भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने आज, 21 सितंबर 2026 को ₹25,000 करोड़ की ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO) बिक्री की है। इससे बाजार से लिक्विडिटी कम हो रही है और बॉन्ड यील्ड में तेजी का रुख देखा जा रहा है। नीलामी से पहले ट्रेडर्स सतर्क दिखे और 10 साल का बेंचमार्क बॉन्ड यील्ड 7.05 प्रतिशत के करीब बना रहा। अगर आपके पास भी सरप्लस पैसा है, तो अगले 0 से 12 महीनों के लिए उसे कहां और कैसे निवेश करें, इसकी पूरी रणनीति यहां समझें।
0 से 3 महीने की छोटी अवधि के लिए पैसा पार्क करना चाहते हैं, तो तीन विकल्पों की तुलना करें। हालिया 91-दिवसीय ट्रेजरी बिल (T-Bill) का कट-ऑफ करीब 5.21 प्रतिशत रहा है, जो बाजार में आसान नकदी की स्थिति को दर्शाता है। लिक्विड फंड्स लगभग 6.3 से 7.0 प्रतिशत का रिटर्न दे रहे हैं, हालांकि शुरुआती 7 दिनों में निकासी पर स्लैब के हिसाब से एग्जिट लोड लगता है। वहीं, बड़े बैंकों में 46 से 179 दिनों की शॉर्ट स्वीप एफडी पर लगभग 4.90 से 5.40 प्रतिशत का ब्याज मिल रहा है। इन तीनों में पैसे की निकासी और सेटलमेंट के नियम अलग-अलग हैं।

FD vs लिक्विड फंड vs T‑bill: 0–3 महीने के लिए कहां लगाएं पैसा?
आपको जल्दबाजी में नहीं, बल्कि सही रणनीति के साथ कदम उठाना होगा। एग्जिट लोड से बचने के लिए लिक्विड फंड में कम से कम 1 हफ्ते का बफर रखें। इसके बाद, बाजार बंद होने से पहले अपने ब्रोकर के NSE RFQ या RBI रिटेल डायरेक्ट के जरिए सेकेंडरी मार्केट से 91-दिवसीय ट्रेजरी बिल खरीदें। इसका सेटलमेंट T+1 आधार पर होता है, यानी फंड मंगलवार, 22 सितंबर को मिल जाएंगे। लिक्विड फंड में नए निवेश के लिए ज्यादातर प्लेटफॉर्म्स दोपहर 1:30 बजे का NAV कट-ऑफ टाइम रखते हैं, जबकि कुछ ऐप्स पर दोपहर 3:00 बजे का फंड्स-क्रेडिट नियम लागू होता है—इसलिए अपने ऐप पर शर्तें जरूर जांच लें।
| विकल्प (Instrument) | अनुमानित सालाना यील्ड/रिटर्न | अंतर का मुख्य कारण |
|---|---|---|
| 91‑दिवसीय T‑bill | ~5.21% | नीलामी पर आधारित; बाजार में सरप्लस नकदी के कारण हाल ही में कट-ऑफ घटा है। |
| लिक्विड फंड (कैटेगरी) | ~6.3%–7.0% | CPs और CDs में निवेश; शुरुआती 7 दिनों में एग्जिट लोड लागू होता है। |
| SBI FD 46–179 दिन | ~4.90%–5.40% | बैंक की दरें; स्वीप-इन से उसी दिन पैसे मिलते हैं, लेकिन पेनल्टी लगती है। |
ऊपर दिए गए आंकड़े सितंबर की नीलामी के नतीजों, लिक्विड फंड्स के मौजूदा रिटर्न और प्रमुख बैंकों की कार्ड रेट्स पर आधारित हैं। लिक्विड फंड्स पर एग्जिट लोड केवल शुरुआती सात दिनों के भीतर सेबी (SEBI) के तय स्लैब के अनुसार लगता है। ट्रेजरी बिल और अन्य सरकारी सिक्योरिटीज का सेटलमेंट एक्सचेंजों और NDS-OM पर T+1 बेसिस पर होता है, जिनकी ट्रेडिंग का समय सुबह 9:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक रहता है।
6–12 महीने: बैंक FD और अल्ट्रा‑शॉर्ट फंड्स में से कौन बेहतर?
अगर आप 6 से 12 महीने के लिए पैसा लगाना चाहते हैं, तो बैंक एफडी आज की ब्याज दर को लॉक कर देती है, जिससे दोबारा निवेश का जोखिम खत्म हो जाता है। उदाहरण के लिए, एसबीआई (SBI) की 1 साल की एफडी दर करीब 6.25 प्रतिशत है। समय से पहले निकासी करने पर आमतौर पर 0.5 से 1.0 प्रतिशत तक की पेनल्टी देनी पड़ती है। दूसरी ओर, अल्ट्रा-शॉर्ट फंड्स का रिटर्न बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करता है। अगर आरबीआई की बॉन्ड बिक्री से शॉर्ट-टर्म यील्ड बढ़ती है, तो इन फंड्स को इसका फायदा मिल सकता है।
टैक्स का गणित और आज T‑bill खरीदने का तरीका
1 अप्रैल 2023 से लागू नियमों के तहत, ज्यादातर डेट म्यूचुअल फंड से होने वाले फायदे पर बैंक एफडी की तरह ही निवेशक के टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। ट्रेजरी बिल पर मिलने वाले डिस्काउंट को भी ब्याज से हुई आय ही माना जाता है और इस पर आमतौर पर कोई TDS नहीं कटता। इसका टैक्स हिसाब-किताब मैच्योरिटी या बिक्री के समय होता है। अगर आप आज ट्रेजरी बिल खरीदना चाहते हैं, तो अपने ब्रोकर के जरिए NSE RFQ या RBI रिटेल डायरेक्ट का इस्तेमाल कर सकते हैं। वहीं, मनचाही NAV पाने के लिए म्यूचुअल फंड ऑर्डर तय कट-ऑफ टाइम से पहले ही प्लेस करें।


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