Health Insurance: हॉस्पिटल्स और बीमा कंपनियों के बीच फीस बढ़ाने को लेकर खींचतान तेज हो गई है। इसी कारण कई बड़े शहरों के प्रमुख हॉस्पिटल्स में मरीजों को कैशलेस इलाज की सुविधा नहीं मिल रही है। ताजा मामला स्टार हेल्थ इंश्योरेंस से जुड़ा है, जिसने अचानक कई अस्पतालों को अपने नेटवर्क से बाहर कर दिया।

पहले भी हो चुकी है ऐसी नौबत
यह विवाद नया नहीं है। पिछले महीने एएचपीआई (Association of Healthcare Providers India) ने भी बाजाज अलियांज जनरल इंश्योरेंस के खिलाफ यही कदम उठाया था। 1 सितंबर 2025 से कैशलेस सुविधा रोक दी गई थी, क्योंकि हॉस्पिटल्स का कहना था कि बढ़ते मेडिकल खर्च के मुकाबले फीस पुराने रेट पर ही चल रही थी। हालांकि 29 अगस्त 2025 को हुई मीटिंग में समझौता हुआ और रोक हटा ली गई।
आगे क्या है प्लान?
ET की रिपोर्ट्स के मुताबिक, हॉस्पिटल्स और इंश्योरेंस कंपनियां अब फीस रिवीजन पर काम कर रही हैं। यह प्रक्रिया 31 अक्टूबर 2025 तक पूरी करनी होगी। अगर समझौता नहीं हुआ, तो स्टार हेल्थ के लिए कैशलेस सुविधा दोबारा बंद हो सकती है।
किन हॉस्पिटल्स पर पड़ा असर?
15 सितंबर 2025 को जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, स्टार हेल्थ ने दिल्ली और गुरुग्राम के मणिपाल हॉस्पिटल्स, मैक्स हॉस्पिटल्स समेत कई बड़े हॉस्पिटल्स में कैशलेस सुविधा रोक दी। इसका असर सीधे मरीजों पर पड़ा, जिन्हें अचानक जेब से पैसे खर्च करने पड़े।
मरीजों को क्या करना चाहिए?
इलाज से पहले इंश्योरेंस कंपनी की वेबसाइट पर नेटवर्क हॉस्पिटल्स की लिस्ट जरूर देखें।
प्लान्ड ट्रीटमेंट के लिए 48 घंटे पहले कंपनी को सूचना दें।
इमरजेंसी केस में 24 घंटे के भीतर जानकारी देना जरूरी है।
क्लेम के लिए जरूरी डॉक्यूमेंट
अगर कैशलेस इलाज न मिले तो मरीज बिल और बाकी डॉक्यूमेंट्स के साथ क्लेम कर सकते हैं। इसमें ओरिजिनल हॉस्पिटल बिल, डिस्चार्ज समरी, जांच रिपोर्ट और डॉक्टर की प्रिस्क्रिप्शन जरूरी होती है। आईआरडीएआई के नियम के अनुसार, क्लेम 15 दिनों में निपटाया जाना चाहिए।


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