जुलाई से सितंबर (Q2) तिमाही के लिए TDS और TCS स्टेटमेंट दाखिल करने की आखिरी तारीख कल, यानी 31 अक्टूबर 2026 है। आज की तारीख तक CBDT की ओर से डेडलाइन बढ़ाने का कोई ऐलान नहीं किया गया है। याद रखें कि हाल ही में मिली राहत सिर्फ ITR दाखिल करने वालों के लिए थी, TDS/TCS स्टेटमेंट के लिए नहीं। अगर आप 1 नवंबर या उसके बाद रिटर्न भरते हैं, तो धारा 234E (Section 234E) के तहत लेट फीस लगनी शुरू हो जाएगी। यह पेनल्टी 200 रुपये प्रति दिन है, जो आपकी कुल टैक्स राशि से अधिक नहीं हो सकती। इसलिए आखिरी समय में पोर्टल पर होने वाले हैवी ट्रैफिक से बचने के लिए अभी वैलिडेशन पूरा करके अपना रिटर्न अपलोड कर लें।
किसे कौन सा फॉर्म फाइल करना है और क्या अपलोड करना होगा? सैलरी TDS के लिए एम्प्लॉयर्स को फॉर्म 24Q भरना होता है। भारतीय निवासियों को किए गए भुगतानों के लिए बिजनेस फॉर्म 26Q और नॉन-रेजिडेंट्स (अनिवासियों) के लिए 27Q फाइल करेंगे। वहीं TCS कलेक्शन के लिए 27EQ फॉर्म का इस्तेमाल होता है। अपना रिटर्न Protean RPU में तैयार करें, फिर इसे FVU के जरिए वैलिडेट करें और इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर CSI फाइल के साथ.fvu फाइल अपलोड कर दें। आप DSC या EVC के जरिए इसे सबमिट कर सकते हैं और फाइलिंग के बाद मिला PRN एक्नॉलेजमेंट सुरक्षित रख लें।

TDS/TCS Q2 फाइलिंग: लास्ट-मिनट चेकलिस्ट, TRACES की गलतियां और लेट फीस का गणित
फाइलिंग से पहले अपने चालान के साथ TAN, PAN, नाम और सेक्शन कोड का सही मिलान (match) जरूर कर लें। शॉर्ट-पेमेंट डिफॉल्ट से बचने के लिए चालानों को सही तरीके से टैग करें। अगर कोई गड़बड़ी दिखती है, तो TRACES से Justification Report डाउनलोड करें और फ्लैग की गई पंक्तियों को ठीक करें। यदि "PAN of authorised person mismatch" की एरर आ रही है, तो पोर्टल पर पर्सनल इन्फॉर्मेशन अपडेट करें। नया चालान जोड़ना C9 करेक्शन के तहत आता है, जिसे अब TRACES पर ऑनलाइन सुधारा जा सकता है। किसी भी करेक्शन के बाद FVU से फिर से वैलिडेट करें और बिना देर किए तुरंत अपलोड कर दें।
आइए लेट फीस का गणित एक आसान उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए कि आपने सितंबर का 50,000 रुपये का TDS 10 दिन देर से जमा किया। इस पर धारा 201(1A) के तहत 1.5% प्रति माह की दर से 750 रुपये का ब्याज बनेगा। इसके बाद अगर आप Q2 का स्टेटमेंट 3 नवंबर को दाखिल करते हैं, तो 3 दिन की देरी के हिसाब से 200 रुपये प्रति दिन के मान से 600 रुपये की लेट फीस (जो टैक्स राशि तक ही सीमित होगी) देनी होगी। वहीं, बार-बार ऐसी लापरवाही करने पर धारा 271H के तहत 10,000 रुपये से लेकर 1,00,000 रुपये तक का भारी जुर्माना लग सकता है।
पुराना बनाम नया टैक्स रिजीम: Q3 पेरोल के लिए जरूरी बातें
| Old Regime | New Regime |
|---|---|
| इसे चुनना पड़ता है; सैलरी TDS के लिए यह डिफॉल्ट विकल्प नहीं है। | वित्त वर्ष 2023–24 से टैक्सपेयर्स के लिए यह बाय-डिफॉल्ट विकल्प है। |
| स्टैंडर्ड डिडक्शन 50,000 रुपये है। | स्टैंडर्ड डिडक्शन 75,000 रुपये तक मिलता है। |
| जरूरी सबूतों के साथ फॉर्म 124 (पहले 12BB) लेना होता है। | दस्तावेजों की कम जरूरत; बस रिजीम के चुनाव का कन्फर्मेशन चाहिए। |
| अगर प्रूफ सही हैं, तो TDS की कटौती कम हो जाती है। | TDS पूरे साल स्थिर रहता है; साल के अंत में कम एडजस्टमेंट की जरूरत होती है। |
भविष्य के सबूत के तौर पर PRN, FVU हैश और चालान CIN को डाउनलोड करके अपने पास रख लें और स्टेटस "Accepted" होने तक इसे ट्रैक करते रहें। Q2 के लिए नॉन-सैलरी TDS सर्टिफिकेट जारी करने की आखिरी तारीख 15 नवंबर है। इसके साथ ही, अभी से Q3 के पेरोल की तैयारी शुरू कर दें—कर्मचारियों से उनके टैक्स रिजीम का चुनाव और फॉर्म 124 डिक्लेरेशन समय पर ले लें। आज ही फाइलिंग पूरी करने से आप 1 नवंबर से लगने वाली लेट फीस से बच जाएंगे और जनवरी की फाइलिंग प्रक्रिया भी आसान हो जाएगी।


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