अक्टूबर महीने के TDS और TCS जमा करने की आखिरी तारीख शनिवार, 7 नवंबर 2026 तय की गई है। सरकार से इतर सभी डिडक्टर्स और कलेक्टर्स को हर हाल में 7 तारीख तक यह भुगतान करना होगा, वरना उन्हें ब्याज देना पड़ेगा। वहीं, मंथली चालान सह स्टेटमेंट वाले मामलों—जैसे 26QB, 26QC और 26QD—के लिए 30 दिनों की समय-सीमा तय है। अगर भुगतान में देरी होती है, तो TDS पर 1.5% प्रति महीना और TCS पर 1% प्रति महीने की दर से ब्याज लगेगा। ध्यान रखें, महीने के किसी भी हिस्से (पार्ट मंथ) को पूरा महीना माना जाएगा।
इसे एक उदाहरण से समझते हैं: मान लीजिए 31 अक्टूबर को पेरोल TDS के रूप में ₹1,00,000 काटे गए और इसे 9 नवंबर को जमा किया गया। देर से भुगतान पर ब्याज की गिनती कटौती की तारीख से लेकर भुगतान की तारीख तक की जाती है। चूंकि महीने के किसी भी हिस्से को पूरा महीना गिना जाता है, इसलिए यहां अक्टूबर और नवंबर दोनों महीने शामिल होंगे। इस तरह, भले ही देरी सिर्फ नौ दिनों की हो, लेकिन 1.5% प्रति महीने के हिसाब से आपको ₹3,000 का ब्याज देना पड़ जाएगा।

e‑Pay Tax का तरीका: TAN से लॉगिन और Minor Head 200 बनाम 400
सबसे पहले अपने TAN के जरिए लॉगिन करें, फिर e‑Pay Tax खोलें और New Payment का विकल्प चुनें। इसके बाद TDS/TCS (ITNS 281N) सेलेक्ट करें। अब एसेसमेंट ईयर (Assessment Year) और संबंधित सेक्शन कोड चुनें। रेगुलर चालान जमा करने के लिए Minor Head 200 का चयन करें। Minor Head 400 का इस्तेमाल केवल इनकम टैक्स विभाग की ओर से भेजी गई डिमांड का भुगतान करने के लिए ही करें। जल्दी पेमेंट कन्फर्मेशन पाने के लिए Payment Gateway के जरिए NetBanking या UPI का विकल्प चुनें। पेमेंट सफल होने के बाद Payment History में जाकर रसीद और CSI डाउनलोड कर लें।
UPI/NEFT कट‑ऑफ और वीकेंड टाइमिंग
NEFT और RTGS की सुविधा वीकेंड सहित 24x7 उपलब्ध रहती है, लेकिन NEFT का सेटलमेंट हर आधे घंटे के बैच में होता है। ऐसे में जब वक्त कम हो, तो Payment Gateway मोड—खासकर UPI और NetBanking—का इस्तेमाल करें, क्योंकि इससे पोर्टल पर तुरंत अपडेट हो जाता है। NEFT या RTGS में CRN और बैंक के जरिए प्रोसेस होने की वजह से रिकॉन्सिलेशन (मिलान) में देरी हो सकती है। ब्याज से बचने के लिए शनिवार को आखिरी पलों में भुगतान करने से बचें।
ओल्ड बनाम न्यू रिजीम: सैलरी की त्वरित जांच
पेरोल की दोबारा जांच करते समय कुछ प्रमुख अंतरों का ध्यान रखें। ओल्ड टैक्स रिजीम में ₹50,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है, जबकि नई डिफॉल्ट रिजीम में यह ₹75,000 है। वहीं, तय आय सीमा के तहत सेक्शन 87A के तहत मिलने वाली छूट (Rebate) ओल्ड रिजीम में ₹12,500 और न्यू रिजीम में ₹60,000 है। चालान जमा करने से पहले अक्टूबर महीने के सैलरी TDS का सही मिलान करने के लिए इन नियमों को जरूर देख लें।
| फीचर | ओल्ड रिजीम | न्यू रिजीम (डिफॉल्ट) |
|---|---|---|
| स्टैंडर्ड डिडक्शन (सैलरीड) | ₹50,000 | ₹75,000 |
| सेक्शन 87A के तहत छूट (Rebate) | ₹12,500 तक | ₹60,000 तक |
भुगतान करने के बाद CSI फाइल डाउनलोड करें और फिर BSR कोड, तारीख और सीरियल नंबर का मिलान करते हुए तिमाही स्टेटमेंट फॉर्म 26Q और 27EQ के साथ चालान का रिकॉन्सिलेशन करें। बैंकिंग से जुड़ी किसी भी समस्या से बचने के लिए शुक्रवार रात तक ही UPI या NetBanking के जरिए प्रक्रिया पूरी कर लें। इसके अलावा, प्रासंगिक सेक्शन जैसे 194C, 194H, 194I, 194J, 194Q और 206C(1H) की जानकारी पास रखें।


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