आज के समय में भारत में सोना खरीदना और बेचना आम बात है। अक्सर आम आदमी पैसे की जरूरत पड़ने पर सोना बेच देता है। ज्यादातर लोगों को यह तो पता होता है कि सोना खरीदने पर हमें टैक्स चुकाना पड़ता है और बेचने
नई दिल्ली: आज के समय में भारत में सोना खरीदना और बेचना आम बात है। अक्सर आम आदमी पैसे की जरूरत पड़ने पर सोना बेच देता है। लेकिन ज्यादातर लोगों को यह तो पता होता है कि सोना खरीदने पर हमें टैक्स चुकाना पड़ता है और बेचने पर भी हमें टैक्स देना पड़ता है। अगर आपके पास पहले से सोना रखा है या गिफ्ट में मिला हुआ है, तो आप उसे बेच सकते हैं। लेकिन यहां पर टैक्स से जुड़े नियम जानना जरूरी हैं, नहीं तो बाद में आपको पछताना पड़ेगा। सोने के भाव में नरमी जारी, चांदी भी टूटी ये भी पढ़ें

सोने की 60-65 प्रतिशत की ही कीमत मिल पाती
टैक्स के नियमों के अनुसार पहले यह देखा जाता है कि रखा या गिफ्ट में मिला सोना आपके पास कब से है, और उस वक्त उसका रेट क्या था। इसके बाद बेचने पर होने वाले फायदे का हिसाब लगाया जाता है। इसी फायदे के अुनसार टैक्स लगता है। हालांकि लोग इस गोल्ड बेचने के दौरान इस बात का ध्यान नहीं रखते हैं, जिसके चलते उन्हें बाद में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इस कारण कई बार ऐसा होता है कि जब आप सोना बेचने जाते हैं तो दुकानदार या ज्वैलर्स आपसे अपनी शर्तों के मुताबिक सोना खरीदना चाहता है। इसके अलावा कई बार वह वैस्टेज या मेल्टिंग चार्ज के रूप में काफी पैसा काट लेता है। ऐसे में आपको आपके सोने की 60-65 प्रतिशत की ही कीमत मिल पाती है। इन चीजों से अगर आप बचना चाहते हैं और सोने की सही कीमत पाना चाहते हैं तो सोना बेचने से पहले इन बातों का ध्यान जरूर रखें।
जानें सभी जरूरी नियमों के बारे में
सोने के ज्वैलरी खरीदते समय
जानकारों की मानें तो सोना कैश, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या नेटबैंकिंग के ज़रिए भुगतान करके खरीदा जा सकता है। जीएसटी लागू होने के बाद से ग्राहकों को गहने खरीदते समय इन्हें बनाने की फीस देनी होती है और इसके अलावा कुल सोने की कीमत का 3 फीसदी भुगतान करना होता है।
सोना बेचते समय
केडिया कमोडिटी के हेड की मानें तो सोना बेचने पर लगने वाला टैक्स इस बात पर निर्भर करता है कि आपने इसे कितने समय तक अपने पास रखा है। इस पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस या लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस के आधार पर टैक्स लगेगा।
शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस (एसटीसीजी)
अगर आप ज्वैलरी खरीदने के 36 महीने के अंदर उसे बेच देते हैं तो इसके बढ़े मूल्य पर आपको शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस टैक्स चुकाना होगा। आपको हुआ फायदा आपकी कुल आय में जोड़ दिया जाएगा। उसके बाद फिर, आप जिस टैक्स-स्लैब में आते हैं, उसके हिसाब से टैक्स चुकाना होगा।
लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस (एलटीसीजी)
अगर सोना खरीदकर आपने उसे तीन साल से ज्यादा अवधि तक रखा है तो आपको इसके बढ़े हुए मूल्य पर लॉन्ग कैपिटल गेंस टैक्स चुकाना होगा। वित्त वर्ष 2017-18 में एलटीसीजी में 20.6% (सेस समेत) की दर से टैक्स लगाया गया।
सोना अगर पैसे के लिए बेच रहे हैं इन बातों का रखेंगे ध्यान
बिल जरूर रखें संभाल कर
कभी सोना खरीद रहे हों तो उसका बिल जरूर संभाल कर रखें। इसमें आपके सोने की शुद्धता, कीमत इत्यादि के बारे में सारी जानकारियां होती हैं। इससे जूलर को आप कम से कम डिडक्शन में अपना सोना बेच सकते हैं। आपके पास बिल न होने की स्थिति में जूलर मनमाने तरीके से सोना खरीद सकता है, यानी आपको नुकसान हो सकता है।
हमेशा रखें ध्यान
अगर ऐसी कोई मानक पद्धति नहीं होती जिससे सोने की कीमत तय की जा सके इसलिए कभी भी सोना बेचने से पहले बाजार में उसकी कीमत का पता जरूर कर लें। अलग-अलग ज्वैलर्स के यहां सोने की अलग-अलग कीमत होती है। ऐसे में पहले से इस बात की जानकारी आपको सोने की ज्यादा से ज्यादा कीमत दिलाने में मदद कर सकती है।
सोने की शुद्धता
आपके सोने की शुद्धता के बारे में आपको सही जानकारी होनी चाहिए। ज्यादातर ज्वैलर्स 91.6 प्रतिशत मात्रा वाले 22 कैरेट सोने को खरीदने को प्राथमिकता देते हैं। ऐसे सोने पर 915 हॉलमार्क का चिह्न लगा होता है। ऐसे में आपको किसी नजदीकी केंद्र पर जाकर अपने गहने की शुद्धता की जांच कराएं और उससे प्रमाण पत्र लें। ऐसा न होने पर जूलर सोने की शुद्धता को कम बताकर पैसे में और कटौती कर सकता है। आपने जिस जगह से सोने की खरीददारी की है वहीं पर उसे बेचना ज्यादा सही होता है। ज्यादातर लोग सोना बेचने के लिए यही सलाह देते हैं। इससे आपको सोने की लगभग वही कीमत मिल सकती है जितने में आपने उसे खरीदा था।
गिफ्ट में मिले सोने पर लगता है टैक्स
वहीं अगर किसी व्यक्ति को सोने की ज्वैलरी गिफ्ट के तौर पर मिलती है और उसकी वैल्यू पूरे साल में 50 हजार रुपये से कम होती है, तो किसी प्रकार का कर देय नहीं होता है। वहीं 50 हजार रुपये से ज्यादा की वैल्यू वाले गिफ्ट के तौर पर मिले सोने पर टैक्स लगता है। अगर किसी व्यक्ति को उसके माता-पिता या फिर भाई-बहन से सोना उपहार में मिलता है तो उस पर छूट होती है। वहीं शादी के वक्त मिले सोने पर भी सभी तरह की छूट मिलती है। इसके साथ ही वसीयत में मिले सोने पर भी छूट मिलती है।
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