Gold खरीदने के 5 तरीके, जानिए सभी के फायदे और नुकसान

5 ways to buy gold: वैसे तो गोल्ड को कई तरीकों से खरीदा जा सकता है। लेकिन भारत में फिजिकल गोल्ड यानी बाजार से जाकर सोना खरीदना ज्यादा पसंद किया जाता है। लेकिन अगर आप चाहते हैं कि आपको 24 कैरेट को गोल्ड मिले तो आपको सोना खरीदने के अन्य तरीकों पर भी विचार करना चाहिए।

यहां पर देश में प्रचलित सोना खरीदने के 5 तरीकों का जिक्र किया जा रहा है। साथ ही यह भी बताया जा रहा है कि किस तरीके से सोना खरीदने में क्या फायदा है और क्या नुकसान। आइये जानते हैं इस बारे में।

5 ways to buy gold

गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF)

गोल्ड ईटीएफ यानी एक्सचेंज ट्रेडेड फंड होते हैं। यह एक तरह से पैसिव निवेश का साधन होते हैं। यहां पर सोने की कीमतों के आधार पर यूनिट का रेट बदलता है। यह फंड 24 कैरेट गोल्ड में निवेश करते हैं। गोल्ड ईटीएफ की एक यूनिट आमतौर पर 1 ग्राम सोने के बराबर होती है।

गोल्ड ईटीएफ के लाभ

  • गोल्ड ईटीएफ को मुद्रास्फीति से अधिक रिटर्न के कारण निवेश के लिए अच्छा माना जाता है
  • यह निवेशकों को पोर्टफोलियो विविधीकरण का मौका देता है
  • वैश्विक अनिश्चितताओं के समय गोल्ड अच्छा निवेश माना जाता है
  • गोल्ड ईटीएफ पूंजीगत लाभ कर (एलटीसीजी टैक्स) के अधीन आता है। इसलिए यहां पर टैक्स के बाद बेहतर रिटर्न पाया जा सकता है
  • गोल्ड ईटीएफ में निवेश आसान है और चोरी या रखने जैसी दिक्कतों को मुक्ति देता है।
  • गोल्ड ईटीएफ में स्टॉक एक्सचेंजों पर आसानी से कारोबार किया जा सकता है। यहां पर कीमत के मामले में पूरी पारदर्शिता होती है।
  • बाजार में जाकर सोने की तुलना में गोल्ड ईटीएफ खरीदना आसान है।

गोल्ड ईटीएफ के कुछ नुकसान

  • डीमैट खाता खुलवाना पड़ता है और वार्षिक शुल्क देना होता है
  • गोल्ड ईटीएफ बेचते और खरीदते समय ब्रोकरेज शुल्क
  • सभी गोल्ड ईटीएफ समान रूप से तरलता प्रदान नहीं करते

गोल्ड म्यूचुअल फंड (Gold Mutual Funds)

गोल्ड ईटीएफ में निवेश करने वाली म्यूचुअल फंड योजनाओं को गोल्ड म्यूचुअल फंड के रूप में जाना जाता है। ये सीधे भौतिक निवेश न करके ईटीएफ के माध्यम से निवेश करते हैं और 'फंड ऑफ फंड्स' की श्रेणी में आते हैं। ये फंड उन निवेशकों के लिए उपयुक्त हैं, जिनके पास डीमैट खाता नहीं है और जो सोने के दाम में बढ़ोतरी का लाभ उठाना चाहते हैं।

गोल्ड म्यूचुअल फंड के लाभ

  • ईटीएफ या बाजार से सोना खरीदने के विपरीत, इनमें कम पैसे में निवेश किया जा सकता है।
  • अन्य म्यूचुअल फंड्स की तरह एनएवी के रेट के आधार पर इन्हें आसानी से बेचा जा सकता है
  • गोल्ड फंड सेबी की तरफ से नियंत्रित होते हैं
  • इलेक्ट्रॉनिक रूप में सोना रखना सबसे सुरक्षित और सुविधाजनक तरीकों में से एक माना जाता है

गोल्ड म्यूचुअल फंड के कुछ नुकसान

  • इनमें चार्ज ईटीएफ से थोड़ा अधिक होता है
  • गोल्ड म्यूचुअल फंड योजनाएं गोल्ड ईटीएफ में निवेश करती हैं, इसलिए दो बार शुल्क लग जाता है

सॉवरेन गोल्ड बांड (Sovereign Gold Bond)

सोने की भौतिक मांग कम करने के लिए 2015 में सरकार की तरफ से सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना शुरू की गई थी। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को आरबीआई भारत सरकार की ओर से जारी करता है।

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के लाभ

  • सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर 2.50 प्रतिशत सालाना ब्याज दिया जाता है।
  • सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड का परिपक्वता मूल्य उस समय 999 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने के पिछले तीन दिनों के औसत बंद होने वाले भाव पर आधारित होता है।
  • सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर कर्ज लिया जा सकता है। कर्ज की राशि आरबीआई की तरफ से सुझाई गई मूल्य निर्धारण प्रक्रिया पर निर्भर है।
  • सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर मिलने वाला ब्याज पर आयकर अधिनियम, 1961 के तहत कर-योग्य है। किन्तु परिपक्वता के समय होने वाले पूंजीगत लाभ में निवेशक को पूर्णतया छूट है, जो इसे लम्बी अवधि के हिसाब से आकर्षक विकल्प बनाता है।

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के कुछ नुकसान

  • सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में 8 साल की परिपक्वता अवधि कुछ निवेशकों के लिए लम्बी होती है
  • 5 साल की न्यूनतम लॉक-इन अवधि
  • न्यूनतम निवेश 1 ग्राम सोना है

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डिजिटल सोना (digital gold)

सोने में ऑनलाइन निवेश के सुविधाजनक और लागत प्रभावी साधनों में से एक है डिजिटल सोना। डिजिटल सोना बिना तिजोरी या लॉकर के रखने का एक तरीका है। निवेशकों की तरफ से खरीदा गया डिजिटल सोना बाजार के 24-कैरट सोने के मूल्य के बराबर होता है।

डिजिटल गोल्ड के लाभ

  • छोटी मात्रा में गोल्ड खरीदा जा सकता है
  • डिजिटल सोना बेचने वाली अधिकांश कंपनियां सुनिश्चित करती हैं कि यह सुरक्षित वाल्टों में रखें। इसके अलावा इस सोने का बीमा भी कराया जाता है।
  • निवेशक इसे कभी भी बेच सकते हैं और अपनी धन राशि प्राप्त कर सकते हैं

डिजिटल सोने के कुछ नुकसान

  • डिजिटल गोल्ड की सेवाएं देने वाली कंपनियां विनियमित नहीं होती हैं
  • अधिकांश कंपनियां 2 लाख रुपये की निवेश सीमा लागू करती हैं

किसी भी शहर का गोल्ड का रेट जानने के लिए यहां क्लिक करें

भौतिक गोल्ड (physical gold)

जो निवेशक केवल भौतिक रूप में यानी बाजार से ही सोना खरीदना पसंद करते हैं, ऐसे तरीके को भौतिक गोल्ड कहा जाता है। ऐसे में गहने, सोने के सिक्के या बार खरीदकर रखे जा सकते हैं। सोने के सिक्के और बार 24 कैरेट शुद्धता के साथ आते हैं। हालांकि गहने के रूप में खरीदा गया सोना 24 कैरेट का नहीं होता है।

भौतिक सोने के लाभ

  • बाजार में आसानी से सोना खरीदा जा सकता है
  • इसके लिए डीमैट खाते की जरूरत नहीं
  • कोई ब्रोकरेज या प्रबंधन शुल्क नहीं
  • आवश्यकता होने पर आसानी से कर्ज लिया जा सकता है

भौतिक सोने के कुछ नुकसान

  • चोरी या खोने का खतरा
  • इसमें भंडारण लागत अधिक हो सकती है
  • सोने की शुद्धता सुनिश्चित करनी पड़ती है

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