Difference between SGB and Digital Gold: अगर आपके मन में गोल्ड में इंवेस्ट करने की इच्छा है तो फिजिकल गोल्ड से बढ़िया है कि आप सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड या फिर डिजिटल गोल्ड में इंवेस्ट करें।
अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर किसमें निवेश करना ज्यादा बेहतर है और दोनों में क्या-क्या अतंर है तो चलिए आपको इसके बारे में हम आपको बताते हैं।

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड क्या होता है और इसके फायदे?
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड एक सरकारी बॉन्ड होता है और इसे आरबीआई के द्वारा जारी किया जाता है। ये बॉन्ड 1 ग्राम सोने का होता है इसका मतलब है कि 1 ग्राम सोने की जो कीमत होती है वहीं, बॉन्ड की कीमत होती है।
इसमें अगर आप निवेश करते हैं तो जोखिम का खतरा भी काफी कम होता है। इसमें आप 24 कैरेट के 99.9 प्रतिशत शुद्ध सोने में इंवेस्ट कर सकते हैं।
बात करें इसकी मैच्योरिटी की तो आपको बता दें कि इसमें निवेश को मार्केट रेट के हिसाब से पैसे मिलते हैं और सब्सक्राइबर्स को 2.5 प्रतिशत का सालाना ब्याज मिलता है।
डिजिटल गोल्ड क्या होता है और इसके फायदे?
आज के डिजिटल युग में लोगों सिर्फ फिजिकल गोल्ड में ही नहीं बल्कि डिजिटल गोल्ड में भी निवेश करना बहुत पसंद कर रहे हैं।
यह एक ऐसे प्रकार का गोल्ड है जिसे आप आसानी से बेच भी सकते हैं और इसमें निवेश करना भी काफी सुरक्षित माना जाता है। सिर्फ यही नहीं, आप डिजिटल गोल्ड में एक रुपए से भी निवेश करना शुरू कर सकते हैं।
डिजिटल गोल्ड को डिजिटल वॉलेट में रखा जाता है और समय के साथ इसकी कीमत भी बढ़ती जाती है। गूगल पे, फोन पे, अन्य कई सारे ऐप्स के माध्यम से भी आप डिजिटल गोल्ड खरीद सकते हैं।
भारत में एमएमटीसी-पीएएमपी इंडिया प्रा. लिमिटेड, ऑगमोंट गोल्ड लिमिटेड जैसी कंपनियां डिजिटल गोल्ड ऑफर करती हैं। आप डिजिटल गोल्ड को फिजिकल रूप में भी बदल सकते हैं। इसे आप गोल्ड बार, गोल्ड के सिक्कों में भी बदल सकते हैं।
डिजिटल गोल्ड और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के अंतर
आपको बता दें कि डिजिटल गोल्ड में आपको गोल्ड के दामों का तुरंत अपडेट मिलता है। आप रीयल-टाइम मार्केट अपडेट के आधार पर गोल्ड को खरीद या बेच सकते हैं।
सिर्फ यही नहीं, डिजिटल गोल्ड को आप फिजिकल गोल्ड में आसानी से कन्वर्ट कर सकते हैं जबकि सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में आपको यह ऑप्शन नहीं मिलता है।
इसके अलावा सॉवरेन गोल्ड में 5 साल का लॉक-इन टाइम पीरियड होता है और 5 साल पूरा होने के बाद ही आप प्री-मैच्योर रिडम्पशन करा सकते है। मुख्य रूप से सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड 8 साल में मैच्योर होता है।
वहीं, डिजिटल गोल्ड में कोई भी लॉक-इन पीरियड नहीं होता है और इसे कभी भी खरीदा या बेचा जा सकता है। डिजिटल गोल्ड खरीदने के लिए आपको सिर्फ इंटरनेट और नेटबैंकिंग की जरूरत होती है।
डिजिटल गोल्ड पर टैक्स प्लस सेस और सरचार्ज चुकाना पड़ता है और इसके कारण इसका मुनाफा कम हो जाता है।
वहीं डिजिटल गोल्ड को लेकर आधिकारिक तौर पर ऑफिशियल रेगुलेटरी संस्था नहीं है, जबकि सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम केंद्र सरकार के तहत काम करती है। इन दोनों में ही निवेश करने से पहले आपको इनके बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करनी चाहिए।
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