22 सितंबर 2026 तक की स्थिति के मुताबिक, टैक्स ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने की आखिरी तारीख 30 सितंबर ही है। डेडलाइन बढ़ाने को लेकर कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया है, इसलिए 30 सितंबर को ही अंतिम तारीख मानकर चलें। आयकर विभाग के FAQ में भी वित्त वर्ष 2025-26 के ऑडिट के लिए 30 सितंबर की ही डेडलाइन दी गई है। पेनाल्टी, ब्याज और आखिरी समय की जल्दबाजी में होने वाली गलतियों से बचने के लिए अभी से काम निपटाना शुरू कर दें।
आइए समझें कि धारा 44AB के तहत किन्हें ऑडिट कराना जरूरी है। जिन बिजनेस का टर्नओवर 1 करोड़ रुपये से अधिक है, उन्हें टैक्स ऑडिट कराना होता है। हालांकि, अगर कुल नकद लेन-देन (प्राप्तियां और भुगतान) 5 फीसदी के भीतर है, तो यह टर्नओवर सीमा 10 करोड़ रुपये लागू होती है। प्रोफेशन्स के मामले में 50 लाख रुपये से अधिक की ग्रॉस रिसीप्ट्स होने पर ऑडिट जरूरी है। इसके लिए फॉर्म 3CD के ब्यौरे के साथ फॉर्म 3CA या 3CB अटैच करके फाइल करना होता है।

टैक्स ऑडिट रिपोर्ट: पोर्टल फाइलिंग प्रोसेस, UDIN और e‑Verify
इनकम टैक्स पोर्टल पर फाइलिंग के लिए e‑File मेन्यू में जाकर File Income Tax Forms चुनें और असेसमेंट ईयर (AY) 2026‑27 सेलेक्ट करें। इसके बाद अपनी जरूरत के अनुसार 3CA‑3CD या 3CB‑3CD चुनें, फॉर्म 3CD पूरा भरें और जरूरी वर्किंग्स अटैच करें। फॉर्म साइन करने वाले दिन ही यूनिक डॉक्यूमेंट आइडेंटिफिकेशन नंबर (UDIN) जनरेट करें, जिसे पोर्टल द्वारा वैलिडेट किया जाता है। ध्यान रखें कि 15 दिनों के भीतर वैलिडेट न होने पर फॉर्म अमान्य (invalid) हो जाता है। फाइलिंग के बाद DSC, आधार OTP, बैंक/डिमैट EVC या नेट बैंकिंग के जरिए e‑Verify करें। अगर पोर्टल धीमा चल रहा हो, तो स्टैचूटरी फॉर्म्स यूटिलिटी का इस्तेमाल कर ऑफलाइन JSON फाइल तैयार करें और अपलोड करें।
AIS और Form 26AS का मिलान क्यों है जरूरी? जान लें लेट फीस व पेनाल्टी के नियम
सब्सक्रिप्शन के तहत सबसे पहले AIS और Form 26AS डाउनलोड करें, फिर अपने बुक्स ऑफ अकाउंट्स से TDS‑TCS, ब्याज और GST टर्नओवर का मिलान (reconciliation) करें। असेसमेंट ईयर 2023‑24 से Form 26AS में केवल TDS‑TCS दिखता है, जबकि AIS में अन्य वित्तीय लेन-देन दर्ज होते हैं और इस पर फीडबैक भी दिया जा सकता है। डेटा में कोई अंतर दिखने पर टैक्स Deductors से रिवाइज्ड TDS रिटर्न भरने और चालान सुधारने को कहें। ऑडिट वाले मामलों के लिए ITR दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर 2026 है। नियम न मानने पर लगने वाले प्रमुख जुर्माने और ब्याज का ब्योरा नीचे दिया गया है:
| धारा (Section) | वजह (Trigger) | पेनाल्टी/ब्याज राशि |
|---|---|---|
| 271B | 30 सितंबर तक ऑडिट न कराना या रिपोर्ट जमा न करना | टर्नओवर/प्राप्तियों का 0.5%, अधिकतम ₹1,50,000 |
| 234F | 31 अक्टूबर 2026 के बाद ITR दाखिल करना (ऑडिट केस) | ₹5,000; कुल आय ₹5 लाख तक होने पर ₹1,000 |
| 234A | बकाया टैक्स के साथ देरी से ITR भरना | फाइलिंग तक बकाया टैक्स पर 1% प्रति माह |
| 234B | असेस किए गए टैक्स के 90% से कम एडवांस टैक्स चुकाना | असेसमेंट ईयर की 1 अप्रैल से 1% प्रति माह |
ओल्ड बनाम न्यू टैक्स रिजीम: एक नजर में तुलना
| मद (Item) | न्यू टैक्स रिजीम | ओल्ड टैक्स रिजीम |
|---|---|---|
| ग्रॉस सैलरी | ₹12,00,000 | ₹12,00,000 |
| मिलने वाली छूट (Deductions) | स्टैंडर्ड डिडक्शन ₹50,000 | स्टैंडर्ड डिडक्शन ₹50,000 + 80C ₹1,50,000 |
| सेस से पहले अनुमानित टैक्स | शून्य (बजट 2025‑26 की मुख्य बात) | लगभग ₹1,12,500 |
अगर पोर्टल पर तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं, तो अपने पास पूरे सबूत रखें—जैसे UDIN लॉग्स, JSON टाइमस्टैम्प, एरर के स्क्रीनशॉट और ग्रीवांस टिकट ID। पोर्टल के Submit Grievance ऑप्शन का इस्तेमाल करें और उसकी रसीद संभालकर रखें। सहूलियत के लिए एक प्रैक्टिकल प्लान अपनाएं: 26 सितंबर तक UDIN और ड्राफ्ट पूरे कर लें, 27 को रिकॉन्सिलिएशन करें, 28-29 सितंबर तक फाइलिंग अपलोड कर दें और 30 सितंबर का दिन केवल इमरजेंसी केस के लिए रखें। ऊपर दी गई तालिका के अनुसार, ₹12 लाख की आय पर न्यू रिजीम में टैक्स शून्य बनता है।


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