असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए टैक्स ऑडिट रिपोर्ट ई-फाइल करने की आखिरी तारीख 30 सितंबर है। क्या यह डेडलाइन बढ़ेगी? 28 सितंबर को शाम 4:00 बजे (IST) तक सीबीडीटी या पीआईबी के पोर्टल पर डेडलाइन बढ़ाने को लेकर कोई आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है। सोशल मीडिया पर फर्जी लेटर और वायरल मैसेज से बचें और सिर्फ आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें।
धारा 44AB के तहत वे बिजनेस आते हैं जिनका टर्नओवर ₹1 करोड़ से ज्यादा है। हालांकि, अगर नकद लेनदेन (प्राप्ति और भुगतान दोनों) 5 प्रतिशत से अधिक नहीं है, तो यह सीमा ₹10 करोड़ तक हो सकती है। वहीं, ₹50 लाख से अधिक की कमाई वाले प्रोफेशनल्स के लिए भी टैक्स ऑडिट कराना अनिवार्य है। ऑडिट रिपोर्ट जमा करने की डेडलाइन 30 सितंबर है। ऑडिट मामलों में आईटीआर दाखिल करने की आखिरी तारीख 31 अक्टूबर और ट्रांसफर प्राइसिंग मामलों में 30 नवंबर तय की गई है।

टैक्स ऑडिट डेडलाइन एक्सटेंशन और ई-फाइलिंग से जुड़ी अहम बातें
ई-फाइलिंग से पहले यह चेकलिस्ट जरूर देख लें: सही फॉर्म (3CD के साथ 3CA/3CB) चुनें, यूनिक डॉक्यूमेंट आइडेंटिफिकेशन नंबर (UDIN) जेनरेट करें, अपने वैध रजिस्टर्ड डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) से साइन करें और ऑफलाइन यूटिलिटी से लेटेस्ट JSON फाइल ही अपलोड करें। इसके अलावा, फॉर्म 26AS, एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी (TIS) का अपने अकाउंट बुक्स और जीएसटी डेटा से मिलान जरूर कर लें। अगर पोर्टल में कोई दिक्कत आ रही है, तो तुरंत ग्रीवेंस दर्ज कराएं या हेल्पडेस्क पर ईमेल करें।
पेनल्टी और राहत के नियम: जानिए धारा 271B और 234F के बारे में
तय समय पर ऑडिट रिपोर्ट दाखिल न करने पर धारा 271B के तहत पेनल्टी लग सकती है। यह पेनल्टी कुल टर्नओवर या ग्रॉस रिसिप्ट का 0.5 प्रतिशत हो सकती है, जिसकी अधिकतम सीमा ₹1,50,000 तय की गई है। हालांकि, धारा 273B के तहत 'उचित कारण' बताने पर पेनल्टी से राहत मिल सकती है। देर से आईटीआर दाखिल करने पर धारा 234F के तहत लेट फीस देनी होगी—अगर सालाना कमाई ₹5 लाख तक है तो ₹1,000 और इससे अधिक होने पर ₹5,000 शुल्क लगेगा। बीलेटेड रिटर्न (Belated Return) 31 दिसंबर 2026 तक फाइल किया जा सकता है।
| प्रावधान (Provision) | नियम (Trigger) | पेनल्टी/फीस (Amount) |
|---|---|---|
| धारा 271B | तय तारीख तक ऑडिट रिपोर्ट न जमा करना | टर्नओवर/रिसिप्ट का 0.5%; अधिकतम ₹1,50,000 |
| धारा 234F | डेडलाइन के बाद आईटीआर फाइल करना | ₹1,000 (आय ≤ ₹5 लाख होने पर); अन्यथा ₹5,000 |
ओल्ड वर्सेस न्यू टैक्स रिजीम: एक आसान उदाहरण और तुलना
इसे एक उदाहरण से समझें—अगर किसी सैलरीड टैक्सपेयर की सालाना कमाई न्यू टैक्स रिजीम में ₹12.75 लाख है, तो उन्हें ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है। इससे टैक्सेबल इनकम ₹12 लाख रह जाती है और टैक्स ₹60,000 बनता है। हालांकि, धारा 87A के तहत ₹60,000 की पूरी रिबेट मिलने के कारण टैक्स शून्य (Zero Tax) हो जाता है। वहीं दूसरी ओर, ओल्ड टैक्स रिजीम में अगर टैक्सेबल इनकम ₹12.25 लाख के आसपास है, तो सेस (Cess) मिलाकर लगभग ₹1.87 लाख का टैक्स बनता है।
| पहलू (Aspect) | न्यू टैक्स रिजीम (New regime) | ओल्ड टैक्स रिजीम (Old regime) |
|---|---|---|
| डिफ़ॉल्ट सेटिंग्स | हां (धारा 115BAC) | विकल्प चुनना होता है (Opt‑in) |
| स्टैंडर्ड डिडक्शन (सैलरी) | ₹75,000 | ₹50,000 |
| रिबेट की सीमा | ₹12,00,000 तक (₹60,000 रिबेट) | ₹5,00,000 तक (₹12,500 रिबेट) |
अगर आगे सरकार की ओर से डेडलाइन बढ़ाने का कोई आधिकारिक फैसला आता है, तो नई तारीखों के अनुसार समय बदल जाएगा। लेकिन तब तक, अपना काम 30 सितंबर से पहले पूरा कर लें। किसी भी अपडेट या सर्कुलर की पुष्टि के लिए सिर्फ इनकम टैक्स और पीआईबी की वेबसाइट या विभाग के आधिकारिक X (ट्विटर) हैंडल पर भरोसा करें। अगर फाइलिंग के दौरान कोई समस्या आती है, तो अपने टिकट नंबर और स्क्रीनशॉट के साथ ई-फाइलिंग हेल्पडेस्क से संपर्क करें।


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