Education Loan: आज के समय में कई हाई स्टडी के लिए एजुकेशन लोन लेते हैं। बैंक और फाइनेंशियल संस्थाएं यह लोन देश या विदेश, दोनों जगह की पढ़ाई के लिए देती हैं। इस लोन से पढ़ाई का पूरा खर्च कवर हो जाता है और पढ़ाई पूरी होने के बाद EMI के जरिए इसे चुकाना पड़ता है।

EMI से पहले का मोरेटोरियम पीरियड
एजुकेशन लोन की खासियत यह है कि इसमें मोरेटोरियम पीरियड मिलता है। इस अवधि में लोन की किस्त चुकाने की जरूरत नहीं होती। EMI की शुरुआत आमतौर पर कोर्स पूरा होने के कुछ महीने बाद होती है। ऐसे में सवाल उठता है अगर आप लोन तय समय से पहले चुका दें यानी प्रीपेमेंट कर दें, तो क्या यह फायदेमंद है या नुकसानदायक?
जल्दी लोन चुकाने के फायदे
ब्याज का बोझ घटेगा - जितना जल्दी लोन चुकाएंगे उतना कम ब्याज देना होगा। इससे लंबे समय में हजारों-लाखों रुपए बच सकते हैं।
क्रेडिट स्कोर में सुधार - समय से पहले कर्ज खत्म करने से क्रेडिट प्रोफाइल मजबूत होती है, जिससे भविष्य में होम लोन, कार लोन जैसे बड़े लोन लेना आसान हो जाता है।
फाइनेंशियल फ्रीडम - EMI खत्म होते ही मासिक खर्च का बड़ा हिस्सा बचत और निवेश में लगाया जा सकता है।
प्रीपेमेंट के नुकसान भी हैं
टैक्स छूट का फायदा कम हो जाएगा - आयकर कानून की धारा 80E के तहत एजुकेशन लोन के ब्याज पर टैक्स छूट मिलती है। लोन जल्दी चुकाने से यह फायदा कम अवधि तक ही मिलेगा।
कम ब्याज दर वाले लोन में जरूरी नहीं - अगर लोन की ब्याज दर कम है, तो पैसों को प्रीपेमेंट में लगाने के बजाय निवेश करने से ज्यादा मुनाफा मिल सकता है।
कब लें प्रीपेमेंट का फैसला?
जब ब्याज दर ऊंची हो और ब्याज का बोझ ज्यादा लग रहा हो।
आपके पास अतिरिक्त रकम हो और कोई जरूरी खर्च बाकी न हो।
जल्दी कर्ज मुक्त होकर अन्य आर्थिक लक्ष्यों पर ध्यान देना चाहते हों।
एजुकेशन लोन का प्रीपेमेंट करने का फैसला आपकी आर्थिक स्थिति, ब्याज दर और टैक्स लाभ पर निर्भर करता है। अगर ब्याज दर ज्यादा है और टैक्स छूट का नुकसान आपको बहुत प्रभावित नहीं करेगा, तो लोन जल्दी चुका देना सही है। लेकिन अगर ब्याज दर कम है, तो प्रीपेमेंट के बजाय निवेश करना बेहतर विकल्प हो सकता है।


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