Sovereign Gold Bond (SGB) में निवेश करने वालों के लिए 1 जून की तारीख बेहद अहम है। अगर आप अपने गोल्ड बॉन्ड से समय से पहले बाहर निकलना चाहते हैं, तो आपके पास 5 साल बाद निवेश भुनाने (liquidate) का यह खास मौका है। हालांकि, समय से पहले पैसे निकालने से आपको तुरंत कैश तो मिल जाएगा, लेकिन फैसला लेने से पहले इसकी तुलना दूसरे एसेट्स से जरूर कर लें। बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच सही फैसला ही आपके निवेश को बेहतर तरीके से बढ़ा सकता है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) इन रिक्वेस्ट को एक खास फॉर्मूले के आधार पर प्रोसेस करता है। इसके लिए पिछले तीन कामकाजी दिनों के औसत क्लोजिंग प्राइस को आधार बनाया जाता है, ताकि निवेशकों को उनके बॉन्ड की सही मार्केट वैल्यू मिल सके। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी स्पेसिफिक सीरीज की मैच्योरिटी और पेमेंट की पात्रता आज ही चेक कर लें।

SGB, Gold ETF, FD और SIP: निवेश के लिए कौन सा विकल्प है बेहतर?
निवेश बनाए रखें या किसी दूसरे विकल्प को चुनें? यह तय करने के लिए बाकी ऑप्शंस पर नजर डालना जरूरी है। SGB में जहां आपको फिक्स्ड ब्याज मिलता है, वहीं Gold ETF में लिक्विडिटी (पैसे निकालने की सुविधा) बेहतर होती है। दूसरी ओर, इक्विटी SIP लंबी अवधि में ज्यादा रिटर्न दे सकती है। बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) सुरक्षित तो हैं, लेकिन रिटर्न के मामले में ये अक्सर सोने से पीछे रह जाते हैं।
| एसेट का नाम | सालाना ब्याज | टैक्स की स्थिति |
|---|---|---|
| SGB | 2.5 प्रतिशत | मुनाफे पर टैक्स छूट |
| बैंक FD | 6 से 7 प्रतिशत | पूरी तरह टैक्स योग्य |
| गोल्ड ETF | कुछ नहीं | LTCG लागू |
| इक्विटी SIP | मार्केट लिंक्ड | LTCG लागू |
SGB प्री-मैच्योर रिडेम्पशन और 1 जून के लिए जरूरी टैक्स नियम
बॉन्ड को समय से पहले भुनाने में टैक्स की भूमिका सबसे अहम होती है। अगर आप SGB को मैच्योरिटी तक रखते हैं, तो कैपिटल गेन्स पर पूरी तरह टैक्स छूट मिलती है। राहत की बात यह है कि RBI विंडो के जरिए समय से पहले पैसे निकालने पर भी यह टैक्स बेनिफिट मिलता है। हालांकि, अगर आप अपने बॉन्ड स्टॉक एक्सचेंज पर बेचते हैं, तो आपको कैपिटल गेन्स टैक्स देना होगा।
पैसे निकालने से पहले अपनी जरूरतों और भविष्य में मिलने वाले ब्याज के नुकसान का आकलन जरूर करें। अगर आपके पोर्टफोलियो में सोने की मात्रा ज्यादा हो गई है, तो यह उसे बैलेंस करने का अच्छा मौका है। वरना, टैक्स बचाने और वेल्थ बढ़ाने के लिए निवेशित रहना ही सबसे समझदारी भरा फैसला है। 1 जून की डेडलाइन से बचने के लिए सभी जरूरी कागजी कार्रवाई आज ही पूरी कर लें।
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