नई दिल्ली, जनवरी 2। जब हम फाइनेंस के बारे में बात करते हैं, तो ज्यादातर लोग शेयर बाजार, सोना, रियल एस्टेट आदि के बारे में सोचते हैं। ये अच्छे ऑप्शन भी हैं। मगर कुछ फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स को कम करके आंका जाता है और दूसरी ओर, कुछ ऐसे होते हैं जिन्हें ओवररेटेड किया जाता है। स्टॉक और गोल्ड दुनिया भर में ज्यादा ओवररेटेड फाइनेंशियल प्रोडक्ट हैं। हालांकि, इनके मुकाबले इमरजेंसी फंड, रिटायरमेंट फंड, म्यूचुअल फंड जैसे प्रोडक्ट्स को हल्का आंका जाता है क्योंकि इन पर हाई रिटर्न नहीं होता। हालांकि, केवल रिटर्न के बारे में सोचना अच्छा विकल्प नहीं हो सकता। ऐसे कुछ प्रोडक्ट्स हैं, जिनमें पैसा लगाना जरूरी है। 2022 में आप इनके लिए प्लानिंग कर सकते हैं।
इमरजेंसी फंड
एक इमरजेंसी फंड को ज्यादा अहमियत नहीं दी जाती, मगर पहले यह सबसे अधिक जरूरी फाइनेंशियल चीजों में से एक था। हमारे माता-पिता अपनी कमाई की एक निश्चित राशि को इमरजेंसी फंड के रूप में अलग रखते थे। इमरजेंसी फंड के महत्वपूर्ण होने के कई कारण हैं। इनमें इमरजेंसी फंड के लिए पैसे को अलग रखना सबसे जरूरी कारणों में से एक है।
मेडिकल इमरजेंसी में आता है काम
जब आप पहले से ही किसी मेडिकल समस्या से जूझ रहे हों, तो एक इमरजेंसी फंड होने से काफी टेंशन दूर हो सकती है। इमरजेंसी में ऐसा हो सकता है कि आपका वेतन कम या शून्य हो जाए। नतीजतन, ऐसी स्थिति में एक इमरजेंसी फंड आपकी मदद कर सकता है। साथ ही, किसी भी वित्तीय संकट के मामले में, इमरजेंसी फंड एक बड़ी मदद हो सकती है।
हेल्थ इंश्योरेंस
भारत में बीमा कराए हुए लोगों की संख्या अभी भी कम है। हालांकि, यह जरूरी है कि अधिक से अधिक लोग सामान्य बीमा खरीदें। एक अच्छी जनरल इंश्योरेंस स्कीम आपकी बीमारी, दुर्घटनाओं, आपदाओं आदि के खर्चों को कम करता है। इसलिए जरूरी है कि आप न केवल अपना बल्कि अपने परिवार के लोगों के लिए भी बीमा स्कीम लें। भारत में, एक आम व्यक्ति चिकित्सा बिलों पर बहुत अधिक खर्च करता है। स्वास्थ्य बीमा होने से इस खर्चे को कम किया जा सकता है।
म्यूचुअल फंड निवेश
यह आपको हैरान कर सकता है। बचत को फाइनेंस में बदलने के लिए म्यूचुअल फंड निवेश पिछले पांच वर्षों में भारत में काफी लोकप्रिय रहा है। मगर ऐसा नहीं है कि हर कोई इसमें पैसा लगा रहा है। इस इंडस्ट्री के आगे काफी ग्रोथ करने की संभावनाएं हैं। म्यूचुअल फंड में एसआईपी के माध्यम से करोड़ों रु का निवेश प्राप्त होता है। हालांकि, भारत में म्यूचुअल फंडों को अब भी कम महत्व दिया जाता है। लेकिन अगले दस वर्षों में इसमें बदलाव हो सकता है।
रिटायरमेंट फंड
एक सर्वे के अनुसार अधिकतर भारतीयों के पास रिटायरमेंट स्कीम नहीं है। भारत में रिटायरमेंट के बाद अधिकांश लोग अपने बच्चों पर निर्भर हैं, जबकि केवल 1/3 और 1/4 के आस पास ही लोग अपनी रिटायरमेंट के लिए योजना बनाते हैं। रिटायरमेंट फंड एक जरूरी फाइनेंशियल प्रोडक्ट है, क्योंकि समय के साथ खर्च बढ़ता है और बच्चों या किसी पर निर्भर रहना उचित नहीं है। जरूरी है कि आप भी दूसरों पर भरोसा किए बिना अपने बाद के वर्षों के लिए वित्तीय स्वतंत्रता प्राप्त करने की कोशिश करें।
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