अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों पर फैसले का वक्त आ गया है। भारतीय समयानुसार 16 सितंबर को देर रात 11:30 बजे इसका ऐलान होगा। इसके बाद 17 सितंबर को करीब 12:00 बजे (आधी रात) प्रेस कॉन्फ्रेंस शुरू होगी। रातों-रात बाजार में होने वाली इस हलचल का सीधा असर भारतीय रुपये और बॉन्ड यील्ड पर पड़ सकता है। फिलहाल डॉलर इंडेक्स 99.4 के करीब ट्रेड कर रहा है। वहीं, अमेरिका की 10 साल की बॉन्ड यील्ड 5 फीसदी के पास पहुंच गई है और भारत की 10 साल की यील्ड 7 फीसदी के आसपास बनी हुई है।
आज रात के फैसले में दो बातें सबसे अहम होंगी। अगर ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो डॉलर मजबूत होगा और दुनिया भर में यील्ड ऊपर जाएगी। अगर दरें नहीं बदलती हैं (होल्ड), तो बाजार को राहत मिलेगी, हालांकि भविष्य के संकेतों (गाइडेंस) पर सबकी नजर रहेगी। भारतीय निवेशकों के लिए अगले 48 घंटे बेहद निर्णायक हैं। बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ने से पहले अपनी एफडी के रिटर्न को सुरक्षित करें, डेट फंड्स के ड्यूरेशन की समीक्षा करें और रुपये में जोखिम का दायरा तय कर लें।

फेड के फैसले का रुपये और जी-सेक यील्ड पर क्या पड़ेगा असर?
अगर अमेरिकी फेड दरें बढ़ाता है, तो आयातकों (इम्पोर्टर्स) की ओर से डॉलर की मांग अचानक बढ़ सकती है। इससे रुपया अपने हालिया निचले स्तर तक गिर सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) तेज गिरावट को तो संभाल सकता है, लेकिन पूरे ट्रेंड को नहीं बदल सकता। इसके अलावा, 10 साल की जी-सेक (सरकारी बॉन्ड) यील्ड बढ़ सकती है। दूसरी तरफ, अगर फेड दरें नहीं बढ़ाता है, तो रुपये में स्थिरता आएगी और बेंचमार्क यील्ड में नरमी देखने को मिल सकती है, जिससे निवेशकों के पोर्टफोलियो को फायदा होगा।
| इंडिकेटर | अगर दरें बढ़ीं (Hike) | अगर दरें नहीं बढ़ीं (Hold) |
|---|---|---|
| रुपया बनाम डॉलर | कमजोरी की आशंका; इम्पोर्टर्स हेजिंग करें; विदेश जाने वाले रेट लॉक करें। | स्थिर से मजबूती की ओर; एक्सपोर्टर्स अपनी कमाई का हेज करें। |
| जी-सेक यील्ड | यील्ड थोड़ी बढ़ सकती है; कीमतें घटेंगी; लॉन्ग ड्यूरेशन फंड्स पर असर। | यील्ड में हल्की नरमी संभव; ड्यूरेशन फंड्स को फायदा; भविष्य के गाइडेंस पर नजर रखें। |
| बैंक FD / स्मॉल सेविंग्स | आगे चलकर FD दरें मामूली बढ़ सकती हैं; 6–12 महीने की लेडरिंग सही रहेगी; स्मॉल सेविंग्स दरें फिलहाल स्थिर। | दरें स्थिर रहेंगी; कम अवधि चुनें; तिमाही समीक्षा के बाद स्थिति देखें। |
| डेट म्यूचुअल फंड्स | गिल्ट, कांस्टेंट-मैच्योरिटी और लॉन्ग ड्यूरेशन फंड्स पर सबसे ज्यादा असर; किश्तों में निवेश करें। | ड्यूरेशन फंड्स को राहत; एक दिन के उछाल के पीछे न भागें; किश्तों में ही निवेश करें। |
| NRI डिपॉजिट (FCNR/NRE) | FCNR रेट्स बेहतर हो सकते हैं; NRE पर असर बैंकों के फैसले पर निर्भर करेगा। | अल्पकालिक तौर पर स्थिर; स्प्रेड्स पर नजर रखें; USD/INR हेजिंग पर विचार करें। |
FD, डेट फंड और NRI डिपॉजिट्स पर क्या होगा असर?
अगर आप फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) कराने की सोच रहे हैं, तो ब्याज दरों के एडजस्ट होने तक 6 से 12 महीने की अवधियों में रुक-रुक कर निवेश (लेडरिंग स्ट्रैटेजी) करना समझदारी होगी। छोटी बचत योजनाओं की दरें सरकार हर तिमाही में तय करती है, इसलिए जल्दबाजी में कोई फैसला न लें। डेट फंड्स की बात करें तो लॉन्ग ड्यूरेशन, गिल्ट और कांस्टेंट-मैच्योरिटी कैटेगरी में बड़ा उतार-चढ़ाव आ सकता है। इसलिए एक बार में पूरा पैसा लगाने के बजाय किश्तों में निवेश करें या टारगेट-मैच्योरिटी फंड्स चुनें। वहीं, कम समय के फंड की जरूरत के लिए लिक्विड या मनी-मार्केट फंड्स ही बेहतर विकल्प हैं।
एनआरआई (NRI) निवेशकों को फॉरेन करंसी नॉन-रेजिडेंट (FCNR) और नॉन-रेजिडेंट एक्सटर्नल (NRE) डिपॉजिट की दरों पर नजर रखनी चाहिए। दरें बढ़ने पर FCNR डिपॉजिट्स पर रिटर्न तुरंत बेहतर हो सकते हैं, जबकि NRE पर असर बैंकों की अपनी नीतियों पर निर्भर करेगा। अगर आपको जल्द ही किसी फीस या यात्रा के लिए भुगतान करना है, तो एक बार में डॉलर बदलने के बजाय धीरे-धीरे चरणबद्ध तरीके से कन्वर्जन करें या सिंपल फॉरवर्ड कवर बुक कर लें। अगले दो दिनों में जल्दबाजी से बचें, धैर्य रखें और अपने वित्तीय लक्ष्यों को ध्यान में रखकर ही जोखिम लें।


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