Sovereign Gold Bonds: बजट में गोल्ड पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाने का प्रस्ताव पेश किया गया, जिसके बाद सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को लेकर तरह-तरह की बातें होने लगीं. हालांकि, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड यानी SGB प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे हैं. यह अपने टैक्स बेनिफिट और कूपन रेट की वजह से रेफरेंस रेट से ऊपर कारोबार कर रहे हैं. एक्सचेंज पर उपलब्ध सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) अपने रेफरेंस प्राइस से ऊपर प्रीमियम प्राइस पर ट्रेड कर रहे हैं.
SGB प्रीमियम पर कर रहा ट्रेड
टॉप 15 लिक्विड SGB सीरीज के क्लोजिंग प्राइस 14 अगस्त 2024 तक उनके रेफरेंस प्राइस से 8% ज्यादा थे. ibjarates.com पर पब्लिश्ड 999 शुद्धता वाले सोने का भाव SGB के लिए रेफरेंस रेट है. 2015 से रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने 67 SGB ट्रांजैक्शन जारी किए हैं. इसके तहत कुल 14.7 करोड़ यूनिट्स इश्यू किए गए हैं. SGB की सभी सीरीज सेकेंड्री मार्केट में लिस्टेड थीं, जोकि BSE और NSE के कैश सेगमेंट में ट्रेड के लिए उपलब्ध भी हैं.

निवेशकSGB सीरीज को डीमैट अकाउंट्स के जरिए ट्रेड कर सकते हैं यानी खरीद या बेच सकते हैं. हालांकि, नए इश्यू नहीं जारी होने की स्थिति में इन बॉन्ड्स की डिमांड बढ़ सकती है. यही वजह है कि रेफरेंस प्राइस के मुकाबले बॉन्ड की कीमत में और बढ़ोतरी होने की उम्मीद है. इसे उदाहरण से समझते हैं....
SGB सीरीज 2023-24 की सबसे ज्यादा ट्रेड की जाने वाली SGB IV सीरीज का 14 अगस्त 2024 को NSE पर क्लोजिंग प्राइस 7,930 रुपए था, जोकि IBJA पर 999 शुद्धता वाले सोने की 7,079 रुपए के रेट से करीब 12% ज्यादा है. एडिशनल कूपन रेट और मैच्योरिटी पर टैक्स में छूट की वजह से SGB सीरीज शुरू से ही रेफरेंस रेट से प्रीमियम पर ट्रेड कर रही है.
क्या हैं सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स?
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड यानीSGB, सरकार समर्थित गोल्ड बॉन्ड हैं. इन्हें भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI जारी करती है. गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) और फिजिकल गोल्ड जैसे अन्य गोल्ड ऐसट्स के मुकाबले ये 2.5% या 2.75% की सालाना कूपन रेट मुहैया करते हैं, जो इसकी एक ऐडेड एडवांटेज है.
कस्टम ड्यूटी घटाने से फोकस में SGB
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2024 में सोने और चांदी पर सीमा शुल्क को घटाने का प्रस्ताव रखा है. इसे 15% से घटाकर 6% किया जाएगा. इसके बाद अब नए SGB जारी करने संभावना कम हो रही. इसी वजह से SGB एक बार फिर से चर्चा में है. इससे सोने और SGB की कीमतों में तेज करेक्शन भी देखने को मिल रहा. दरअसल, निवेशकों को चिंता है कि इससे आने वाले महीनों में मेच्योर होने वाले SGB से मिलने वाला रिटर्न कम हो सकता है.


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