नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के सहयोगी संगठन स्वदेशी जागरण मंच ने नरेन्द्र मोदी सरकार की विदेशी मुद्रा में कर्ज लेने की योजना का विरोध किया है। संगठन ने इसे देश विरोधी बताते हुए सरकार से इस पर दोबारा विवार करने की मांग की है। संगठन के मुताबिक इसका लंबे समय में अर्थव्यवस्था पर खराब प्रभाव होगा। वहीं सगठन ने कहा है कि सरकार के इस कदम के बाद अमीर देश और उसके विदेशी वित्तीय संस्थान भारत की नीतियों को प्रभावित करने का काम करेंगे।

ये है संगठन का कहना
आरएसएस के स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) के सह संयोजक अश्विनी महाजन ने कहा है कि हम ऐसा नहीं होने देंगे। महाजन ने कहा, "हमें यकीन है कि सरकार बॉन्ड पर लिया गया अपना फैसला वापस लेगी।" उन्होंने अर्जेंटीना और तुर्की का उदाहरण देते हुए कहा, "हमें उन देशों के अनुभवों से सीख लेनी चाहिए, जिन्होंने आंतरराष्ट्रीय बाजार से लोन लेकर अपने सरकारी घाटे को पूरा किया।"
वहीं आर्थिक मामलों के लिए बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने कहा है कि आलोचकों ने कुछ रिस्क बताए जाने के बाद भी इस समय सॉवरेन बॉन्ड सबसे सही विकल्प है, क्योंकि सरकार बड़े पैमाने पर निवेश करने की योजना बना रही है।"
क्या होते हैं फॉरेन करेंसी बांड और इन से जुड़ा रिस्क
फॉरेन करेंसी बांड के तहत सरकार विदेशी मुद्रा के रूप में विदेशों से उधार लेती हैं, और बाद में उसे मूलधन और ब्याज के साथ वापस लौटाया जाता है। इसके साथ कुछ रिस्क भी जुड़े हुए होते हैं। इसमें सबसे बड़ा रिस्क होता है, अगर रुपया इस दौरान ज्यादा कमजोर हो गया तो विदेशी मुद्रा में लिए गए लोन के रूप में ज्यादा पैसा लौटाना पड़ता है।
इससे क्या विदेशी सरकारें भारत की आर्थिक नीतियां प्रभावित कर सकती हैं
इस तरह की आशंकाएं भी जताई जाती हैं, लेकिन यह उस देश की अर्थव्यवस्था और सरकार पर निर्भर करता है। भारत में फिलहाल पिछले 5 साल से मजबूत और स्थाई सरकार है। इस दौरान ऐसा कोई दबाव नहीं देखा गया है।
ब्रिटेन की सरकार ने खुशी जताई
वहीं सरकार के इस फैसले से ब्रिटेन की सरकार ने खुशी जताई है और उम्मीद जताई है कि भारत सरकार ब्रिटेन की राजधानी को अपने पहले अंतरराष्ट्रीय सॉवरेन बॉन्ड जारी करने के लिए चुनेगी। हालांकि अभी तक सरकार ने बॉन्ड कहां जारी किए जाएंगे, इस संबंध में कोई जानकारी नहीं दी है।
यह भी पढ़ें : मोदी सरकार जारी करेगी सॉवरेन बांड, जुटाया जाएगा पैसा
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