सरकार ने 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 की तिमाही के लिए छोटी बचत योजनाओं (Small Savings Schemes) की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। Public Provident Fund (PPF) पर पहले की तरह 7.1 फीसदी, National Savings Certificate (NSC) पर 7.7 फीसदी, Senior Citizens’ Savings Scheme (SCSS) पर 8.2 फीसदी और Kisan Vikas Patra (KVP) पर 7.5 फीसदी ब्याज मिलता रहेगा। त्योहारों के इस सीजन में अगर आपके पास एक्स्ट्रा पैसे आ रहे हैं, तो सवाल यह है कि क्या बैंक FD में निवेश करना इन सरकारी योजनाओं से बेहतर रहेगा?
कोई भी फैसला लेने से पहले टैक्स के गणित को समझना जरूरी है। PPF से मिलने वाला रिटर्न पूरी तरह टैक्स फ्री होता है और इसमें Section 80C के तहत टैक्स छूट भी मिलती है। दूसरी तरफ, NSC और SCSS में 1.5 लाख रुपये तक के निवेश पर 80C का फायदा तो मिलता है, लेकिन इनसे मिलने वाले ब्याज पर हर साल टैक्स लगता है। अगर आप ऊंचे टैक्स स्लैब में आते हैं, तो PPF का असल रिटर्न बड़े से बड़े बैंकों की FD से बेहतर साबित होता है। वहीं, कॉरपोरेट डिपॉजिट्स में भले ही ज्यादा ब्याज दर दिखे, लेकिन उनमें क्रेडिट रिस्क और पैसों की निकासी में सख्ती के चलते संभलकर पैसा लगाना चाहिए।

Small Savings vs Bank FD: टैक्स कटने के बाद का असली गणित
त्योहारी सीजन में बोनस या एक्स्ट्रा पैसों को सही जगह पार्क करने के लिए यह आसान तुलना आपके काम आ सकती है। नीचे दी गई तालिका में ब्याज दरों और अलग-अलग टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स कटने के बाद मिलने वाले असल रिटर्न (Post-Tax Yield) को समझाया गया है (इसमें सेस या सरचार्ज शामिल नहीं हैं)। उदाहरण के लिए बैंक FD की दर 7.5 फीसदी मानी गई है। ध्यान रखें कि आपका असली रिटर्न आपके टैक्स स्लैब और नियमों पर निर्भर करेगा। इसे निवेश सलाह के बजाय एक गाइड की तरह देखें।
| स्कीम (Instrument) | ब्याज दर (Nominal) | टैक्स के बाद (30% स्लैब) | टैक्स के बाद (20% स्लैब) | टैक्स के बाद (5% स्लैब) |
|---|---|---|---|---|
| PPF | 7.10% | 7.10% | 7.10% | 7.10% |
| NSC | 7.70% | 5.39% | 6.16% | 7.32% |
| SCSS | 8.20% | 5.74% | 6.56% | 7.79% |
| Bank FD | 7.50% | 5.25% | 6.00% | 7.13% |
लिक्विडिटी, लॉक-इन पीरियड और PPF पर लोन की सुविधा
निवेश करने से पहले यह देख लें कि आपको पैसा कितने समय के लिए ब्लॉक करना है। PPF की मैच्योरिटी 15 साल की होती है, हालांकि शुरुआती सालों में लोन की सुविधा और बाद में सीमित निकासी का विकल्प मिलता है। NSC का लॉक-इन पीरियड 5 साल का है और समय से पहले निकासी पर पेनल्टी व सख्त नियम लागू होते हैं। वरिष्ठ नागरिकों के लिए SCSS एक बेहतरीन विकल्प है, जिसमें 5 साल की अवधि के साथ हर तिमाही ब्याज मिलता है। इमरजेंसी और जरूरतों के लिए 3 से 6 महीने का खर्च छोटी अवधि की बैंक FD में रखना ही समझदारी है।
निवेश की रणनीति: PPF, SCSS और बैंक FD में ऐसे बांटें अपना पैसा
| अवधि (महीने) | 10% सालाना ब्याज पर प्रति ₹1 लाख EMI |
|---|---|
| 12 | ₹8,803 |
| 24 | ₹4,617 |
| 36 | ₹3,227 |
पैसे लगाने के लिए एक सिंपल पोर्टफोलियो बनाएं। लंबे समय में टैक्स फ्री कंपाउंडिंग का फायदा उठाने के लिए PPF सबसे अच्छा जरिया है। रिटायर्ड लोग नियमित आय के लिए पहले SCSS को तरजीह दें और फिर लिक्विडिटी बनाए रखने के लिए 1 से 3 साल की बैंक FD कराएं। बेटियों के बेहतर भविष्य के लिए माता-पिता सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) चुन सकते हैं। कम रेटिंग वाले कॉरपोरेट डिपॉजिट से दूर रहने में ही भलाई है। वहीं अगर आप निवेश की बजाय लोन ले रहे हैं, तो प्रोसेसिंग फीस, इंश्योरेंस और प्री-पेमेंट चार्जेस का हिसाब जरूर लगा लें, क्योंकि ये चीजें आपके लोन की असल EMI लागत बढ़ा देती हैं।


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