21 अक्टूबर 2026 की टैक्स ऑडिट रिपोर्ट फाइल करने की डेडलाइन में अब सिर्फ दो हफ्ते बाकी रह गए हैं। इस बीच CBDT ने असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए ऑडिटेड ITR दाखिल करने की आखिरी तारीख बढ़ाकर 21 नवंबर कर दी है। यह राहत उन टैक्सपेयर्स के लिए है जिनके अकाउंट्स का सेक्शन 139(1) के तहत ऑडिट होना अनिवार्य है। तो देरी न करें, पोर्टल पर ट्रैफिक बढ़ने से पहले ही Form 3CD तैयार कर लें, UDIN वैलिडेट करें और अपने JSON व DSC को समय रहते दुरुस्त कर लें।
उन बिंदुओं पर खास ध्यान दें जहां से टैक्स नोटिस आने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। 5 फीसदी कैश की शर्त जांचने के बाद ही सेक्शन 44AD और 44ADA की लिमिट लागू करें। अगर TDS काटने या जमा करने में चूक हुई है, तो सेक्शन 40(a)(ia) के तहत 30 फीसदी डिसाइलेंस लागू होगा। इसी तरह सेक्शन 43B(h) के तहत MSME बकाए को एमएसएमई एक्ट के सेक्शन 15 की समय-सीमा के हिसाब से चेक करें। 2 लाख रुपये से ज्यादा के कैश लेनदेन पर सेक्शन 269ST के नियमों पर नजर रखें और लेजर का मिलान सही से करें।

टैक्स ऑडिट की डेडलाइन और Form 3CD से जुड़ी ध्यान रखने योग्य बातें
ऑडिट के दौरान क्लॉज-वाइज सबूतों की फाइल तैयार रखें। GSTR-3B, GSTR-2B, बुक्स ऑफ अकाउंट्स और TDS लेजर का आपस में सही मिलान कर लें। MSME वेंडर्स के लिए उद्यम रजिस्ट्रेशन, एग्रीमेंट की तारीख और पेमेंट रिकॉर्ड्स के साथ एक लिस्ट बनाएं। इसके अलावा PF, GST, बैंक और NBFC के ब्याज जैसी सेक्शन 43B वाली मदों को सही तरीके से टैग करें। टर्नओवर टेस्ट, प्रिजम्पटिव टैक्स के विकल्प और डेप्रिसिएशन की कैलकुलेशन को री-चेक करें। कैश, लोन और रिलेटेड पार्टी्स से जुड़े मामलों में मैनेजमेंट रिप्रेजेंटेशन भी साथ रखें।
UDIN वैलिडेशन और इनकम टैक्स पोर्टल पर JSON एरर से कैसे निपटें
ICAI पोर्टल से UDIN जनरेट करने के बाद इसे ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाकर 'Income Tax Forms' टैब में 'View/Update UDIN Details' के जरिए अपडेट या अटैच करें। अगर UDIN इनवैलिड हो जाए, तो दोबारा कोशिश करें या बल्क-अपडेट करके फिर से वेरीफाई करें। अगर JSON फाइल अपलोड करने में दिक्कत आ रही है, तो लेटेस्ट यूटिलिटी डाउनलोड करें, ताकि स्कीमा मिसमैच की गड़बड़ी न हो। साथ ही PAN, एसेसमेंट ईयर (AY), फॉर्म कोड और CA नंबर का मिलान जरूर कर लें। DSC को दोबारा रजिस्टर करें और emSigner को रिफ्रेश करें। पुरानी और नई टैक्स व्यवस्था के तहत सैलरी का गणित समझने के लिए नीचे दी गई टेबल देखें।
| उदाहरण (सेस जोड़ने से पहले) | पुरानी टैक्स व्यवस्था | नई टैक्स व्यवस्था |
|---|---|---|
| ग्रॉस सैलरी (₹) | 12,00,000 | 12,00,000 |
| डिडक्शन/छूट | स्टैंडर्ड 50,000 + 80C 1,50,000 + 80D 25,000 | स्टैंडर्ड 50,000 |
| टैक्सेबल इनकम (₹) | 9,75,000 | 11,50,000 |
| अनुमानित टैक्स (₹) | 1,07,500 | 82,500 |
पेनाल्टी के नियम और टैक्स ऑडिट डेडलाइन से जुड़े सवाल-जवाब
समय पर ऑडिट न कराने पर सेक्शन 271B के तहत टर्नओवर का 0.5% (अधिकतम ₹1,50,000) जुर्माना लग सकता है। वहीं, देरी से ITR दाखिल करने पर सेक्शन 234F के तहत ₹5,000 तक की लेट फीस और सेक्शन 234A, 234B या 234C के तहत ब्याज देना पड़ सकता है। हालांकि, वाजिब वजह होने पर सेक्शन 119(2)(b) के तहत राहत (Condonation) की मांग की जा सकती है। ध्यान रखें, तारीख बढ़ाने की राहत सिर्फ उन्हीं टैक्सपेयर्स को मिली है जिनके लिए ऑडिट अनिवार्य है। ऐसे में क्लाइंट्स से तुरंत बैंक स्टेटमेंट, GST रिटर्न रिकॉर्ड्स, TDS सर्टिफिकेट और उद्यम रजिस्ट्रेशन डिटेल्स जैसी जरूरी चीजें जुटा लें।


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