नई दिल्ली, जुलाई 5। भारतीयों के लिए सोना निवेश करने और खरीदने का एक अहम ऑप्शन है। सोने को एक खास एसेट के रूप में माना जाता है। इसका दर्जा भारत में बहुत अधिक है। यही वजह है कि लोग सोने में अधिक निवेश करते हैं। पहले सोना केवल टेंजिबल फॉर्म में खरीदा जाता था, मगर सोना अब हमारे डिजिटल सिस्टम में आ गया है और इसे वर्चुअल भी खरीदा जा सकता है। टेक्नोलॉजी में प्रगति के साथ, लोग अब गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड, भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी सॉवरेन ट्रेड बॉन्ड और गोल्ड म्यूचुअल फंड के माध्यम से कागजों पर भी सोना खरीद सकते हैं। मगर सवाल यह है कि सुख-दुख का यह साथी इस समय कैसे मुनाफा करा सकता है। इस सवाल का जवाब आगे जानिए।
जोखिम भी हैं गोल्ड के साथ
वैसे तो लोग गोल्ड को पूरी तरह से जोखिम मुक्त निवेश ऑप्शन मानते हैं। मगर हकीकत यह है कि गोल्ड में निवेश के अपने जोखिम हैं। यहां हम आपको बताएंगे कि कैसे आप सोने में किए गए निवेश से जुड़े जोखिम से बच कर इससे पैसा बना सकते हैं।
फिजिकल गोल्ड
जो लोग सोने में निवेश की योजना बना रहे हैं या फिजिकल फॉर्म में सोना खरीदना चाहते हैं (जैसे कि आभूषण, सिक्के, बार आदि) उन्हें इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि सोने की दर, जीएसटी और मेकिंग चार्ज भी उनसे वसूला जाता है। केवल अप्राप्य खर्चों के अलावा, फिजिकल रूप में सोना चोरी का जोखिम, शुद्धता के मामलों सहित ऐसे कई जोखिम सोने के साथ हैं। आपको इसमें स्टोरेज की समस्या भी होती है। इसलिए आपको निवेश के लिहाज से फिजिकल गोल्ड के बजाय ऑनलाइन ऑप्शनों पर ध्यान देना चाहिए।
सॉवरेन गोल्ड बांड
ये ग्राम सोने में अंकित सरकारी सिक्योरिटीज होती हैं। ये फिजिकल सोना रखने का विकल्प हैं, जिसमें निवेशकों को इश्यू प्राइस नकद में देना होता है और बांड मैच्योरिटी पर नकद में रिडीम होते हैं। एसजीबी सीधे अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमतों से जुड़े हैं, इस सोने के विकल्प में निवेश करने से पूंजी में नुकसान हो सकता है। उदाहरण के लिए, यदि निवेशकों ने जिस कीमत पर बॉन्ड खरीदा है, वह उस कीमत से अधिक है, जिस पर निवेशक ने उसी बॉन्ड को रिडीम किया है, तो उन्हें नुकसान हो सकता है। इससे बचने का तरीका यह है कि आप बॉन्ड की कीमत पर ध्यान रखें।
गोल्ड म्यूचुअल फंड
विशेषज्ञ गोल्ड म्यूचुअल फंड को निवेश के लिए एक जोखिम भरा विकल्प मानते हैं क्योंकि उनकी वास्तविक समय की सोने की कीमतों पर निर्भरता होती है जो बाजार की अनिश्चितता से प्रभावित होती हैं। इससे यह विश्लेषण करना कठिन हो जाता है कि यह अनुकूल परिणाम देगा या नहीं। मगर यदि आप लंबे समय के लिए इनमें निवेश करें तो आप फायदा कमा सकते हैं।
गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड
गोल्ड ईटीएफ फिजिकल सोने की तुलना में अधिक महंगा हो सकता है क्योंकि इसमें अतिरिक्त मैनेजमेंट शुल्क जुड़ा हुआ है। निवेशकों को ध्यान देना चाहिए कि गोल्ड ईटीएफ को केवल कैश के रूप में रिडीम किया जा सकता है, न कि सोने के रूप में। मगर रिटर्न के लिए आप यहां पर एसआईपी के जरिए थोड़ा थोड़ा निवेश कर सकते हैं।
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