टैक्स ऑडिट रिपोर्ट जमा करने की आखिरी तारीख 21 अक्टूबर है, यानी अब आपके पास सिर्फ 72 घंटे का समय बचा है। जिन टैक्सपेयर्स के लिए ऑडिट जरूरी है, उन्हें हर हाल में 21 नवंबर तक अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करना होगा। इसलिए बिना देर किए ऑडिट की ई-फाइलिंग पूरी करें, इसे रिटर्न से लिंक करें और सभी बुनियादी चीजों को अभी दुरुस्त कर लें। छोटी सी चूक भी पोर्टल पर एरर दे सकती है और बाद में पेनल्टी-ब्याज का कारण बन सकती है। आखिरी समय की भारी भीड़ और सर्वर की दिक्कतों से बचने के लिए रात 9 बजे (IST) से पहले ही सबमिट करने का टारगेट रखें।
फाइलिंग से पहले अपने सभी जरूरी डॉक्यूमेंट्स की लिस्ट तैयार रखें: फाइनेंशियल स्टेटमेंट, लेजर, AIS और फॉर्म 26AS, TDS सर्टिफिकेट्स, GST रिकंसिलेशन, लोन शेड्यूल, फिक्स्ड-असेट रजिस्टर और बैंक प्रूफ। अपने बैंक अकाउंट्स को पहले से प्री-वैलिडेट कर लें और रिफंड पाने वाले अकाउंट को चुन लें। अपने ब्राउज़र और DSC (डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट) ड्राइवर्स को अपडेट करना न भूलें। ज्यादा ट्रैफिक वाले पीक आवर्स से बचें, बार-बार कैप्चा रिफ्रेश न करें और फाइलिंग की रसीद स्थानीय रूप से सेव करें। इसके साथ ही इंटरनेट और बिजली के बैकअप की भी व्यवस्था रखें।

टैक्स ऑडिट रिपोर्ट: किसे करवाना होता है टैक्स ऑडिट?
सबसे पहले यह पक्का कर लें कि इस साल आप पर टैक्स ऑडिट लागू होता है या नहीं। भारी टर्नओवर या ज्यादा कैश लेन-देन वाले बिजनेस के लिए आमतौर पर ऑडिट जरूरी होता है। इसके अलावा बड़ी कमाई वाले प्रोफेशनल्स, कंपनियों और लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (LLP) को भी यह प्रोसेस पूरा करना पड़ता है। जिन्होंने प्रिजम्पटिव टैक्स व्यवस्था से बाहर निकलने का विकल्प चुना है, उन पर भी ऑडिट लागू हो सकता है। ध्यान रखें कि आपका GST, बही-खाते और बैंक लेन-देन आपस में पूरी तरह मैच करते हों। आंकड़ों में सही तालमेल रहने से इनकम टैक्स विभाग के नोटिस का खतरा कम होता है और ई-फाइलिंग आसानी से पास हो जाती है।
ITR ई-फाइलिंग स्टेप्स: DSC, UDIN और ऑडिट रिपोर्ट कैसे करें लिंक
इनकम टैक्स पोर्टल पर जाएं, अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) को असाइन करें और उन्हें एक्सेस दें। इसके बाद आपके CA फॉर्म 3CD के साथ फॉर्म 3CA या 3CB अपलोड करेंगे। इस दौरान CA के लिए वैलिड यूनिक डॉक्यूमेंट आइडेंटिफिकेशन नंबर (UDIN) दर्ज करना जरूरी है। रिपोर्ट अपलोड होने के बाद आपको इसे पोर्टल पर अप्रूव करना होगा। इसके बाद अपना रिटर्न तैयार करें, उसमें ऑडिट की जानकारी इंपोर्ट करें, वैलिडेशन चेक करें और ई-वेरिफाई करें। जहां जरूरी हो, वहां वैलिड डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) का ही इस्तेमाल करें। अक्सर फाइलिंग के दौरान PAN मिसमैच, गलत असेसमेंट ईयर या एक्सपायर DSC ड्राइवर्स जैसी गलतियां सामने आती हैं। इन्हें प्रोफाइल अपडेट करके, DSC फिर से इंस्टॉल करके और सही साल चुनकर आसानी से ठीक किया जा सकता है।
ओल्ड बनाम न्यू टैक्स रिजीम: ITR फाइल करने से पहले देखें अंतर
सही टैक्स रिजीम चुनने का सीधा असर आपकी जेब और टैक्स सेविंग पर पड़ता है। अगर आप ज्यादा डिडक्शन (छूट) का दावा कर रहे हैं, तो पुरानी व्यवस्था (Old Regime) आपके लिए बेहतर रहती है। वहीं कम डिडक्शन का दावा करने वाले टैक्सपेयर्स को नई व्यवस्था (New Regime) की आसान टैक्स दरों से फायदा मिलता है। फाइलिंग के समय नीचे दी गई टेबल से मदद ले सकते हैं। फाइनल ई-वेरिफिकेशन से पहले अपने रिटर्न में रिजीम के चुनाव को अच्छे से चेक कर लें, क्योंकि एक बार चुनने के बाद इसे बाद में बदलने पर बंदिशें हो सकती हैं।
| फीचर | पुरानी व्यवस्था (Old Regime) | नई व्यवस्था (New Regime) |
|---|---|---|
| 80C/80D डिडक्शन | उपलब्ध है | उपलब्ध नहीं है |
| HRA और LTA छूट | उपलब्ध है | उपलब्ध नहीं है |
| स्टैंडर्ड डिडक्शन | उपलब्ध है | उपलब्ध है |
| एंप्लॉयर का NPS योगदान | उपलब्ध है | उपलब्ध है |
| फाइलिंग में कागजी काम | ज्यादा | कम (आसान) |
| किनके लिए बेहतर है | ज्यादा डिडक्शन लेने वाले टैक्सपेयर्स | कम या बिना डिडक्शन वाले टैक्सपेयर्स |
सैलरी का उदाहरण, लेट फीस और ब्याज से कैसे बचें
इसे एक उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए आपकी सालाना सैलरी 12,00,000 रुपये है। 50,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलने के बाद आपकी टैक्सेबल सैलरी 11,50,000 रुपये रह जाती है। ओल्ड रिजीम के तहत, अगर आप सेक्शन 80C, 80D और HRA मिलाकर 3,00,000 रुपये की छूट का दावा करते हैं, तो आपकी टैक्सेबल इनकम घटकर 8,50,000 रुपये हो जाएगी। दूसरी ओर, न्यू रिजीम में आमतौर पर केवल स्टैंडर्ड डिडक्शन ही मिलता है, जिससे टैक्सेबल इनकम 11,50,000 रुपये ही रहेगी। 21 अक्टूबर की डेडलाइन चूक जाने से आपका ITR लिंक होने में देरी होगी। वहीं 21 नवंबर की तारीख मिस करने पर आपको हर महीने ब्याज और लेट फीस भरनी पड़ सकती है।


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