यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लागू करने की योजना, जो 15 अक्टूबर से तय थी, उसे अब दिवाली के बाद तक के लिए टाल दिया गया है। नई तारीख का ऐलान जल्द किया जाएगा। आम खरीदारों और ज्यादातर दुकानदारों के लिए फिलहाल कुछ भी नहीं बदला है। सभी प्रभावित लेन-देन और रोजाना की बिलिंग पर पहले की तरह ज़ीरो-MDR व्यवस्था ही लागू रहेगी। त्यौहारों के सीजन में लोगों को किसी तरह की असुविधा न हो, इसीलिए यह फैसला लिया गया है। 8 नवंबर के बाद जारी होने वाले आधिकारिक नोटिफिकेशन पर नजर रखें।
जानिए क्या प्रस्ताव था, जिस पर फिलहाल रोक लग गई है: ₹2,000 से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट UPI भुगतान पर 0.4% शुल्क, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 तय थी। रेलवे, फ्यूल, इंश्योरेंस और यूटिलिटीज जैसी चुनिंदा कैटेगरी के लिए फ्लैट ₹5 का चार्ज लगना था। वहीं, हर महीने ₹1 लाख तक की कमाई करने वाले छोटे कारोबारियों (पर्सन-टू-पर्सन-मर्चेंट) के लिए यह शुल्क शून्य ही रखा गया था। आम लोगों के बीच आपस में लेन-देन (Peer-to-Peer) पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त रहेगा। इसके अलावा, MDR पर इनपुट क्रेडिट के साथ 18% जीएसटी लागू होना था।

आज 15 अक्टूबर से क्या बदला?
चेकआउट करते समय ग्राहकों से कोई भी नया चार्ज नहीं लिया जाएगा। दुकानदारों को सलाह दी गई है कि वे अपने ऐप्स या POS (पॉइंट-ऑफ-सेल) मशीनों में शुल्क से जुड़े किसी भी विकल्प को बंद कर दें, दुकानों पर लगे बोर्ड/साइन अपडेट करें और अपने स्टाफ को इस बारे में समझा दें। बिलों में अलग से "UPI फीस" जैसी कोई लाइन न जोड़ें। अधिकारियों ने साफ कहा है कि इस लागत का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला जाना चाहिए और इस नियम के पालन पर कड़ी नजर रखी जाएगी। अगर आपसे कोई गलत सरचार्ज वसूला जाता है, तो अपने बैंक या ऐप पर इसकी शिकायत करें। साइबर धोखाधड़ी या जबरन वसूली के मामलों की शिकायत 1930 पर दर्ज कराएं।
UPI MDR के उदाहरण: पुराना नियम बनाम नया प्रस्ताव
| लेन-देन (Transaction) | मौजूदा मर्चेंट फीस | प्रस्तावित MDR (स्थगित) | MDR पर GST | भुगतान कौन करेगा |
|---|---|---|---|---|
| किराना दुकान पर ₹2,500 | ₹0 | ₹10 (0.4%) | ₹1.80 | दुकानदार; ग्राहक के बिल पर UPI का कोई अलग चार्ज नहीं दिखेगा |
| इलेक्ट्रॉनिक्स पर ₹1,00,000 | ₹0 | ₹300 (अधिकतम) | ₹54.00 | दुकानदार; चेकआउट के समय ग्राहक के लिए कीमत में कोई बदलाव नहीं |
MDR पर लगने वाले जीएसटी (GST) हिस्से पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ उठाया जा सकता है। जिस प्रस्तावित ढांचे को अभी रोका गया है, उसमें ग्राहक के इनवॉइस पर अलग से UPI सरचार्ज जोड़ने की अनुमति नहीं थी, और फ्लैट ₹5 का चार्ज केवल तय सेक्टर्स पर ही लागू था। जब तक दिवाली के बाद नया सर्कुलर जारी नहीं होता, तब तक कीमतों और रसीद के फॉर्मेट को वैसा ही बनाए रखें और ऑटोमैटिक पास-थ्रू सेटिंग्स को बंद रखें।
उम्मीद है कि नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) त्यौहारों के बाद नई समय-सीमा की अधिसूचना जारी करेगा। तब तक, ग्राहक हमेशा की तरह आसानी से भुगतान करते रहें और व्यापारी अपनी मौजूदा व्यवस्था और स्टाफ गाइडलाइंस पर ही कायम रहें। यदि बिल में कोई गलत चार्ज जोड़ा जाता है, तो बिल की फोटो के साथ ऐप के ज़रिए या संबंधित बैंक में शिकायत दर्ज कराएं। पेमेंट साइबर फ्रॉड के मामलों में राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत कॉल करें और cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।


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