नई दिल्ली। मोदी सरकार अपनी जन औषधि योजना का अब तेजी से विस्तार करना चाह रही है। अभी तक देश में करीब 6000 जन औषधि केन्द्र खोले जा चुके हैं, लेकिन अभी भी हजारों जन औषधि केन्द्र खोलने की योजना है। ऐसे में अगर आप भी अपने शहर में जन औषधि केन्द्र खोलना चाहते हैं तो आपके लिए भी मौका है। जन औषधि केन्द्र खोलने की प्रक्रिया काफी आसान है। यह पूरा काम आप चाहें तो ऑनलाइन भी कर सकते हैं। जन औषधि केन्द्र खोलने में ज्यादा खर्च भी नहीं आता है और जो भी खर्च आता है, वह सरकार धीरे धीरे आपको वापस भी कर देती है। वहीं अच्छा कमीशन मिलने से हर माह मोटी कमाई भी होती है। जन औषधि केन्द्र योजना का विस्तार हर जिले में करने की योजना पर काम शुरू हो चुका है। ऐसे में अगर आप इसे खोलना चाहते हैं तो तुरंत ही इसके लिए आवेदन करें। इन जनऔषधि केंद्र में अभी 800 से ज्यादा तरह की दवाएं बिकती हैं। वहीं अगले 4 साल के दौरान इन केंद्रों से 2000 तरह दवाएं और कम से कम 300 तरह के शल्य चिकित्सा के उपकरण बेचे जाएंगे। इस योजना का पूरा नाम प्रधानमंत्री जन-औषधि योजना (पीएमजेएवाई) है।
आइये जानते हैं कैसे खोल सकते हैं यह जन औषधि केन्द्र
तीन कटेगिरी में हैं खोल सकते हैं जन औषधि केंद्र
पहली कैटेगरी के तहत कोई भी व्यक्ति, बेरोजगार फार्मासिस्ट, डॉक्टर, रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर जन औषधि केंद्र खोल सकता है।
दूसरी कैटेगरी के तहत ट्रस्ट, एनजीओ, प्राइवेट हॉस्पिटल, सोसायटी और सेल्फ हेल्प ग्रुप को जनऔषधि केंद्र खोल सकता है।
तीसरी कैटेगरी में राज्य सरकारों की ओर से नॉमिनेट एजेंसी जनऔषधि केन्द्र खोल सकती है।
जानिए कहां से मिलेगा फार्म
जन औषधि केन्द्र के लिए रिटेल ड्रग सेल्स का लाइसेंस जन औषधि केंद्र के नाम से लेना होता है। 120 वर्ग फुट की दुकान इसे खोलने के लिए आपके पास होना चाहिए। जन औषधि केन्द्र के लिए फार्म यहां से डाउनलोड कर सकते हैं।
इसके बाद आपको आवेदन ब्यूरो ऑफ फॉर्मा पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग ऑफ इंडिया के जनरल मैनेजर (एएंडएफ) के नाम से भेजना होगा।
यह मिलती है सरकारी मदद
सरकार जन औषधि केंद्र खोलने पर 2.5 लाख रुपये तक की मदद करती है। जन औषधि केंद्र से दवाओं की बिक्री से 20 फीसदी तक का मार्जिन मिलता है। इसके अलावा हर महीने होने वाली बिक्री पर अलग से 15 फीसदी का इंसेंटिव दिया जाता है। हालांकि इंसेंटिव की अधिकतम सीमा 10 हजार रुपये महीने तक की फिक्स है। यह इंसेंटिव तब तक मिलेगा, जब तक कि 2.5 लाख रुपये पूरे न हो जाएं। वहीं नक्सल प्रभावित और नॉर्थ ईस्ट के राज्यों में इंसेंटिव की अधिकतम सीमा 15 हजार रुपये प्रति माह तक है।
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