Claims Paid Ratio: जब आप कोई बीमा पॉलिसी खरीदते हैं, तो अक्सर सबसे पहले प्रीमियम की राशि या कंपनी के ब्रांड नाम पर ध्यान देते हैं। लेकिन एक ऐसा फैक्टर भी है जो यह तय करता है कि जरूरत के समय आपका क्लेम मिलेगा भी या नहीं वह है क्लेम्स पेड रेशियो (Claims Paid Ratio)।

यह एक ऐसा आंकड़ा है जो यह बताता है कि बीमा कंपनी ने कितने दावों को सफलतापूर्वक निपटाया है। इसका सीधा असर उस भरोसे पर पड़ता है जो आप बीमा कंपनी पर करते हैं।
क्या होता है क्लेम्स पेड रेशियो?
क्लेम्स पेड रेशियो का मतलब है कि किसी बीमा कंपनी ने साल भर में जितने क्लेम्स (दावे) प्राप्त किए उनमें से कितने का भुगतान किया गया।
उदाहरण के तौर पर:
अगर किसी कंपनी को 1000 क्लेम्स मिले और उसने 950 क्लेम्स का भुगतान किया, तो उसका क्लेम्स पेड रेशियो होगा 95%।
इस रेशियो को जितना अधिक माना जाए, उतना बेहतर माना जाता है क्योंकि यह दर्शाता है कि कंपनी ग्राहकों के दावों को समय पर और ईमानदारी से निपटा रही है।
क्यों है यह इतना जरूरी?
क्लेम मिलने की संभावना बढ़ती है, अगर कोई कंपनी ज्यादा क्लेम्स को मंजूरी देती है, तो आपके दावे के अस्वीकार होने की आशंका कम होती है।
संकट के समय राहत
बीमा एक सुरक्षा कवच है, और संकट के समय आपको आर्थिक राहत तभी मिल सकती है जब कंपनी आपका क्लेम आसानी से स्वीकार करे।
कंपनी की विश्वसनीयता का पैमाना
यह रेशियो बीमा कंपनी की ट्रांसपेरेंसी और प्रोसेस की मजबूती को दर्शाता है।
परिवार की सुरक्षा का भरोसा
अगर आप जीवन बीमा ले रहे हैं, तो आपके परिवार को भविष्य में पैसे मिलेंगे या नहीं, यह इस रेशियो पर निर्भर करता है।
कैसे जांचें यह रेशियो?
भारत में बीमा नियामक संस्था IRDAI हर साल सभी बीमा कंपनियों का डाटा प्रकाशित करती है। इसमें हर कंपनी का क्लेम्स पेड रेशियो दिया होता है, जिसे IRDAI की वेबसाइट पर जाकर देखा जा सकता है। आप चाहें तो किसी बीमा कंपनी की वेबसाइट, ब्रोशर या थर्ड पार्टी इंश्योरेंस पोर्टल्स पर भी यह जानकारी देख सकते हैं।
सिर्फ रेशियो देखना काफी नहीं!
हालांकि क्लेम्स पेड रेशियो बेहद जरूरी है, लेकिन कुछ और बातों पर भी ध्यान देना चाहिए:
क्लेम प्रक्रिया की आसानता - क्या कंपनी क्लेम फॉर्म ऑनलाइन देती है? प्रक्रिया कितनी तेज है?
ग्राहक समीक्षाएं - ग्राहकों का अनुभव क्या रहा है?
टर्नअराउंड टाइम - क्लेम को एक्सेप्ट करने में कितना समय लगता है?
कैशलेस सुविधा - क्या कंपनी अस्पतालों से डायरेक्ट सेटलमेंट करती है?
कब सतर्क हो जाएं?
अगर किसी कंपनी का रेशियो लगातार 80% से नीचे बना रहता है, तो यह एक रेड फ्लैग हो सकता है। इसका मतलब है कि वह कई दावों को खारिज कर रही है। ऐसे में आपको दूसरी कंपनी पर विचार करना चाहिए।
बीमा पॉलिसी सिर्फ एक दस्तावेज नहीं है यह आपके परिवार की वित्तीय सुरक्षा का वादा है। लेकिन अगर जरूरत पड़ने पर क्लेम ही रिजेक्ट हो जाए तो सारा सिस्टम बेमानी हो जाता है। इसलिए बीमा खरीदते समय सिर्फ सस्ते प्रीमियम या आकर्षक विज्ञापनों पर न जाएं। क्लेम्स पेड रेशियो जरूर देखें, कंपनी की छवि और क्लेम प्रोसेस की सरलता की जांच करें।
More From GoodReturns

Chandra Grahan 2026: सूतक काल सुबह 6:23 से शुरू, जानें आपके शहर में कब लगेगा चंद्र ग्रहण

Happy Holi Shayari: रंगों से भी ज्यादा खूबसूरत हैं ये मैसेज, भेजें प्यार का पैगाम, पढ़ें बेस्ट होली मैसेज

Silver Price Today: 2 मार्च को चांदी की कीमत में 35,000 रुपये का उछाल! जानिए प्रति किलो चांदी का रेट

Gold Rate Today: 6 मार्च को सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी! जानिए 24K, 22K और 18K गोल्ड रेट

PNB का बड़ा फैसला! 13 डेबिट कार्ड से ATM कैश निकासी सीमा आधी, जानें किन कार्डधारकों पर पड़ेगा असर

Silver Price Today: शनिवार को बाजार में हड़कंप! फिर चांदी के दाम धड़ाम, जानें 1 किलो चांदी का रेट क्या है?

Happy Holi Wishes: रंगों के इस खास त्योहार पर इन खूबसूरत संदेशों और कोट्स के जरिए अपनों को दें शुभकामनाएं

Gold Rate Today: चंद्र ग्रहण के दिन सोने की कीमतों में आई गिरावट! जानिए 24K, 22K और 18K गोल्ड रेट

Holika Dahan: चंद्र ग्रहण और भद्रा का साया! आज या कल, कब होगा होलिका दहन? जानिए तिथि और शुभ मुहूर्त

Gold Price Today: जियोपॉलिटिकल संकट के बीच 2 मार्च को सोने की कीमतों में जबरदस्त उछाल! जानिए लेटेस्ट गोल्ड रेट

Gold Rate Today: सराफा बाजार में सोने के दामों में लगातार कमी, जानें आज कितना सस्ता हुआ 22K और 24K गोल्ड



Click it and Unblock the Notifications