नई दिल्ली। मोदी कैबिनेट ने बीते बुधवार को लेबर कोड ऑन इंडस्ट्रियल रिलेशन 2019 को मंजूरी दी है। इसके बाद कंपनियां किसी भी खास अवधि के लिए फिक्सड टर्म (निश्चित समय के लिए) पर कर्मचारियों को नौकरी पर रख सकेंगी। अगर किसी कंपनी में 100 या इससे ज्यादा कर्मचारी हैं, तो छंटनी से पहले सरकार की इजाजत लेना जरूरी होगा। नए कोड में 100 कर्मचारियों की सीमा बरकरार रखी है। लेकिन साथ में एक नया प्रोविजन जोड़ दिया गया है। इसके तहत कोई कंपनी नोटिफिकेशन के जरिए 100 कर्मचारियों की सीमा को घटा या बढ़ा भी सकती है।

जानिए फिक्स्ड टर्म एंप्लॉयमेंट का मतलब
फिक्स्ड टर्म एंप्लॉयमेंट का मतलब ऐसे कर्मचारियों से है, जिन्हें किसी भी अवधि के लिए काम पर रखा जा सकता है। यह कंपनी की जरूरत पर निर्भर करेगा। जैसे अगर सीजन या अन्य समय पर अचानक कंपनियों कोऑर्डर मिल जाए और उत्पादन बढ़ाने के लिए कर्मचारियों की जरूरत हो तो वह तीन महीने या छह महीने के लिए कर्मचारियों को भर्ती कर सकती है।
शीतकालीन सत्र में पास हो सकता है बिल
संसद के शीत सत्र में यह बिल पेश किया जा सकता है। कैबिनेट मीटिंग के बाद निर्मला सीतारमण ने बताया, "इसका मतलब यह है कि कर्मचारियों को सिर्फ 6 महीने के लिए भी नौकरी के लिए रखा जा सकता है। हालांकि इस दौरान सभी कर्मचारियों को एक समान अधिकार रहेंगे।" इस दौरान श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने कहा कि उन्होंने ट्रेड यूनियन के साथ बातचीत में काफी वक्त बिताया है। कोड मे दो सदस्यीय ट्राइब्यूनल बनाने का प्रावधान भी किया गया है। पहले इसमें एक सदस्यीय ट्राइब्यूनल था। सरकार ने पिछले साल ही सभी सेक्टर के लिए फिक्स्ड टर्म एंप्लॉयमेंट की अनुमति दे दी थी। अभी इसे कोडीफाई किया गया है। इसका मतलब है कि संसद से इसे मंजूरी मिलने के बाद यह कानून बन जाएगा।
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