सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) 2020-21 सीरीज I के निवेशकों के लिए आज का दिन अहम है, क्योंकि आज उनके निवेश का पैसा वापस (Redemption) मिलने वाला है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने लंबे समय से निवेश करने वालों के लिए यह अर्ली एग्जिट विंडो खोली है। अगर आपने भी इसमें निवेश किया था, तो अपना बैंक अकाउंट जरूर चेक कर लें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि फंड सुरक्षित पहुंच गया है। 6 साल पहले सोना खरीदने वालों के लिए यह एक बड़ा पड़ाव है।
रिडेम्पशन की कीमत पिछले तीन दिनों के सोने के औसत भाव पर तय की गई है। यह वैल्यू IBJA (इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन) द्वारा जारी 999 शुद्धता वाले सोने के क्लोजिंग प्राइस पर आधारित होती है। निवेशक अपने ट्रांजेक्शन की जानकारी के लिए NSDL या CDSL स्टेटमेंट देख सकते हैं। बैंकिंग कामकाज के दौरान पैसा क्रेडिट होने पर ज्यादातर बैंक ग्राहकों को नोटिफिकेशन भी भेजते हैं।

SGB 2020-21 सीरीज I: जानें कैसे तय होती है रिडेम्पशन की कीमत
RBI फाइनल पेमेंट की गणना के लिए एक खास फॉर्मूले का इस्तेमाल करता है। इसके तहत पिछले तीन वर्किंग डेज के क्लोजिंग प्राइस का औसत निकाला जाता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि निवेशकों को सोने की मौजूदा मार्केट वैल्यू का सही फायदा मिले। अक्सर देखा गया है कि सेकेंडरी मार्केट (एक्सचेंज) पर बॉन्ड बेचने के मुकाबले यह तरीका निवेशकों के लिए ज्यादा फायदेमंद रहता है।
SGB 2020-21 सीरीज I: टैक्स के मोर्चे पर भी है बड़ा फायदा
इस अर्ली रिडेम्पशन प्रोसेस में व्यक्तिगत निवेशकों को जबरदस्त टैक्स छूट मिलती है। इस ट्रांजेक्शन से होने वाले कैपिटल गेन्स (मुनाफे) पर इनकम टैक्स से पूरी तरह राहत दी गई है। यही वजह है कि फिजिकल या डिजिटल गोल्ड के मुकाबले यह स्कीम ज्यादा आकर्षक मानी जाती है। हालांकि, ध्यान रहे कि बॉन्ड होल्डिंग के दौरान मिलने वाले ब्याज पर आपको अपने मौजूदा टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स देना होगा।
| खासियत | SGB 2020-21 सीरीज I की जानकारी |
|---|---|
| रिडेम्पशन की तारीख | 28 अप्रैल, 2026 |
| कीमत का आधार | 3 दिनों का IBJA औसत |
| कैपिटल गेन्स टैक्स | व्यक्तिगत निवेशकों के लिए पूरी तरह माफ |
अगर आप इस बार यह मौका चूक गए हैं, तो अगली छमाही ब्याज की तारीख तक इंतजार कर सकते हैं। RBI बॉन्ड की पूरी 8 साल की अवधि के दौरान समय-समय पर ऐसे एग्जिट विकल्प देता रहता है। इन तारीखों पर नजर रखकर आप अपने गोल्ड पोर्टफोलियो को बेहतर तरीके से मैनेज कर सकते हैं। भविष्य में पेमेंट में किसी भी तरह की देरी से बचने के लिए बैंक में अपनी KYC डिटेल्स हमेशा अपडेट रखें।


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