सुप्रीम कोर्ट से झटका लगने के बाद अब यस बैंक (Yes Bank) पुनर्विचार याचिका (Review Petition) दाखिल करने की तैयारी में है। शीर्ष अदालत ने 15 अक्टूबर को बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा था, जिसमें बैंक के 8,415 करोड़ रुपये के एडिशनल टियर-1 (AT1) बॉन्ड राइट-ऑफ को रद्द कर दिया गया था। बैंक का अनुमान है कि इस फैसले से उसके कॉमन इक्विटी टियर-1 (CET1) रेशियो पर 250 बेसिस पॉइंट्स (bps) का असर पड़ सकता है। इसके बाद अब रिफंड की प्रक्रिया, म्यूचुअल फंड्स के NAV और बैंक के पूंजी जुटाने के कदमों पर सभी की नजरें टिक गई हैं।
अदालत ने अपने फैसले में माना कि प्रशासक (Administrator) के पास इन बॉन्ड्स को रद्द करने का अधिकार नहीं था, यानी अब ये बॉन्ड्स दोबारा बहाल हो चुके हैं। बकाए के भुगतान पर स्थिति अभी पूरी तरह साफ नहीं है, लेकिन कूपन का भुगतान इंफॉर्मेशन मेमोरेंडम के नियमों के मुताबिक ही होगा। इन दोनों सीरीज पर सालाना 9.5 फीसदी और 9 फीसदी का कूपन रेट तय है। अब यह देखना काफी अहम होगा कि बहाल हुए बॉन्ड्स पर कूपन का भुगतान कब और किस तरह शुरू होता है।

Yes Bank AT1: रिफंड का रास्ता और रिव्यू पेटिशन
नियमानुसार रिव्यू पेटिशन 30 दिनों के भीतर दाखिल करनी होती है और इसमें कोर्ट का फैसला अपने आप स्थगित (Stay) नहीं होता। मामले की जानकारी रखने वाले लोगों का कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी इस रिव्यू पेटिशन में शामिल हो सकता है। अगर सुप्रीम कोर्ट का फैसला बरकरार रहता है, तो निवेशकों को कैश पे-आउट या स्ट्रक्चर्ड सेटलमेंट के जरिए रकम एक्सिस ट्रस्टी (Axis Trustee) और डिपॉजिटरीज के माध्यम से मिलेगी। ऐसे में ऑपरेशनल तैयारियों को दुरुस्त रखना बेहद जरूरी होगा।
कौन हैं AT1 बॉन्डधारक: जरूरी दस्तावेज और KYC
इस भुगतान के हकदार वही निवेशक माने जाएंगे जिनके डिमैट खाते में भुगतान के लिए तय रिकॉर्ड डेट पर बहाल किए गए ISINs - INE528G08352 और INE528G08394 मौजूद थे। अगर आप भी इनमें शामिल हैं, तो अपने हालिया डिमैट स्टेटमेंट, क्लाइंट मास्टर लिस्ट, पैन कार्ड, बैंक डिटेल्स और अपडेटेड संपर्क जानकारी तैयार रखें। दस्तावेजों की जांच और समय-सीमा से जुड़े अपडेट्स के लिए एक्सिस ट्रस्टी के नोटिफिकेशन्स पर नजर बनाए रखें।
डेट म्यूचुअल फंड्स का एक्सपोजर और NAV पर असर
जिन डेट म्यूचुअल फंड स्कीम्स ने इन पेपर्स को अलग (साइड-पॉकेट) करके उनकी वैल्यू शून्य मान ली थी, वे अब फेयर वैल्यूएशन फ्रेमवर्क और वैल्यूएशन एजेंसियों की दरों के हिसाब से इनका पुनर्मूल्यांकन (Revaluation) कर सकती हैं। कोटक म्यूचुअल फंड ने कोर्ट के फैसले की समीक्षा के चलते अपनी दो प्रभावित स्कीम्स में नया निवेश फिलहाल रोक दिया है। निवेशकों को सलाह है कि वे एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMCs) की ओर से आने वाले नोटिस, साइड-पॉकेट खुलासों और पैसों की वसूली के बाद मिलने वाली आय पर नजर रखें।
बैंक की कैपिटल पर नजर और एफडी दरों से तुलना
यस बैंक के मुताबिक, 30 जून 2026 तक प्रो-फॉर्म बेसिस पर उसके CET1 रेशियो में 250 बेसिस पॉइंट्स की गिरावट आ सकती है, जबकि टियर-1 कैपिटल 14 फीसदी के आसपास बनी रहेगी। इसका मतलब है कि कैपिटल बफर मजबूत होने तक बैंक को या तो अतिरिक्त पूंजी जुटानी होगी या अपनी ग्रोथ की रफ्तार थोड़ी धीमी रखनी होगी। रिटर्न की तुलना करने वाले पाठक नीचे दिए गए चार्ट में बड़े बैंकों की एफडी (FD) दरों और AT1 कूपन रेट्स का अंतर समझ सकते हैं।
| इंस्ट्रूमेंट | दर | अवधि / विवरण | स्रोत |
|---|---|---|---|
| यस बैंक AT1 2016 | 9.5% | परपेचुअल; सालाना कूपन | वैल्यू रिसर्च |
| यस बैंक AT1 2017 | 9.0% | परपेचुअल; सालाना कूपन | वैल्यू रिसर्च |
| आईसीआईसीआई बैंक FD (सामान्य) | 6.50% तक | 3 साल 1 दिन से 5 साल | आईसीआईसीआई बैंक |
| आईसीआईसीआई बैंक FD (वरिष्ठ नागरिक) | 7.10% तक | 3 साल 1 दिन से 5 साल | आईसीआईसीआई बैंक |
अगले 7 से 30 दिन बेहद महत्वपूर्ण हैं। रिव्यू पेटिशन के दाखिल होने की तारीख, आरबीआई के किसी भी संकेत, एक्सिस ट्रस्टी के वेरिफिकेशन निर्देशों और एएमसी के वैल्यूएशन सर्कुलर पर नजर बनाए रखें। अगर रिव्यू पेटिशन खारिज होती है या कोर्ट से स्टे नहीं मिलता है, तो कूपन भुगतान, मूलधन के सेटलमेंट और पे-आउट की समय-सीमा को लेकर रोडमैप तेजी से साफ हो जाएगा।


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