
आइये हम आपको बताते हैं कि क्या होता है पैन कार्ड यानी पर्मानेंट अकाउंट नंबर (पैन) या स्थायी खाता संख्या दस अंकों की एक अक्षरांकीय संख्या है, जिसे आयकर विभाग द्वारा एक लैमिनेटेड कार्ड के रूप में जारी किया जाता है। कार्ड पर इस प्रारूप- ANRPJ6766G में लिखे नंबर को पैन नंबर कहते हैं।
आयकर रिटर्न, किसी भी आयकर अधिकारी के साथ सभी पत्राचार के लिए पैन लिखना अनिवार्य है। 1 जनवरी 2005 से आयकर विभाग को देय किसी भी भुगतान के लिए चालान पर पैन लिखना अनिवार्य हो जाएगा। यही नहीं यदि आप बैंक में अपने खाते में पैसा जमा करते हैं, उसमें भी पैन नंबर देने से फायदा रहता है। पैन नंबर देने से आपका जमा धन आयकर विभाग की नजर में रहता है और आप किसी भी प्रकार के पचड़े से बच सकते हैं।
वित्तीय प्रत्यक्ष कर के केन्द्रीय बोर्ड द्वारा समय-समय पर अधिसूचित वित्तीय लेनदेन से संबंधित सभी दस्तावेजों में भी पैन लिखना अनिवार्य है। कुछ इस तरह के लेनदेन हैं अचल संपत्ति या मोटर वाहन का क्रय और विक्रय बिक्री या होटल और रेस्तरां या किसी भी विदेशी देश की यात्रा के संबंध में रु. 25,000 /- से अधिक राशि का नकद भुगतान करने के लिए। किसी टेलीफोन या सेलुलर टेलीफोन कनेक्शन प्राप्त करने के लिए भी पैन का उल्लेख करना अनिवार्य है। इसी तरह, किसी बैंक या पोस्ट ऑफिस में रु. 50,000 / - से अधिक समय जमा या एक बैंक में रु. 50,000 / - या उससे अधिक नकद जमा करने पर भी पैन का उल्लेख करना होता है।
पैन किसके पास होना चाहिए?
1. सभी मौजूदा मूल्यांकित व्यक्ति या करदाता या व्यक्ति जिन्हें आयकर रिटर्न प्रस्तुत करने की आवश्यकता हो, दूसरों की ओर से भी, को पैन प्राप्त करना चाहिए।
2. कोई भी व्यक्ति, जो किसी भी वित्तीय लेनदेन की मंशा रखता हो, जहां पैन उद्धृत करना अनिवार्य हो, को पैन प्राप्त करना होगा।
3. मूल्यांकन अधिकारी या तो स्वयं या विशेष अनुरोध पर किसी व्यक्ति को पैन आवंटित कर सकते हैं।
4. लोगों में यह धारणा कि जब वो इंकम टैक्स के दायरे में आयेंगे, तभी पैन कार्ड बनवा सकेंगे, बिलकुल गलत है। आप अगर कुछ नहीं करते हैं तब भी आप पैनकार्ड बनवा सकते हैं।
5. गृहणियों को भी पैन कार्ड रखना चाहिये। कभी भी अगर वो अचानक कोई बिजनेस शुरू करना चाहें तो पैन कार्ड का इंतजार नहीं करना पड़े।


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