भारत में 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 की तिमाही के लिए छोटी बचत योजनाओं (Small Savings Schemes) की नई ब्याज दरों का ऐलान 30 सितंबर तक होना है। ऐसे में निवेशकों के पास दो रास्ते हैं: या तो वे मौजूदा फिक्स्ड रेट्स को तुरंत लॉक कर लें या फिर फ्लोटिंग डिपॉजिट में समझदारी से पैसा लगाएं। आइए जानते हैं कि 30 सितंबर से पहले आप किन-किन स्कीमों में मौजूदा ब्याज दर लॉक कर सकते हैं और अक्टूबर में पीपीएफ (PPF) व सुकन्या समृद्धि (SSY) में जमा को लेकर क्या रणनीति होनी चाहिए।
सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS), नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC), किसान विकास पत्र (KVP) और पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट (TD) जैसी फिक्स्ड-रेट वाली स्कीमों में खाता खुलवाने की तारीख को मिलने वाला ब्याज ही पूरे मैच्योरिटी पीरियड के लिए लॉक हो जाता है। वहीं, पीपीएफ (PPF) और सुकन्या समृद्धि (SSY) जैसी फ्लोटिंग ऑप्शंस पर हर तिमाही तय होने वाली नई दरें लागू होती हैं। वित्त मंत्रालय आमतौर पर 30 सितंबर के आसपास अगली तिमाही की दरों की घोषणा करता है, इसलिए इस हफ्ते लिया गया फैसला काफी अहम होगा।

स्मॉल सेविंग्स रेट्स: जुलाई-सितंबर 2026 की ब्याज दरें एक नजर में
जुलाई-सितंबर 2026 की तिमाही में छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं हुआ था। इस दौरान प्रमुख दरें इस प्रकार थीं: PPF पर 7.1 फीसदी, SCSS पर 8.2 फीसदी, SSY पर 8.2 फीसदी, NSC पर 7.7 फीसदी, KVP पर 7.5 फीसदी, मंथली इनकम अकाउंट (MIS) पर 7.4 फीसदी, 5 साल की RD पर 6.7 फीसदी और टाइम डिपॉजिट पर 6.9 फीसदी (1 साल), 7.1 फीसदी (3 साल) व 7.5 फीसदी (5 साल)। अगर अक्टूबर तिमाही में दरों में कटौती होती है, तो 30 सितंबर से पहले निवेश लॉक करके आप मौजूदा ज्यादा रिटर्न सुरक्षित कर सकते हैं।
| स्कीम | ब्याज दर (जुलाई-सितंबर 2026) |
|---|---|
| PPF | 7.1% |
| SCSS | 8.2% |
| SSY | 8.2% |
| NSC | 7.7% |
| KVP | 7.5% |
| पोस्ट ऑफिस TD (1 साल/3 साल/5 साल) | 6.9% / 7.1% / 7.5% |
| MIS | 7.4% |
| RD (5 साल) | 6.7% |
30 सितंबर से पहले क्या करें: रेट्स लॉक करने और टाइमिंग के नियम
मौजूदा फिक्स्ड ब्याज दरों को लॉक करने के लिए जरूरी है कि आपका खाता 30 सितंबर तक खुल जाए और उसमें रकम भी क्रेडिट (Value-dated) हो जाए। ध्यान रखें कि चेक के जरिए पेमेंट करने पर दरें चेक जमा करने की तारीख से नहीं, बल्कि चेक क्लियर होने की तारीख से लागू मानी जाती हैं। पीपीएफ और सुकन्या समृद्धि में अक्टूबर महीने का पूरा ब्याज पाने के लिए 5 अक्टूबर से पहले पैसे जमा करने की योजना बनाएं, क्योंकि पीपीएफ में ब्याज की गणना महीने की 5 तारीख से आखिरी तारीख के बीच उपलब्ध सबसे कम बैलेंस पर होती है। वहीं, SCSS में निवेशकों को हर तिमाही तय आय मिलती है।
टैक्स के नियम और बैंक FD से तुलना
इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C के तहत PPF, NSC, SSY और 5 साल की बैंक एफडी पर टैक्स छूट मिलती है; इसके अलावा SCSS में जमा की गई मूल राशि पर भी 80C का लाभ लिया जा सकता है। हालांकि, SCSS का ब्याज पूरी तरह से टैक्सेबल होता है। इसमें एक साल में गैर-वरिष्ठ नागरिकों के लिए ₹50,000 और वरिष्ठ नागरिकों के लिए ₹1,00,000 से अधिक ब्याज होने पर 10 फीसदी TDS कटता है। देश के प्रमुख बड़े बैंकों में 1 से 5 साल की FD पर फिलहाल ब्याज दरें 6.25 से 6.50 फीसदी के आसपास ही घूम रही हैं, जिसकी तुलना में कई छोटी बचत योजनाएं अब भी काफी बेहतर रिटर्न दे रही हैं।


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