सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) की 2021-22 सीरीज VII के निवेशकों के लिए 2 नवंबर 2026 को अर्ली रिडेम्पशन (समय से पहले पैसा निकालने) की विंडो खुल रही है। इसके लिए निवेशकों को 1 अक्टूबर से 23 अक्टूबर के बीच अपने बैंक, डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट या आरबीआई रिटेल डायरेक्ट (RBI Retail Direct) के जरिए आवेदन जमा करना था। रिडेम्पशन की कीमत IBJA 999 गोल्ड के औसत भाव से तय होगी। ध्यान रहे कि 1 अप्रैल 2026 से टैक्स नियमों में बड़ा बदलाव हुआ है। अब कैपिटल गेन टैक्स से छूट सिर्फ उन्हीं ओरिजिनल सब्सक्राइबर्स को मिलेगी जो मैच्योरिटी तक बॉन्ड होल्ड करते हैं। यानी समय से पहले रिडेम्पशन करने पर अब टैक्स देना होगा।
रिडेम्पशन की प्रक्रिया इस बात पर निर्भर करती है कि आपके बॉन्ड किस फॉर्मेट में हैं। अगर आपके पास बॉन्ड बैंक या BLA फॉर्म में हैं, तो इश्यू करने वाली ब्रांच में सर्टिफिकेट और पैन (PAN) कार्ड के साथ RBI एनेक्सचर फॉर्म जमा करना होगा। डीमैट अकाउंट में बॉन्ड होने पर अपने DP (डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट) के पास रीपरचेज या रिडेम्पशन रिक्वेस्ट फॉर्म भरें। वहीं आरबीआई रिटेल डायरेक्ट यूजर्स सीधे ऑनलाइन सर्विस रिक्वेस्ट दर्ज कर सकते हैं। डिपॉजिटरीज की सलाह है कि ब्याज मिलने की तारीख से कम से कम 10 दिन पहले आवेदन जरूर जमा कर दें। इसके अलावा, फिजिकल सर्टिफिकेट रखने वाले निवेशकों के लिए NSE e-IPO विंडो का विकल्प भी मौजूद है।

SGB अर्ली रिडेम्पशन: टैक्स के नियम और मार्केट में बिक्री का गणित
साल 2026 के नए संशोधन के तहत कैपिटल गेन टैक्स छूट का दायरा सीमित कर दिया गया है। यह छूट अब सिर्फ उन्हीं लोगों को मिलेगी जिन्होंने इश्यू के वक्त बॉन्ड खरीदे थे और मैच्योरिटी तक बने रहे। अगर आप समय से पहले रिडेम्पशन चुनते हैं, तो मौजूदा नियमों के तहत कैपिटल गेन टैक्स लगेगा। इसी तरह, स्टॉक एक्सचेंज पर SGB बेचने पर भी कैपिटल गेन टैक्स देना होगा। वहीं, बॉन्ड पर मिलने वाला 2.5 फीसदी सालाना ब्याज आपकी रेगुलर इनकम में जुड़ेगा और उस पर टैक्स लगेगा। इसलिए कोई भी फैसला लेने से पहले अपने बॉन्ड की खरीदारी की तारीख और होल्डिंग रूट की जांच जरूर कर लें।
पैसे निकालें या बने रहें? Gold ETF, FoF और फिजिकल गोल्ड से तुलना
SGB में बने रहने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको सोने की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ-साथ 2.5 फीसदी का पक्का ब्याज मिलता रहता है, हालांकि इसमें लिक्विडिटी सीमित मौकों पर ही मिलती है। दूसरी तरफ, गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) में आप ट्रेडिंग डे के दौरान कभी भी खरीदारी-बिक्री कर सकते हैं, लेकिन इसमें 0.4 से 0.8 फीसदी का सालाना खर्च (Expense Ratio) देना पड़ता है। नियम के मुताबिक इनमें ट्रैकिंग एरर की सीमा 2 फीसदी तय है। वहीं, गोल्ड फंड ऑफ फंड्स (Gold FoF) में फीस की दोहरी परत होती है। टैक्स की बात करें तो 1 अप्रैल 2023 या उसके बाद खरीदे गए Gold ETF/FoF की यूनिट्स पर आपकी टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है।
रिडीम करें या होल्ड? दिवाली से पहले ब्याज दरों और लिक्विडिटी का सही हिसाब
अगर आपको निकट भविष्य में पैसों की जरूरत है, तो SGB के 2.5 फीसदी ब्याज की तुलना में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) या लिक्विड फंड्स बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, 1 साल की बैंक FD पर फिलहाल 6.5 से 7.5 फीसदी के आसपास ब्याज मिल रहा है, जबकि बड़े लिक्विड फंड्स ने इस साल की शुरुआत में करीब 7 फीसदी तक रिटर्न दिया है। ऐसे में अगर आपको अचानक पैसों की जरूरत पड़ती है, तो रिडेम्पशन विंडो के बीच में Gold ETF और लिक्विड फंड्स लिक्विडिटी के मामले में SGB से काफी आगे निकल जाते हैं।
| विकल्प (Instrument) | संभावित रिटर्न/ब्याज | लिक्विडिटी | मुख्य खर्च/टैक्स |
|---|---|---|---|
| SGB (होल्ड करने पर) | 2.5% प्लस गोल्ड रिटर्न | छमाही (Half-yearly) विंडो | ओरिजिनल सब्सक्राइबर्स के लिए सिर्फ मैच्योरिटी पर CGT फ्री |
| Gold ETF / FoF | गोल्ड के ट्रैक पर, 0.4–0.8% घटाकर | इंट्राडे / T+2 | 1 अप्रैल 2023 के बाद खरीदी यूनिट्स पर स्लैब के अनुसार टैक्स |
| 1-साल की FD / लिक्विड फंड | ~6.5–7.5% / ~7% | हाई / T+0‑T+1 | ब्याज पर स्लैब के अनुसार टैक्स |
अगर आपकी सीरीज अर्ली रिडेम्पशन के लिए एलिजिबल है और आपको जल्द ही पैसों की जरूरत है, तो रिडेम्पशन विंडो का फायदा उठाना सही रहेगा। इससे मिले पैसे को आप लिक्विड फंड या शॉर्ट-टर्म FD में लगा सकते हैं। लेकिन अगर आप ओरिजिनल सब्सक्राइबर हैं और टैक्स-फ्री रिटर्न का फायदा उठाना चाहते हैं, तो मैच्योरिटी तक बने रहना ही बेहतर रणनीति होगी। त्योहारी खरीदारी से ठीक पहले किसी भी तकनीकी अड़चन से बचने के लिए अपने पेपर सर्टिफिकेट को डीमैट में बदल लें या उपलब्ध NSE की फिजिकल फैसिलिटी का इस्तेमाल करें।


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