16 अगस्त को सामने आई नई शिकायतों से पता चला है कि साइबर ठग व्हाट्सएप पर नामी ब्रांड्स के सपोर्ट एग्जीक्यूटिव बनकर लोगों को चूना लगा रहे हैं। ये जालसाज पीड़ितों को झांसे में लेकर 'सपोर्ट APK' फाइल डाउनलोड करने या QR कोड स्कैन करने के लिए उकसाते हैं और फिर यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के जरिए खाते से पैसे उड़ा लेते हैं। साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि ठगी के बाद का पहला घंटा सबसे निर्णायक होता है। नुकसान से बचने के लिए तुरंत 1930 पर कॉल करें ताकि 'सिटीजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग सिस्टम' के जरिए फ्रॉड ट्रांजैक्शन को रोका जा सके।
ठगी का यह नया तरीका एंड्रॉइड की एक्सेसिबिलिटी (Accessibility) सेटिंग में सेंध लगाता है। इसके जरिए जालसाज फोन की स्क्रीन देखने के साथ-साथ वन-टाइम पासवर्ड (OTP) चुरा लेते हैं और खुद ही ऐप से पैसे ट्रांसफर कर लेते हैं। भारत में सामने आए मामलों में ये साइबर अपराधी बैंक या कूरियर डिलीवरी का फर्जी अपडेट भेजते हैं और ऐप साइडलोड करवाते ही फोन का पूरा कंट्रोल अपने हाथ में ले लेते हैं। साइबर शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि इस साल व्हाट्सएप और सोशल मीडिया के जरिए भारतीय यूजर्स को निशाना बनाने वाले ऐसे कई 'एंड्रॉइड बैंकिंग ट्रोजन' सक्रिय हैं। इसलिए चैट पर आए किसी भी APK लिंक को खतरे की घंटी ही समझें।

WhatsApp सपोर्ट APK स्कैम: ठगी होने पर पहले 1 घंटे में क्या करें?
साइबर अपराध के मामलों में 'गोल्डन आवर' (पहला घंटा) बेहद मददगार साबित होता है। साइबर फ्रॉड होते ही तुरंत 1930 पर कॉल करें, cybercrime.gov.in पर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराएं और साथ ही अपने बैंक की फ्रॉड हेल्पलाइन पर संपर्क करें। बैंक से अपना अकाउंट, UPI सर्विस और डिटेल लीक हुए कार्ड्स को तुरंत ब्लॉक करने को कहें। बैंकों को भी शिकायत मिलने के शुरुआती 30 मिनट के भीतर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। ध्यान रखें, आपके पास 10 वर्किंग डेज़ में प्रोविजनल क्रेडिट पाने का कानूनी अधिकार है।
एंड्रॉइड सेटिंग्स और UPI ऐप्स में सिक्योरिटी ऐसे जांचें
सबसे पहले फोन से उस संदिग्ध ऐप को डिलीट करें और उसकी एक्सेस हटाएं: Settings → Accessibility पर जाएं और किसी भी अनजान "Installed services" को डिसेबल कर दें। इसके बाद ऐप्स की साइडलोडिंग पर रोक लगाएं: Settings → Apps → Special app access → Install unknown apps में जाकर प्ले स्टोर के अलावा बाकी सभी सोर्स को "Not allowed" पर सेट कर दें। अपने सभी UPI PIN तुरंत बदलें। गूगल पे (Google Pay) ऐसे खतरों को खुद ऑटो-ब्लॉक कर देता है, वहीं फोनपे (PhonePe) आपको तुरंत अपना अकाउंट सुरक्षित या ब्लॉक करने की सुविधा देता है।
फ्रॉड वाले दिन ही पैसों से जुड़ा हर जोखिम खत्म कर लें। अपने UPI ऐप के Mandates या AutoPay सेक्शन में जाएं और जिन ई-मैंडेट्स की जरूरत न हो, उन्हें कैंसिल कर दें (NPCI सभी ऐप्स पर मैंडेट मैनेज करने की सुविधा देता है)। अगर विवाद सुलझ न पाए, तो बैंक से UPI चार्जबैक फाइल करने को कहें। इसके बाद भी बात न बने तो आरबीआई इंटीग्रेटेड ओंबुड्समैन (RBI Integrated Ombudsman) के पास मामला उठाएं। एफआईआर (FIR) दर्ज कराने के लिए 1930 कॉल आईडी, साइबर पोर्टल की रसीद और बैंक का शिकायत टिकट नंबर अपने पास संभाल कर रखें।
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