालांकि आरबीआई ऐसा करने के दौरान ज्यादा से ज्यादा रिटर्न पाने पर भी ध्यान रहता है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की एक रिपोर्ट के मुताबिक आरबीआई दुनिया में गोल्ड होल्डिंग के मामले में टॉप 10 देशों में शामिल है। भारत का स्थान दुनिया में दसवें नंबर पर है।
विदेशों में भी सुरक्षित रखा गया है गोल्ड
आरबीआई का पास गोल्ड का बड़ा भंडार है। इसका कुछ हिस्सा देश में सुरक्षित रखा गया है, तो कुछ हिस्सा विदेशों में सुरक्षित रखा गया है। सितंबर 2019 तक आरबाीआई के पास 618.17 टन सोना था। इसमें से 325.87 टन गोल्ड बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स के पास सेफ कस्टडी में रखा गया था। आरबीआई की तरफ से दी जानकारी के मुताबिक बाकी सोना देश में ही सुरक्षित रखा गया है। आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार विदेशी मुद्रा भंडार में वैल्यू टर्म में सोने का हिस्सा सितंबर 2019 के अंत में लगभग 6.14 फीसदी हो गया है, जो मार्च 2019 के अंत में लगभग 5.59 फीसदी था।
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