Tax Saving Scheme: इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C के तहत टैक्सपेयर्स को टैक्स छूट मिलती है. इसमें एक फाइनेंशियल ईयर में 1.5 लाख रुपए तक की बचत के लिए कई इनवेस्टमेंट ऑफ्शन मिलते हैं. इन स्कीम में निवेश करके निवेशक न केवल टैक्स छूट का फायदा उठाते हैं, बल्कि निवेश कर फ्यूचर के लिए बेहतर फंड तैयार कर सकते हैं, तो चलिए टैक्स सेविंग 5 सबसे बेहतरीन निवेश स्कीम के बारे में जानते हैं...
पब्लिक प्रॉविडेंड फंड (PPF)
निवेशक अपने जीवनसाथी या बच्चों के नाम पर खोले गए PPF खाते में निवेश कर टैक्स बचा सकते हैं. हालांकि, माता-पिता या भाई-बहनों के नाम पर खोले गए अकाउंट में किए गए निवेश पर टैक्स छूट नहीं मिलती. PPF अकाउंट में निवेश की रकम 15 साल में मैच्योर होती है, जिसमें निवेश, मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी पर फंड निकासी पर टैक्स छूट मिलती है.
इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (ELSS)
ELSS यूनिट्स में 3 साल की लॉक-इन अवधि होती है. इसका मतलब है कि इस समय सीमा के भीतर निवेश की गई राशि वापस नहीं ली जा सकती. नतीजतन, यूनिट्स को बेचने से होने वाले मुनाफे पर टैक्स नहीं लगता. इसके अलावा निवेशकों को मिलने वाला डिविडेंड भी टैक्स-फ्री होता है. सेक्शन 80C के तहत 1.5 लाख रुपए तक की कटौती का क्लेम किया जा सकता है. इसमें निवेश एकमुश्त या सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए भी किया जा सकता है.
यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (ULIP)
ULIP जीवन बीमा को निवेश के अवसरों के साथ जोड़ता है. पेमेंट किए गए प्रीमियम का एक हिस्सा जीवन बीमा कवरेज के लिए जाता है, जबकि बाकी रकम रिटर्न के लिए फंड में निवेश की जाती है. पूरी प्रीमियम रकम एक्ट 80C के तहत टैक्स छूट के लिए योग्य है.

5 साल की बैंक FD
बैंक में 5 साल की फिक्स्ड डिपॉजिट्स यानी FD को अक्सर टैक्स सेविंग स्कीम के रूप में देखा ताजा है. क्योंकि इसे 5 साल से पहले भुनाया नहीं जा सकता है. जबकि मूल राशि सेक्शन 80C के तहत टैक्स छूट के लिए योग्य है. साथ ही FD पर प्राप्त ब्याज भी योग्य है.
राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (NSC)
NSC टैक्स सेविंग के लिए काफी पॉप्युलर ऑप्शन के तौर पर देखा जाता है. इसकी मैच्योरिटी अवधि 5 साल है. NSC में निवेश सेक्शन 80C के तहत टैक्स छूट के लिए योग्य है. हालांकि, NSC पर मिलने वाला ब्याज योग्य है. दिलचस्प बात यह है कि शुरुआती सालों के दौरान मिलने वाले ब्याज को NSC में फिर से निवेशित माना जाता है, जिससे यह सेक्शन 80C के तहत आगे की टैक्स छूट के लिए पात्र हो जाता है.
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