नयी दिल्ली। किसी बचत बैंक खाते पर मिले उस ब्याज पर टैक्स लगता है जो छूट की सीमा से अधिक हो। इस पर आपकी टैक्स स्लैब से हिसाब से ही टैक्स लगता है। इस ब्याज राशि को 'अन्य स्रोतों से आय' के रूप में शामिल किया जाता है। अहम बात यह है कि यदि आप इस ब्याज की जानकारी अपनी आईटीआर में न दें तो आपको आयकर विभाग नोटिस भेज सकता है। इसके नतीजे में आपको जुर्माने का सामना करना पड़ेगा। इसलिए आपके लिए यह जानना जरूरी है कि कितनी ब्याज राशि साल में टैक्स फ्री रहती है।
10000 रु तक ब्याज रहेगा टैक्स फ्री
आयकर अधिनियम की धारा 80टीटीए के तहत बचत बैंक खाते पर प्रति वर्ष 10,000 रुपये तक का ब्याज टैक्स फ्री रहता है। ध्यान रहे कि इसमें आपके सभी बैंक बचत खातों पर मिले ब्याज को शामिल किया जाएगा। यदि सभी बैंक खातों का ब्याज 10000 रु से अधिक है तो उस पर टैक्स लगेगा। धारा 80टीटीए के तहत 60 वर्ष से कम आयु के लोगों को 10000 रु तक पर ब्याज में कटौती का दावा करने की सुविधा मिलती है। 60 साल या इससे अधिक आयु वर्ग के लोग 80 टीटीबी के तहत 50,000 रुपये तक की ब्याज आय या एक्चुअल ब्याज आय, जो भी कम हो, तक के लिए टैक्स कटौती का दावा कर सकते हैं।
इन बातों का जानना है जरूरी
बचत खाते के ब्याज को "अन्य स्रोतों से आय" के तहत इनकम में शामिल किया जाता है। छूट से अधिक ब्याज आय का खुलासा आपको टैक्स रिटर्न पर करना होगा, जिस पर रेलेवेंट स्लैब रेट के तहत टैक्स लगेगा। आयकर अधिनियम की धारा 19 ए के अनुसार बचत खाते पर टीडीएस नहीं होता। जैसा कि हमने पहले बताया कि 10000 रु तक का ब्याज टैक्स फ्री रहेगा।
आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80 टीटीए
कोई व्यक्ति या हिंदू यूनाइडेट फैमिली (एचयूएफ) ही ब्याज पर टैक्स कटौती का लाभ उठा सकते हैं। जबकि कंपनियां और फर्म ये लाभ नहीं सकतीं। डाक घर, बैंकों या सहकारी बैंकों में मौजूद सभी बचत खातों पर प्राप्त कुल 10,000 रुपये का ब्याज ही टैक्स फ्री रहेगा। इससे ऊपर के ब्याज पर टैक्स आपकी स्लैब के अनुसार टैक्स लगेगा।
धारा 80 टीटीबी
60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक बचत खातों और एफडी पर इस धारा के तहत प्रति वर्ष 50,000 रुपये तक ब्याज के लिए कटौती के पात्र हैं। एफडी पर ब्याज भी इस धारा के तहत बराबर कटौती के लिए पात्र है।
इस तरह नहीं मिलेगी छूट
टाइम डिपॉजिट, एफडी, आरडी या किसी अन्य निवेश पर प्राप्त ब्याज पर धारा 80 टीटीए के तहत छूट नहीं मिलेगी। बैंक बचत खातों से मिले ब्याज पर टीडीएस नहीं कटता। वरिष्ठ नागरिकों को धारा 80टीटीए के तहत शामिल नहीं किया गया है। दूसरी ओर धारा 80टीटीबी वरिष्ठ नागरिकों को बैंकों, डाक घर या सहकारी बैंकों से मिले 50,000 रुपये तक की ब्याज राशि पर टैक्स छूट लेने का पात्र बनाती है। 31 मार्च को वित्त वर्ष 2020-21 खत्म हो रहा है। इसलिए आप अगर टैक्स में छूट लेना चाहते हैं तो टैक्स फ्री में 31 मार्च से पहले निवेश करें।
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