8 सितंबर 2026 को टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने देश के सभी टेलीकॉम नेटवर्क पर स्पैम कॉल्स और मैसेज रोकने के लिए नियमों को और सख्त कर दिया है। ट्राई ने साफ किया है कि बिना रजिस्ट्रेशन वाले कॉलर्स को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा, DLT स्क्रबिंग को और कड़ा किया जाएगा और ग्राहकों के लिए शिकायत प्रक्रिया को आसान बनाया जाएगा। नियामक ने SMS में मौजूद संदिग्ध लिंक्स और कॉलबैक नंबरों पर भी सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। नए नियमों के चलते इस हफ्ते से ही मार्केटिंग मैसेज और तय मानकों का पालन न करने वाले टेंप्लेट या हेडर का इस्तेमाल करने वालों पर सीधा असर पड़ेगा। उपभोक्ताओं के लिए 1909 के जरिए शिकायत करना आसान हो गया है, वहीं साइबर फ्रॉड की स्थिति में सीधे 1930 पर रिपोर्ट दर्ज कराई जा सकती है।
टेलीमार्केटर्स और SMS सेंडर्स के लिए ट्राई का संदेश एकदम साफ है। प्रमोशन के लिए सामान्य 10 अंकों वाले मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करने वाली कंपनियों और संस्थाओं के कनेक्शन काट दिए जाएंगे और TCCCPR नियमों के तहत उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। ट्राई ने अपनी हालिया कार्रवाई का जिक्र करते हुए बताया कि महज दो हफ्तों के भीतर 50 से अधिक संस्थाओं को ब्लैकलिस्ट किया गया है और 2.75 लाख से ज्यादा टेलीकॉम रिसोर्सेज डिस्कनेक्ट किए गए हैं। टेलीकॉम नेटवर्क बिना मंजूरी वाले URL या APK वाले मैसेज को ब्लॉक करना जारी रखेंगे और मैसेजों की गहराई से जांच करेंगे ताकि जालसाजों द्वारा छिपाए गए वेरिएबल्स को पकड़ा जा सके।

स्पैम रोकने के लिए ट्राई की समयसीमा और शिकायत करने का तरीका
नियमों के अनुपालन से जुड़ी समयसीमाओं का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। SMS में URL और APK की वाइटलिस्टिंग का नियम 1 सितंबर 2024 से लागू हुआ था। इसके बाद, नवंबर 2024 से सेंडर और टेलीमार्केटर के पूरे नेटवर्क में मैसेजों की ट्रैसेबिलिटी (ट्रेस करने की सुविधा) अनिवार्य कर दी गई थी। टेंप्लेट वेरिएबल्स को प्री-टैग करने के लिए 60 दिन की मोहलत दी गई थी; अब नियमों का पालन न करने वाले SMS रिजेक्ट कर दिए जाते हैं। यूज़र्स को स्पैम कॉल्स या मैसेज आने के तीन दिन के भीतर 1909 या DND ऐप के जरिए UCC शिकायत दर्ज करानी चाहिए। तीन दिन से पुरानी शिकायतों को 'रिपोर्ट' के रूप में दर्ज करें। अगर आपके साथ कोई वित्तीय धोखाधड़ी हुई है, तो तुरंत 1930 पर कॉल करें।
OTP डिलीवरी और मार्केटिंग SMS पर ट्राई के कड़े नियमों का असर
अगर कंपनियों ने अपने हेडर अपडेट नहीं किए हैं, लिंक्स को वाइटलिस्ट नहीं कराया है या वेरिएबल टैग्स ठीक नहीं किए हैं, तो OTP आने में रुकावट आ सकती है। बैंक, ब्रोकर, फिनटेक कंपनियों और सरकारी विभागों को सलाह दी गई है कि वे नए कैंपेन शुरू करने से पहले हेडर ओनरशिप, चेन बाइंडिंग और टेंप्लेट टैगिंग की दोबारा जांच कर लें। AI फिल्टर्स के एडवांस होने से यूज़र्स को स्क्रीन पर 'Suspected Spam' के ज्यादा अलर्ट दिख सकते हैं। वहीं, वैरिफाइड सर्विस कॉल्स को धीरे-धीरे 1600-सीरीज जैसे रेगुलेटेड नंबरों पर शिफ्ट किया जा रहा है। कंपनियों द्वारा जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करने और स्क्रबिंग क्लियर होने के बाद SMS डिलीवरी सामान्य हो जाएगी।
आम पाठकों के लिए तीन जरूरी बातें ध्यान रखना फायदेमंद रहेगा। सबसे पहले अपनी DND प्रेफरेंस जांचें और केवल जरूरी कैटेगरी को ही मैसेज की अनुमति दें; साथ ही 'हेडर इंफॉर्मेशन पोर्टल' के जरिए सेंडर की पहचान वैरिफाई करें। स्पैम मैसेज या कॉल आने पर तीन दिनों के भीतर 1909, ट्राई DND ऐप या अपने टेलीकॉम ऑपरेटर के पोर्टल के जरिए शिकायत दर्ज कराएं। अगर पैसों का नुकसान हुआ है या साइबर फ्रॉड का खतरा है, तो बिना देरी किए 1930 डायल करें। वहीं, मार्केटर्स को आज ही अपने DLT एसेट्स का ऑडिट कर लेना चाहिए और 10-अंकीय नंबरों से प्रमोशनल कॉल्स तुरंत बंद कर देनी चाहिए।
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