दिवाली से ठीक पहले भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त रिकवरी देखने को मिली है। शुक्रवार, 6 नवंबर को सेंसेक्स 81,028 और निफ्टी 25,030 के स्तर पर बंद हुआ। इस हफ्ते सेंसेक्स में 8.8% और निफ्टी में 8.6% की बढ़त दर्ज की गई, जो फरवरी 2021 के बाद से सबसे शानदार साप्ताहिक तेजी है। बाजार में आए इस उछाल से लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 30 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा बढ़ गया। अब रविवार, 8 नवंबर को होने वाली मुहूर्त ट्रेडिंग से पहले SIP निवेशकों के लिए बड़ा फैसला लेने का समय है, जहां मौके के साथ-साथ जोखिम भी कम नहीं हैं।
बाजार की इस तेजी की अगुवाई रेट-सेंसिटिव यानी ब्याज दरों से प्रभावित होने वाले सेक्टर्स ने की। पिछले सात कारोबारी सत्रों में सबसे ज्यादा बढ़त रियल्टी शेयरों में देखी गई, जिसके बाद फाइनेंशियल सर्विसेज और प्राइवेट बैंकों का नंबर रहा। इसके अलावा एनर्जी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर्स ने भी बाजार की बढ़त को सहारा दिया। हालांकि, शुक्रवार को ज्यादातर सेक्टर्स में हरियाली के बावजूद मीडिया शेयरों पर दबाव रहा, जो बताता है कि निवेशक सिर्फ चुनिंदा शेयरों में ही पैसा लगा रहे हैं। बॉन्ड यील्ड में गिरावट और विदेशी निवेशकों (FIIs) की मजबूत खरीदारी का सीधा फायदा बैंकों को मिला।

SIP इन्वेस्टर्स के लिए काम की सलाह: मुहूर्त ट्रेडिंग में क्या करें?
अपनी SIP बिना रुके जारी रखें और बाजार की इस तेजी में एकमुश्त (Lump-sum) पैसा लगाने की जल्दबाजी (FOMO) से बचें। अगर आपके पास अतिरिक्त नकदी है, तो उसे 4 से 6 हफ्तों की किश्तों में निवेश करें। जब भी पोर्टफोलियो में इक्विटी का हिस्सा आपके तय लक्ष्य से 5% ज्यादा हो जाए, तो रिबैलेंसिंग जरूर करें। अपने पसंदीदा फंड्स पर अलर्ट लगाएं और बाजार के उतार-चढ़ाव को झेलने के लिए कम से कम एक महीने का खर्च अलग रखें। हेडलाइंस देखकर अपनी चालू SIP कभी रद्द न करें, बल्कि इस महीने अपनी SIP स्टेप-अप (Step-up) सेटिंग्स को जरूर रीव्यू कर लें।
8 नवंबर को मुहूर्त ट्रेडिंग और कैपिटल गेन्स टैक्स के नियम
रविवार को मुहूर्त ट्रेडिंग का समय दोपहर 2:20 बजे से 3:30 बजे तक रहेगा, जबकि प्री-ओपन सेशन दोपहर 2:05 बजे शुरू होगा। सभी सौदे T+1 नियम के तहत सेटल होंगे, यानी पे-इन और पे-आउट सोमवार, 9 नवंबर को पूरा होगा। इस खास सेशन में छोटी मात्रा में सिर्फ डिलीवरी आधारित खरीदारी को ही प्राथमिकता दें। त्योहार और छुट्टी के इस समय में कम लिक्विडिटी वाले शेयरों, इंट्राडे लेवरेज और पेचीदा ऑर्डर्स से दूरी बनाए रखना ही समझदारी है।
| एसेट क्लास | लॉन्ग-टर्म होल्डिंग अवधि | STCG टैक्स रेट | LTCG टैक्स रेट और सीमा |
|---|---|---|---|
| लिस्टेड इक्विटी, इक्विटी-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड्स | 12 महीने से ज्यादा | 20% (जहां STT चुकाया गया हो) | ₹1.25 लाख/वर्ष से अधिक के मुनाफे पर 12.5% |
पोर्टफोलियो रिबैलेंस करते समय या मुनाफा बुक करते समय टैक्स के नियमों को नजरअंदाज न करें। लिस्टेड इक्विटी और इक्विटी म्यूचुअल फंड्स पर शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स (STCG) पर अब 20% टैक्स लगता है। वहीं, एक साल में ₹1.25 लाख से अधिक के लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) पर 12.5% टैक्स लागू होता है। टैक्स की ये नई दरें 23 जुलाई 2024 से किए गए सभी ट्रांसफर पर प्रभावी हैं। शेयर खरीदने की लागत का सही हिसाब रखें, टैक्स देनदारी घटाने के लिए 'लॉस हार्वेस्टिंग' का सही इस्तेमाल करें और यह हमेशा याद रखें कि म्यूचुअल फंड और इक्विटी का रिटर्न पूरी तरह बाजार जोखिमों के अधीन होता है।


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