नई दिल्ली, जुलाई 25। ईपीएफओ के टैक्स नियम बदल गए हैं। बता दें कि कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) में प्रति वर्ष 2.5 लाख रुपये से अधिक का योगदान करने पर इससे होने वाली ब्याज आय पर टैक्स देना जरूरी है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि केंद्रीय बजट 2021 में सरकार ने घोषणा की कि वह ईईई (छूट-छूट-छूट) योजना से लाभान्वित होने वाले हाई इनकम वाले लोगों के लिए टैक्स बेनेफिट कम करेगी।
ईईई यानी पूरी तरह टैक्स फ्री
ईईई या छूट-छूट-छूट टैक्स कैटेगरी इस कैटेगरी के अंतर्गत आने वाले सभी निवेशों को पूरी तरह से टैक्स फ्री बनाती है। ईईई समूहित निवेश 1961 के आयकर अधिनियम के विभिन्न वर्गों द्वारा शासित होते हैं। यहां छूट-छूट-छूट का मतलब है निवेश राशि, प्राप्त ब्याज और मैच्योरिटी राशि तीनों चीजें टैक्स फ्री रहती हैं।
इन धाराओं पर छूट
सबसे लोकप्रिय धाराएं जिनके तहत कोई व्यक्ति टैक्स छूट का क्लेम करने के योग्य है, उनमें धारा 80बी, धारा 80सी, धारा 80डी, धारा 80डीडी, धारा 80ई, धारा 80ईई और धारा 80जीजी शामिल हैं।
5 लाख रु तक की टैक्स छूट
यदि नियोक्ता यानी एम्प्लोयर का ईपीएफ में कोई योगदान नहीं है, तो हाई इनकम अर्जित करने वाले अपने ईपीएफ में 5 लाख रुपये तक के योगदान पर छूट का दावा कर सकते हैं। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने इस घोषणा को लागू करने के लिए वित्त वर्ष 2021-22 में आयकर नियम, 1962 के नियम 9 को शामिल किया था।
टैक्सेशन सिस्टम कैसे करता है काम
जानकार कहते हैं कि इस नियम के अनुसार, एक वित्तीय वर्ष में 2.5 लाख रुपये से अधिक के योगदान वाले ईपीएफओ ग्राहक के दो ईपीएफ या पीएफ खाते होंगे, जहां एक खाते में 2.50 लाख रुपये तक का पीएफ योगदान जमा किया जाएगा, जबकि ढाई लाख रुपये से अधिक की राशि दूसरे में रखी जाएगी। इसलिए, ईपीएफ / पीएफ -1 खाते में अर्जित ब्याज को टैक्स से मुक्त रखा जाएगा। मगर पीएफ / ईपीएफ -2 खाते में अर्जित ब्याज पर ही टैक्स लगेगा। इसका मतलब है कि कर्मचारी के अधिक योगदान पर टैक्स नहीं लगेगा।
उदाहरण से समझें
उदाहरण के लिए यदि कोई कर्मचारी एक वित्तीय वर्ष में 2.7 लाख रुपये का योगदान कर रहा है और एक नियोक्ता द्वारा समान राशि का योगदान दिया जा रहा है, तो पहले पीएफ खाते में 2.5 लाख रुपये जमा किए जाते हैं और दूसरे पीएफ खाते में 20000 रुपये जमा किए जाते हैं। 20,000 रुपये से जो ब्याज आय होगी टैक्स केवल उसी पर लगेगा। सरकारी कर्मचारियों के लिए योगदान पर छूट की सीमा 5 लाख रुपये तक है। इस मामले में भी, दो अलग-अलग खाते मौजूद होंगे। अतिरिक्त योगदान और उस पर अर्जित ब्याज ईपीएफओ के साथ एक अलग खाते में रखा जाएगा। पीएफ, राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) और सेवानिवृत्ति में नियोक्ता का योगदान, एक वर्ष में कुल 7.5 लाख रुपये तक टैक्स फ्री है।
इक्विटी में अधिक निवेश
ईपीएफओ इस महीने इक्विटी में अपने निवेश को मौजूदा 15 फीसदी की सीमा से 20 फीसदी तक बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे सकता है। 29 और 30 जुलाई को होने वाली ईपीएफओ ट्रस्टियों की बैठक के दौरान इस प्रस्ताव पर विचार और मंजूरी मिलने की उम्मीद है।
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