देश के कई राज्यों में व्हाट्सएप QR कोड हाईजैक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिसे लेकर पुलिस ने नया अलर्ट जारी किया है। 21 और 22 अक्टूबर को राजस्थान पुलिस ने इसे लेकर विस्तृत एडवाइजरी जारी की थी। ठग लोगों को चकमा देकर डिवाइस पेयरिंग कोड या QR कोड स्कैन करवा लेते हैं। जैसे ही आपका व्हाट्सएप उनके सिस्टम से लिंक होता है, जालसाज आपके परिवार, दोस्तों और दुकानदारों को इमरजेंसी का बहाना बनाकर पैसे मांगने के मैसेज भेजने लगते हैं। केंद्रीय एजेंसियां भी इस साल की शुरुआत में ऐसे डिवाइस-लिंकिंग फ्रॉड को लेकर सतर्क कर चुकी हैं।
साइबर अपराधियों का यह तरीका बहुत ही आसान और तेज है, लेकिन इसे इस तरह पेश किया जाता है मानो यह कोई सामान्य सरकारी या बैंकिंग प्रक्रिया हो। वे पेमेंट, केवाईसी (KYC) अपडेट या पार्सल डिलीवरी के बहाने मैसेज भेजकर QR कोड स्कैन करने को कहते हैं। कुछ मामलों में एंड्रॉइड ऐप डाउनलोड करने या सर्विस बंद करने के लिए 'NO' लिखकर रिप्लाई करने को कहा जाता है। जालसाज विदेशी नंबरों, अर्जेंट स्थिति का हवाला देने वाले मैसेज और बैंक या पुलिस के फर्जी लोगो का भी इस्तेमाल करते हैं। इनका मकसद सिर्फ एक होता है—बिना सोचे-समझे आपसे अपना व्हाट्सएप नए डिवाइस से लिंक करवा लेना।

WhatsApp QR‑code hijack scam: immediate locks
सबसे पहले अपने फोन में व्हाट्सएप खोलें, सेटिंग्स में जाएं और Linked Devices पर टैप करके सभी एक्टिव सेशन की जांच करें। अगर कोई अनजान डिवाइस दिखे, तो तुरंत वहां से लॉगआउट कर दें। इसके बाद अपने नंबर को दोबारा रजिस्टर करें ताकि हर जगह से आपका अकाउंट अपने आप लॉगआउट हो जाए। इसके अलावा, टू-स्टेप वेरिफिकेशन ऑन करें, 6-अंकों का पिन सेट करें और रिकवरी ईमेल एड्रेस जरूर जोड़ें। व्हाट्सएप रजिस्ट्रेशन अलर्ट पर पैनी नजर रखें और कभी भी अपना वेरिफिकेशन कोड किसी से शेयर न करें। अगर अकाउंट हैक या लॉक हो जाए, तो व्हाट्सएप सपोर्ट ईमेल के जरिए आपकी पहचान की जांच कर अकाउंट वापस पाने में मदद कर सकता है।
UPI safety: limits, handles and caps
इसके साथ ही, ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचने के लिए अपने यूपीआई (UPI) की सेटिंग्स को भी मजबूत करें। ऐप के अंदर जाकर ऑटोपे (AutoPay) मैंडेट की लिमिट घटाएं, या जो मैंडेट इस्तेमाल में न हों उन्हें पॉज या कैंसिल कर दें। अपने mobilenumber@upi हैंडल को डिसेबल करें और उसकी जगह बिना फोन नंबर वाला कोई दूसरा एलियास (अल्टरनेटिव हैंडल) इस्तेमाल करें। अपने बिलों के हिसाब से हर ट्रांजैक्शन की लिमिट तय करें और पैसे ट्रांसफर करने से पहले पाने वाले का नाम जरूर जांचें। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) की एडवाइजरी में साफ कहा गया है कि किसी भी अनजान इंसान द्वारा भेजे गए QR कोड को कभी स्कैन न करें।
Report fast and protect WhatsApp contacts
अगर आपके साथ वित्तीय धोखाधड़ी हो जाती है, तो पैसे वापस पाने या बैंक खाते को फ्रीज कराने की संभावना बढ़ाने के लिए पहले 1 घंटे (गोल्डन आवर) के भीतर कदम उठाएं। तुरंत 1930 पर कॉल करें और नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। जालसाजी से जुड़े सभी स्क्रीनशॉट और चैट एक्सपोर्ट को सुरक्षित रखें, और फिर अपने परिवार, व्हाट्सएप ग्रुप्स व कॉन्टैक्ट्स को सतर्क करें। इंडियन साइबर क्राइम कोआर्डिनेशन सेंटर (I4C) के मुताबिक, फाइनेंस टीमों को निशाना बनाने के लिए 'बॉस स्कैम' का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। वहीं, केरल पुलिस का 'साइबर वॉल' (CyberWall) संदिग्ध लिंक, फाइल या QR कोड की पहले से जांच करने में मदद कर सकता है।


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