Why Is Silver Shining More Than Gold?: पिछले कुछ हफ्तों में देखें तो सोने और चांदी के भाव में जबरदस्त उछाल आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा दुनियाभर के तमाम देशों पर टैरिफ लगाए जाने के बाद जियो-पॉलिटिक्स और ग्लोबल आर्थिक उथल-पुथल के बीच सोना एक सुरक्षित निवेश का ठिकाना रहा है, लेकिन अब चांदी और भी ज़्यादा प्रभावशाली तेज़ी के साथ ध्यान आकर्षित कर रही है।

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस साल लंदन के बाज़ार में चांदी की कीमतों में 70 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जो अक्टूबर के मध्य तक सोने की 55 प्रतिशत की वृद्धि को पार कर गई है। यदि घरेलू बाज़ार की बात करें तो पिछले एक महीने में सोना 18,677 रुपये प्रति 10 ग्राम यानी लगभग 16 प्रतिशत उछला है। 21 सितंबर को देश में सोने का भाव 1,12,323 रुपये/10 ग्राम था। वहीं, तीन महीने में 32,300 रुपये/10 ग्राम यानी 32.7 प्रतिशत चढ़ा है। 21 जुलाई को सोने का भाव 98700 रुपये प्रति 10 ग्राम था जो कि बढ़कर अब 21 अक्टूबर को 1,31,000 रुपये हो गया है।
अब चांदी की कीमत की बात करें तो 1 महीने में यह 35000 रुपये प्रति किलोग्राम या 25.9 प्रतिशत चढ़ी है। 21 सितंबर को देश में चांदी का भाव 1,35,000 रुपये प्रति किलोग्राम था। और तीन महीने में 57000 रुपये प्रति किलोग्राम यानी 50.4 प्रतिशत उछली है। 21 जुलाई को देश में चांदी का भाव 1,13,000 रुपये प्रति किलो था जो बढ़कर आज 21 अक्टूबर को 1,70,000 रुपये प्रति किलो है।
लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन (LBMA) के आंकड़ों से पता चलता है कि 2021 के मध्य से चांदी के भंडार में लगभग एक-तिहाई की भारी गिरावट आई है। इस गिरावट के साथ-साथ लगातार चार वर्षों तक वैश्विक मांग खदान उत्पादन से ज़्यादा रही है, जिससे आपूर्ति भंडार कम हो गया है और बाज़ार तंग हो गया है। निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है, खासकर चांदी-समर्थित एक्सचेंज-ट्रेडेड फंडों में, जिन्हें अपने शेयरों के समर्थन के लिए भौतिक चांदी की छड़ों की आवश्यकता होती है। इस कमी को और बढ़ाते हुए, इस साल की शुरुआत में प्रस्तावित अमेरिकी टैरिफ ने सट्टा खरीदारी को बढ़ावा दिया, जिससे लंदन में हाजिर कीमतें न्यूयॉर्क में वायदा कीमतों से ऊपर चली गईं और तरलता पर दबाव बढ़ गया।
सोने के मुकाबले चांदी के भाव में ज्यादा तेजी क्यों?
अब बड़ा सवाल यह है कि चांदी के भाव में सोने के मुकाबले ज्यादा तेजी क्यों आई है। तो दरअसल, हाल के समय में चांदी के भाव (Silver Prices) में जो तेजी आई है, वह कई आर्थिक और औद्योगिक कारणों के चलते देखने को मिला है।
भारत के त्योहारी सीज़न में मांग बढ़ी
दिवाली और धनतेरस के महापर्व पर आभूषण निर्माताओं ने पिछले साल की तुलना में अपने चांदी के आयात को दोगुना कर दिया है, जबकि वैश्विक कीमतों पर प्रीमियम 10 प्रतिशत से अधिक है। भारतीय मांग में इस उछाल ने पश्चिमी तिजोरियों में भौतिक चांदी के भंडार को और कम कर दिया है, जिससे आपूर्ति की कमी और बढ़ गई है।
निवेशकों का रुझान 'अंडरवैल्यूड' चांदी की ओर
- जब सोने के दाम बहुत ऊपर जाते हैं, निवेशक "कम मूल्यांकन वाली" चांदी की ओर रुख करते हैं।
- Gold-to-Silver Ratio (सोना बनाम चांदी अनुपात) ऐतिहासिक रूप से 80-90 तक पहुंच चुका था - यानी सोना बहुत महंगा हो गया था।
- इस अनुपात के संतुलन के लिए चांदी के दामों में तेज सुधार आना स्वाभाविक था।
ETF और निवेश फंडों की बढ़ती खरीदारी
- Silver ETFs (Exchange Traded Funds) में निवेश बढ़ रहा है।
- यह दर्शाता है कि संस्थागत निवेशक भी चांदी में लॉन्ग-टर्म ग्रोथ की उम्मीद कर रहे हैं।
औद्योगिक मांग में तेजी
- चांदी एक औद्योगिक धातु भी है, जबकि सोना मुख्यतः निवेश और आभूषण के लिए इस्तेमाल होता है।
- इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन (EVs), और मेडिकल उपकरणों में चांदी का व्यापक उपयोग होता है।
- जैसे-जैसे दुनिया "ग्रीन एनर्जी" की ओर बढ़ रही है, सोलर और EV इंडस्ट्री में मांग तेजी से बढ़ रही है, जिससे चांदी की कीमतें ऊपर जा रही हैं।
ग्रीन ट्रांजिशन और सरकारी नीतियां
- कई देशों की सरकारें "नेट ज़ीरो" और क्लीन एनर्जी लक्ष्य के तहत सोलर और बैटरी निर्माण को प्रोत्साहित कर रही हैं।
- इन नीतियों से चांदी जैसी औद्योगिक मेटल्स की मांग दीर्घकालिक रूप से मजबूत बनी है।
औद्योगिक आपूर्ति में कमी
- मेक्सिको, पेरू और चीन जैसे बड़े उत्पादक देशों में खनन गतिविधियां धीमी रहीं।
- नई खदानें खुलने में समय लगता है, इसलिए सप्लाई घट रही है जबकि मांग लगातार बढ़ रही है।
सोलर एनर्जी सेक्टर की मांग
- हर सोलर पैनल में औसतन 20-25 ग्राम चांदी लगती है।
- दुनियाभर में सोलर पावर इंस्टॉलेशन रिकॉर्ड स्तर पर हो रहे हैं।
- भारत, चीन और अमेरिका जैसे देशों की सोलर योजनाओं ने चांदी की खपत को तेजी से बढ़ाया है।
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और ब्याज दरें
- अमेरिका और यूरोप में ब्याज दर स्थिर या घटने की उम्मीद है, जिससे डॉलर कमजोर और कमोडिटी कीमतें (खासकर चांदी) मजबूत होती हैं।
- सोने की तुलना में चांदी का बाजार छोटा है, इसलिए थोड़ी भी डिमांड से कीमत में तेज उछाल आता है।
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