इनकम टैक्स विभाग ने हाल ही में ई-फाइलिंग पोर्टल पर ITR-2 समेत कई फॉर्म एक्टिव कर दिए हैं। अब टैक्सपेयर्स इस उलझन में हैं कि रिटर्न अभी भरें या आधिकारिक दस्तावेजों का इंतजार करें। वैसे तो रिटर्न भरने की आखिरी तारीख 31 जुलाई है, लेकिन टैक्स काटने वालों (deductors) के लिए तय 31 मई की डेडलाइन आपके डेटा पर सीधा असर डालती है। ज्यादातर एक्सपर्ट्स की सलाह है कि जब तक आपके फाइनेंशियल रिकॉर्ड में चुकाए गए सभी टैक्स की जानकारी अपडेट न हो जाए, तब तक रुकना ही बेहतर है।
दरअसल, टैक्स काटने वालों के लिए TDS फाइल करने की आखिरी तारीख हर साल 31 मई होती है। इसका मतलब है कि आपका एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) जून की शुरुआत से पहले पूरी तरह सटीक नहीं हो सकता। 15 जून से पहले फाइलिंग करने पर अक्सर आपके दावों और विभाग के रिकॉर्ड के बीच अंतर (mismatch) आ जाता है। जल्दबाजी में की गई फाइलिंग के कारण आपको नोटिस मिल सकता है या आपके टैक्स रिफंड में लंबी देरी हो सकती है।

ITR 2026 पर 31 मई की TDS डेडलाइन का असर
नौकरीपेशा लोगों को फॉर्म-16 का इंतजार करना चाहिए, जिसे कंपनियों के लिए 15 जून तक जारी करना अनिवार्य है। यह डॉक्यूमेंट आपकी सैलरी और अन्य भत्तों पर कटे टैक्स का सबसे बड़ा सबूत होता है। फॉर्म-16 मिलने के बाद इसका मिलान अपने फॉर्म 26AS और टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी (TIS) से जरूर करें। ऐसा करने से यह सुनिश्चित हो जाता है कि ब्याज से हुई कमाई और शेयर बाजार के मुनाफे की जानकारी सही-सही दर्ज की गई है।
अगर आपका डेटा सरल है और AIS अपडेट हो चुका है, तो जल्दी फाइलिंग से रिफंड भी जल्दी मिल सकता है। हालांकि, पहली बार रिटर्न भरने वाले कई लोग बैंक अकाउंट से मिले ब्याज की नई जानकारी को नजरअंदाज करने की गलती कर बैठते हैं। पोर्टल पर मौजूद डेटा से हर एंट्री का मिलान करना आपको भविष्य की सुधार प्रक्रियाओं या टैक्स ऑफिस के पेनल्टी नोटिस से बचाता है। सही वेरिफिकेशन न केवल आपकी फाइनेंशियल हेल्थ को सुरक्षित रखता है, बल्कि आपका टैक्स रिकॉर्ड भी क्लीन बनाता है।
टैक्स डेडलाइन के साथ-साथ जरूरी है स्मार्ट फाइनेंशियल प्लानिंग
किसी भी भारतीय परिवार के लिए टैक्स मैनेज करना एक मजबूत भविष्य की नींव रखने जैसा है। टैक्स बचाना जितना जरूरी है, सही निवेश चुनना आपकी लंबी अवधि की वेल्थ ग्रोथ के लिए उतना ही अहम है। सुरक्षा के लिहाज से फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) आज भी काफी पसंद किए जाते हैं, लेकिन लंबी अवधि में इनके रिटर्न में काफी अंतर हो सकता है। रिटायरमेंट के लिए सही फैसला लेने के लिए FD की तुलना अन्य डेट इंस्ट्रूमेंट्स से करना हमेशा फायदेमंद रहता है।
| निवेश की अवधि | बैंक FD रेट | स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स |
|---|---|---|
| 5 साल | 7.00% | 7.50% |
| 10 साल | 7.25% | 7.70% |
| 15 साल | 7.10% | 8.00% |
ज्यादातर टैक्सपेयर्स के लिए जून के मध्य में रिटर्न फाइल करना सबसे सुरक्षित और गलती-मुक्त विकल्प है। तब तक सभी पोर्टल सिंक हो जाते हैं और आपका कुल टैक्स क्रेडिट सही तरीके से दिखने लगता है। जुलाई की आखिरी मिनट की भागदौड़ से बचने के लिए अभी से अपने बैंक स्टेटमेंट और निवेश के सबूत जुटाना शुरू कर दें। थोड़ा धैर्य रखने से फाइलिंग की प्रक्रिया आसान हो जाएगी और आपका टैक्स रिफंड भी जल्दी क्रेडिट होगा।


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